Success Story: 8 साल की IPS सेवा छोड़ कॉर्पोरेट में उतरे राजन सिंह, ऐसे खड़ा किया करोड़ों का स्टार्टअप वेंचर

8 साल तक भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में रहने के बाद राजन सिंह ने खाकी छोड़ कॉर्पोरेट जगत में कदम रखा। व्हार्टन से एमबीए कर उन्होंने ConceptOwl और HabitStrong जैसे सफल स्टार्टअप खड़े किए।

Sep 21, 2026 - 12:54
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Success Story: 8 साल की IPS सेवा छोड़ कॉर्पोरेट में उतरे राजन सिंह, ऐसे खड़ा किया करोड़ों का स्टार्टअप वेंचर
  • खाकी की वर्दी से स्टार्टअप फाउंडर तक का सफर: पूर्व आईपीएस राजन सिंह ने ConceptOwl और HabitStrong से लिखी सफलता की इबारत
  • Career Transition: जब कमिश्नर स्तर के आईपीएस ने दिया इस्तीफा, जानिए राजन सिंह के पुलिस अफसर से सफल उद्यमी बनने की पूरी कहानी
  • IPS To Entrepreneur: कभी त्रिवेंद्रम के पुलिस कमिश्नर थे राजन सिंह, आज एडटेक और हैबिट बिल्डिंग प्लेटफॉर्म से बदल रहे जिंदगियां

नई दिल्ली। भारतीय प्रशासनिक और पुलिस सेवा (UPSC Civil Services) में चयन देश के लाखों युवाओं का अंतिम सपना होता है। सुरक्षा, प्रतिष्ठा, सम्मान और असीम प्रशासनिक अधिकारों से युक्त इस पद को पाने के बाद अधिकांश लोग पूरी उम्र इसी व्यवस्था का हिस्सा बने रहना पसंद करते हैं। हालांकि, कुछ व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं जो बने-बनाए रास्तों से अलग हटकर अपनी आंतरिक प्रेरणा और नवाचार के दम पर नई राह तैयार करते हैं। ऐसी ही प्रेरक यात्रा है पूर्व आईपीएस अधिकारी राजन सिंह की, जिन्होंने आठ वर्षों तक पुलिस सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने और तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) के पुलिस कमिश्नर जैसे शीर्ष पद पर रहने के बावजूद वर्दी को अलविदा कह दिया और उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) की दुनिया में कदम रखकर सफलता का नया अध्याय लिखा।

राजन सिंह की यह कहानी केवल एक उच्च पदस्थ अधिकारी द्वारा नौकरी छोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि व्यक्ति में जोखिम उठाने का साहस, निरंतर सीखने की ललक और समस्याओं के व्यावहारिक समाधान खोजने का विजन हो, तो वह किसी भी क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ सकता है। आज वे शिक्षा और उत्पादकता क्षेत्र में काम कर रहे दो प्रमुख प्लेटफॉर्म्स 'कॉन्सेप्टआउल' (ConceptOwl) और 'हैबिटस्ट्रॉन्ग' (HabitStrong) के जरिए हजारों युवाओं और कामकाजी पेशेवरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

आईआईटी से खाकी तक का सफर: असाधारण शैक्षणिक और पेशेवर आधार

राजन सिंह की पृष्ठभूमि हमेशा से मेधा और कठिन परिश्रम से जुड़ी रही है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) से इंजीनियरिंग की स्नातक डिग्री हासिल की थी। तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने के बाद उन्होंने समाज में प्रत्यक्ष प्रभाव डालने के उद्देश्य से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में भाग लिया। उत्कृष्ट रैंक के साथ उनका चयन प्रतिष्ठित भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए हुआ।

उन्हें केरल कैडर आवंटित किया गया। पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और प्रशासनिक सुधारों में कड़े व निष्पक्ष निर्णयों के लिए पहचान बनाई। अपनी आठ वर्षों की सेवा के दौरान वे विभिन्न चुनौतीपूर्ण पदों पर तैनात रहे। उनके सेवाकाल का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव तब आया जब उन्हें केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम का पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया। इस संवेदनशील पद पर रहते हुए उन्होंने शहर में सामुदायिक पुलिसिंग, आधुनिक गश्त प्रणाली और नागरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के कई नवोन्मेषी प्रयास किए।

जब सुरक्षित करियर छोड़कर चुना वैश्विक शिक्षा का मार्ग

कमिश्नर के पद पर सफलता की बुलंदियों को छूने के बावजूद, राजन सिंह के भीतर कुछ नया सीखने और वैश्विक स्तर पर व्यापारिक प्रणालियों को समझने की बेचैनी बनी हुई थी। उन्हें यह आभास हुआ कि वे अपना शेष जीवन केवल प्रशासनिक सीमाओं में बंधकर नहीं बिताना चाहते। इसी विचार के तहत, सेवा के आठवें वर्ष में उन्होंने एक बड़ा और साहसिक फैसला लेते हुए भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया।

सरकारी सेवा छोड़ने के बाद उन्होंने वैश्विक व्यापार प्रबंधन की पढ़ाई के लिए दुनिया के शीर्षस्थ बिजनेस स्कूलों में गिने जाने वाले अमेरिका स्थित 'द व्हार्टन स्कूल, यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया' का रुख किया। वहां उन्होंने फाइनेंस और स्ट्रैटेजी में एमबीए (MBA) की उपाधि प्राप्त की। व्हार्टन से निकलने के बाद उन्होंने वैश्विक वित्तीय राजधानी न्यूयॉर्क और परामर्श जगत में काम किया, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट ढांचे, वित्तीय प्रबंधन और आधुनिक उपभोक्ता व्यवहार की गहरी समझ प्राप्त हुई।

  • स्टार्टअप की शुरुआत: 'ConceptOwl' से शिक्षा में सुधार की पहल

भारत लौटने के बाद राजन सिंह ने देश की शिक्षा प्रणाली में मौजूद कमियों को दूर करने की ठानी। उन्होंने देखा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी छात्रों के पास महंगे कोचिंग संस्थानों और शीर्ष शिक्षकों तक पहुंच नहीं है। इस समस्या को हल करने के लिए उन्होंने एडटेक प्लेटफॉर्म 'कॉन्सेप्टआउल' (ConceptOwl) की नींव रखी।

कॉन्सेप्टआउल का उद्देश्य विज्ञान और गणित जैसे जटिल विषयों को रटने के बजाय वैचारिक समझ (कंसेप्चुअल लर्निंग) के माध्यम से सिखाना था। इस प्लेटफॉर्म ने किफायती दरों पर छात्रों को सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल शिक्षा उपलब्ध कराई। राजन का मानना था कि यदि छात्रों की बुनियादी समझ मजबूत कर दी जाए, तो वे बिना किसी अतिरिक्त मानसिक दबाव के प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकते हैं।

  • 'HabitStrong' का जन्म: डिजिटल भटकाव के दौर में अनुशासन का पाठ

शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हुए राजन सिंह ने एक और बड़ी सामाजिक चुनौती की पहचान की डिजिटल भटकाव, ध्यान की कमी (लैक ऑफ फोकस) और जीवन में अनुशासित दिनचर्या का अभाव। स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और काम के बढ़ते दबाव के कारण युवा और पेशेवर मानसिक तनाव तथा कार्य टालने (प्रोक्रैस्टिनेशन) की आदत से जूझ रहे थे।

इसी समस्या के समाधान के रूप में उन्होंने 'हैबिटस्ट्रॉन्ग' (HabitStrong) की शुरुआत की। यह एक व्यवहार परिवर्तन और आदत निर्माण (हैबिट बिल्डिंग) प्लेटफॉर्म है। इसमें सैन्य व पुलिस सेवा के कठोर अनुशासन और आधुनिक मनोविज्ञान के सिद्धांतों को मिलाकर बूटकैंप और वर्कशॉप्स संचालित की जाती हैं। इसके प्रमुख कार्यक्रमों में:

डीप वर्क और फोकस: विकर्षणों को दूर कर घंटों तक एकाग्रचित्त होकर काम करना।

डिजिटल डिटॉक्स: अत्यधिक स्क्रीन समय और सोशल मीडिया की लत से मुक्ति।

दैनिक दिनचर्या और उत्पादकता: सुबह जल्दी उठने, पढ़ने और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को नियमित रखने की आदतें।

आज इस प्लेटफॉर्म के जरिए देश-विदेश के हजारों कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स, छात्र और उद्यमी अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन को नई दिशा दे रहे हैं।

  • युवाओं के लिए सीख: पद नहीं, सीखने की क्षमता बनाती है सफल

राजन सिंह की यह अनूठी यात्रा सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों और कॉर्पोरेट जगत के युवाओं दोनों के लिए गहरा संदेश देती है। वे बताते हैं कि किसी एक पद या पहचान को अपनी अंतिम मंजिल नहीं मानना चाहिए। जीवन निरंतर नया सीखने, चुनौतियों से टकराने और समाज को सार्थक समाधान देने की प्रक्रिया है। खाकी से लेकर स्टार्टअप फाउंडर तक का उनका यह सफर साबित करता है कि सच्चा नेतृत्व वही है जो अज्ञात रास्तों पर चलने का साहस रखे।

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