दिल्ली के विवेक विहार में फर्जी CBI अधिकारियों ने की 2.5 करोड़ की लूट- दो आरोपी गिरफ्तार, 1.25 करोड़ बरामद।
Delhi: दिल्ली के विवेक विहार इलाके में 19 अगस्त 2025 को एक सनसनीखेज लूट की घटना ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया। एक गैंग ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों
दिल्ली के विवेक विहार इलाके में 19 अगस्त 2025 को एक सनसनीखेज लूट की घटना ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया। एक गैंग ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों के रूप में खुद को पेश करते हुए एक कारोबारी के दफ्तर से लगभग 2.5 करोड़ रुपये लूट लिए। इस हाई-प्रोफाइल लूटकांड को अंजाम देने के लिए गैंग ने नकली रेड डाली, कारोबारी के कर्मचारियों को धमकाया और दो लोगों को बंधक बनाकर नकदी लूट ली। दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से 1.25 करोड़ रुपये बरामद किए हैं। पुलिस ने बताया कि इस गिरोह में चार महिलाओं सहित कई अन्य लोग शामिल हैं, जिनकी तलाश के लिए छापेमारी जारी है।
यह घटना गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी मनप्रीत सिंह के साथ हुई, जो फाइनेंस, प्रॉपर्टी डीलिंग और कंस्ट्रक्शन के व्यवसाय से जुड़े हैं। मनप्रीत ने विवेक विहार में एक किराए के दफ्तर में अपने व्यवसाय से कमाए हुए लगभग 2.5 करोड़ रुपये रखे थे। 19 अगस्त को उन्होंने अपने दोस्त रवि शंकर को इस दफ्तर से 1.10 करोड़ रुपये नकद लेकर उनके इंदिरापुरम स्थित घर लाने के लिए कहा। जैसे ही रवि शंकर नकदी का बैग लेकर दफ्तर से बाहर निकले, दो कारों में सवार चार लोग, जिनमें एक महिला भी शामिल थी, ने उन्हें रोक लिया। इन लोगों ने खुद को CBI अधिकारी बताते हुए वॉकी-टॉकी और नकली पहचान पत्र दिखाए। उन्होंने रवि शंकर के साथ मारपीट की और नकदी का बैग छीन लिया। इसके बाद, आरोपी रवि को जबरदस्ती दफ्तर के अंदर ले गए, जहां उन्होंने मनप्रीत के कर्मचारी दीपक माहेश्वरी पर भी हमला किया और बाकी नकदी लूट ली। पुलिस के अनुसार, लुटेरों ने रवि शंकर और दीपक माहेश्वरी को अपनी कार में बंधक बनाकर अलग-अलग स्थानों पर ले गए। उन्हें चिंतामणि अंडरपास और जमनागर बाजार के पास धमकी देकर छोड़ दिया गया। मनप्रीत ने 20 अगस्त को विवेक विहार थाने में शिकायत दर्ज की, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। शाहदरा के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) प्रशांत गौतम ने बताया कि पुलिस ने 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की और तकनीकी निगरानी की मदद ली। जांच में पता चला कि लूट में इस्तेमाल दो कारें फरीदाबाद से किराए पर ली गई थीं। इन कारों के ड्राइवरों ने खुलासा किया कि वाहन एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) “क्राइम ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन” ने किराए पर लिए थे, जिसका दफ्तर साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैदुल्लाजब में है।
पुलिस ने इस जानकारी के आधार पर सैदुल्लाजब में NGO के दफ्तर पर छापा मारा और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें 31 वर्षीय पापोरी बरुआ, जो असम की रहने वाली हैं और NGO की सचिव हैं, और 32 वर्षीय दीपक, जो तुगलकाबाद का निवासी है, शामिल हैं। तलाशी के दौरान पुलिस ने पापोरी बरुआ के पास से 1.08 करोड़ रुपये और दीपक के पास से 17.5 लाख रुपये बरामद किए। बाद में, पुलिस ने इस NGO के निदेशक 62 वर्षीय राम सिंह मीणा को भी गिरफ्तार किया। कुल मिलाकर 1.25 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की गई है। DCP गौतम ने बताया कि इस लूट में आठ लोग शामिल थे, जिनमें चार महिलाएं हैं, और बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी जारी है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 392 (लूट), 395 (डकैती), 397 (हथियारों के साथ लूट), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत भी जांच की जा रही है, क्योंकि गैंग ने तकनीकी साधनों का इस्तेमाल कर इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने बताया कि यह गैंग सुनियोजित तरीके से काम करता था। उन्होंने CBI अधिकारियों की तरह व्यवहार करने के लिए वॉकी-टॉकी और नकली पहचान पत्र तैयार किए थे, ताकि पीड़ितों को डराया जा सके।
इस घटना ने दिल्ली में अपराध के बढ़ते ग्राफ और खासकर फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर लूटपाट करने की प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह पहली बार नहीं है जब अपराधियों ने CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों की आड़ में लूट की घटनाओं को अंजाम दिया हो। इससे पहले 2023 में भुवनेश्वर के नंदन विहार में पांच लोगों ने CBI अधिकारियों के रूप में एक ठेकेदार के घर पर छापा मारकर 1.7 करोड़ रुपये लूटे थे। उस मामले में भी पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था और 1 करोड़ रुपये बरामद किए थे। दिल्ली के अशोक विहार में भी 2023 में एक व्यवसायी के घर से 2 करोड़ रुपये की लूट हुई थी, जिसमें चार लोग शामिल थे। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं संगठित अपराध का हिस्सा हैं, जहां गैंग बड़े पैमाने पर नकदी रखने वाले व्यवसायियों को निशाना बनाते हैं। इस मामले में भी पुलिस को शक है कि गैंग को मनप्रीत के दफ्तर में इतनी बड़ी रकम होने की पहले से जानकारी थी। संभवतः किसी अंदरूनी व्यक्ति ने गैंग को इसकी सूचना दी थी। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है और मनप्रीत के कर्मचारियों व सहयोगियों से पूछताछ कर रही है।
स्थानीय लोगों और व्यवसायियों ने इस घटना पर चिंता जताई है। विवेक विहार के एक दुकानदार ने बताया कि इस तरह की वारदात से छोटे व्यवसायी डर रहे हैं, क्योंकि वे अक्सर नकदी में लेन-देन करते हैं। उन्होंने सरकार और पुलिस से व्यवसायियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे बड़ी मात्रा में नकदी अपने दफ्तर या घर में न रखें और डिजिटल लेन-देन को प्राथमिकता दें। इस घटना ने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। कई लोगों का मानना है कि पुलिस को ऐसी संगठित गैंगों पर नजर रखने के लिए और सख्ती बरतनी चाहिए। DCP गौतम ने आश्वासन दिया कि पुलिस इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रही है और जल्द ही बाकी आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस नियमित रूप से साइबर और संगठित अपराधों की निगरानी कर रही है। मनप्रीत सिंह ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बाकी रकम जल्द बरामद होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यह रकम उनके व्यवसाय की सात महीने की कमाई थी, और इस लूट ने उनके कारोबार को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।
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