Parliament Monsoon Session: मॉनसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में भारी हंगामा, बागी TMC सांसदों पर भड़का विपक्ष

Monsoon Session Updates: संसद के मॉनसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में बागी टीएमसी सांसदों की मौजूदगी को लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और वॉकआउट कर दिया।

Jul 19, 2026 - 14:13
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Parliament Monsoon Session: मॉनसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में भारी हंगामा, बागी TMC सांसदों पर भड़का विपक्ष
Rebel TMC MPs

  • All Party Meeting High Drama: सर्वदलीय बैठक में बागी टीएमसी सांसदों की मौजूदगी पर विपक्ष का वॉकआउट, मान-मनौव्वल के बाद फिर हुए शामिल
  • संसद सत्र से पहले ही मचा घमासान! सर्वदलीय बैठक में बागी TMC सांसदों को देख भड़के विपक्षी नेता, कर दिया वॉकआउट
  • Monsoon Session: सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का भारी हंगामा और वॉकआउट, बागी टीएमसी सांसदों को लेकर बढ़ा विवाद

संसद के आगामी मॉनसून सत्र (Monsoon Session) की शुरुआत से ठीक पहले बुलाई गई पारंपरिक सर्वदलीय बैठक (All Party Meeting) में रविवार को जबरदस्त सियासी हाई-ड्रामा देखने को मिला। राजधानी दिल्ली में सरकार द्वारा बुलाई गई इस महत्वपूर्ण बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों की उपस्थिति को लेकर विपक्षी खेमा पूरी तरह भड़क गया। कांग्रेस सहित प्रमुख विपक्षी दलों ने बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और बैठक का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट (Opposition Walkout) कर दिया। हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री और वरिष्ठ नेताओं की मध्यस्थता तथा मान-मनौव्वल के बाद विपक्षी दल कुछ देर बाद दोबारा चर्चा में शामिल होने के लिए मान गए। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि आगामी सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।

यह पूरा विवाद संसद के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा आयोजित की जाने वाली सर्वदलीय बैठक के दौरान पैदा हुआ। बैठक में विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं को सत्र के एजेंडे पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया था। लेकिन जैसे ही विपक्ष के नेताओं ने वहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उन बागी सांसदों को उपस्थित देखा, जिन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण आधिकारिक खेमे से अलग माना जा रहा था, बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया। विपक्ष ने इस कदम को रणनीतिक रूप से उन्हें कमजोर करने की कोशिश बताया और बैठक कक्ष से बाहर निकल गए।

रविवार सुबह जब संसद भवन परिसर में बैठक शुरू हुई, तो माहौल सामान्य था। सत्तापक्ष की ओर से रक्षा मंत्री, संसदीय कार्य मंत्री और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे, जबकि विपक्ष की ओर से भी प्रमुख चेहरों ने शिरकत की थी। विवाद तब शुरू हुआ जब सीटों के आवंटन और भागीदारी सूची में टीएमसी के बागी धड़े के नेताओं के नाम सामने आए। विपक्षी नेताओं, विशेषकर आधिकारिक टीएमसी नेतृत्व और सहयोगी दलों ने इस पर तीखी आपत्ति जताई।

उनका तर्क था कि जब पार्टी ने इन सांसदों के खिलाफ अनुशासनात्मक रुख अपनाया है, तो उन्हें सर्वदलीय बैठक में एक स्वतंत्र इकाई के रूप में मंच देना संसदीय परंपराओं के विपरीत है। तीखी बहसबाजी और हंगामे के बीच विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और एकजुट होकर बैठक से वॉकआउट कर दिया। इसके बाद संसदीय सौहार्द बनाए रखने के लिए सरकार तुरंत हरकत में आई। केंद्रीय मंत्रियों ने विपक्षी कॉरिडोर में जाकर नेताओं से बातचीत की और यह स्पष्ट किया कि तकनीकी तौर पर वे अभी भी सदन के सदस्य हैं, इसलिए उन्हें बुलाया गया था। उचित आश्वासन मिलने के बाद विपक्ष का गुस्सा शांत हुआ और वे पुनः बैठक में शामिल हुए।

विपक्ष की ओर से वरिष्ठ नेताओं ने साझा बयान में कहा, "सरकार जानबूझकर विपक्ष की एकता को तोड़ने और मुख्य दलों को नीचा दिखाने के लिए बागी गुटों को बढ़ावा दे रही है। यदि आधिकारिक पार्टियों की राय को दरकिनार किया जाएगा, तो ऐसी बैठकों का कोई औचित्य नहीं रह जाता। हम गरिमा की रक्षा के लिए बाहर आए थे।"

सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से संसदीय कार्य मंत्री ने इस स्थिति पर संतुलन साधते हुए कहा, "सरकार सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों की आवाज सुनने के लिए प्रतिबद्ध है। नियमों के तहत जब तक किसी सदस्य की सदस्यता पर कोई अंतिम तकनीकी फैसला नहीं होता, तब तक उन्हें बैठकों से अलग नहीं किया जा सकता। विपक्ष का वॉकआउट जल्दबाजी में उठाया गया कदम था, लेकिन हमें खुशी है कि वे वापस आए और सत्र को सकारात्मक रूप से चलाने के लिए अपनी सहमति दी।"

इस घटनाक्रम ने आगामी मॉनसून सत्र के शुरू होने से पहले ही राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। विपक्ष द्वारा दिखाए गए कड़े तेवरों से यह स्पष्ट है कि वे सरकार को किसी भी मोर्चे पर वॉकओवर देने के मूड में नहीं हैं। इस वॉकआउट और फिर वापसी की घटना ने विपक्षी एकजुटता की ताकत को भी प्रदर्शित किया है, जहां सभी सहयोगी दल टीएमसी के सुर में सुर मिलाते नजर आए। वहीं, दूसरी ओर इसने सत्तापक्ष को भी यह संकेत दे दिया है कि सदन के भीतर विधायी कार्यों को पारित कराने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। इस हंगामे के कारण सत्र के शुरुआती दिनों में कामकाज प्रभावित होने और विभिन्न मुद्दों पर स्थगन प्रस्ताव आने की आशंका काफी बढ़ गई है।

सर्वदलीय बैठक में भले ही आम सहमति बनाने की कोशिश की गई हो, लेकिन बागी सांसदों का मुद्दा अभी पूरी तरह थमा नहीं है। सोमवार से शुरू हो रहे मॉनसून सत्र के दौरान सदन के भीतर सीटों के आवंटन और बोलने के समय को लेकर दोबारा विवाद खड़ा हो सकता है। सरकार की योजना इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पटल पर रखने की है, जबकि विपक्ष ने भी महंगाई, बेरोजगारी और क्षेत्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। अब देखना होगा कि स्पीकर और सभापति महोदय इस राजनीतिक खींचतान के बीच सदन की कार्यवाही को किस तरह व्यवस्थित रख पाते हैं।

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