मध्य प्रदेश की बड़ी खबर: मोहन कैबिनेट ने UCC ड्राफ्ट को दी मंजूरी, कल विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा ऐतिहासिक बिल

MP Uniform Civil Code Updates: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। मोहन कैबिनेट की मंजूरी के बाद कल यह बिल विधानसभा में आएगा।

Jul 19, 2026 - 14:22
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मध्य प्रदेश की बड़ी खबर: मोहन कैबिनेट ने UCC ड्राफ्ट को दी मंजूरी, कल विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा ऐतिहासिक बिल
Uniform Civil Code Madhya Pradesh
  • MP UCC News Updates: मध्य प्रदेश में लागू होगा यूसीसी, मोहन कैबिनेट की मुहर के बाद कल विधानसभा में पेश होगा बिल
  • Uniform Civil Code MP: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता की तैयारी, डॉ. मोहन यादव कैबिनेट की मंजूरी के बाद कल विधानसभा में पेशी
  • MP UCC Bill: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता को कैबिनेट की मंजूरी, कल विधानसभा में पेश करेगी मोहन सरकार

देश के दिल कहे जाने वाले राज्य मध्य प्रदेश से एक बड़ी और ऐतिहासिक राजनीतिक खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक (Mohan Yadav Cabinet) में राज्य में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी (MP UCC Bill) लागू करने के प्रस्ताव पर आधिकारिक मुहर लगा दी गई है। यह ऐतिहासिक निर्णय रविवार (19 जुलाई 2026) को हुई कैबिनेट की आपात बैठक में लिया गया। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस महत्वपूर्ण विधेयक को कल यानी सोमवार को मध्य प्रदेश विधानसभा के पटल पर चर्चा और पारित कराने के लिए पेश किया जाएगा। उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश देश का ऐसा दूसरा भाजपा शासित राज्य बनने की राह पर है, जो अपने यहाँ सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता को कानूनी रूप देने जा रहा है।

यह पूरा घटनाक्रम मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code Madhya Pradesh) को लागू करने की दिशा में सरकार के अंतिम विधिक कदम से जुड़ा है। राज्य सरकार ने लंबे समय से चल रही प्रशासनिक और कानूनी तैयारियों के बाद आखिरकार यूसीसी के ड्राफ्ट को कैबिनेट के समक्ष रखा, जहां मंत्रियों की आम सहमति से इसे मंजूरी दे दी गई। इस कानून के लागू होने के बाद मध्य प्रदेश में रहने वाले सभी धर्मों और समुदायों के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार, गोद लेने और गुजारा भत्ता जैसे व्यक्तिगत मामलों के लिए एक समान कानून व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी, जो वर्तमान में अलग-अलग पर्सनल लॉ के तहत संचालित होते हैं।

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता की रूपरेखा तैयार करने का काम पिछले कई महीनों से चल रहा था। इसके लिए सरकार द्वारा विशेषज्ञों और विधि विशेषज्ञों की एक विशेष समिति का गठन भी किया गया था, जिसने विभिन्न हितधारकों से सुझाव लेने के बाद ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया।

रविवार को बुलाई गई विशेष कैबिनेट बैठक में इस विधेयक के सभी कानूनी पहलुओं और प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की गई। कैबिनेट की मंजूरी के बाद गृह और विधायी कार्य विभाग ने इसे विधानसभा में पेश करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। सोमवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू होगी, विधायी कार्य सूची के तहत इस बिल को पटल पर रखा जाएगा। चूंकि मध्य प्रदेश विधानसभा में सत्तापक्ष के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए माना जा रहा है कि संक्षिप्त चर्चा या प्रवर समिति को भेजे जाने की स्थिति के बाद इसे आसानी से पारित करा लिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य चालू सत्र में ही इसे कानून बनाकर राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजना है।

इस बड़े फैसले पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक लामबंदी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट के निर्णय के बाद कहा, "हमारी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और संविधान की मूल भावना के अनुरूप 'एक देश, एक कानून' की दिशा में कदम बढ़ा रही है। यूसीसी किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह सभी नागरिकों, विशेषकर महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा और समानता का अधिकार देने वाला कानून है।"

इसके विपरीत, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और अन्य सामाजिक संगठनों ने इस फैसले के समय और नीयत पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि सरकार बुनियादी मुद्दों जैसे बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए राजनीतिक ध्रुवीकरण का सहारा ले रही है। विपक्षी गुट के एक वरिष्ठ विधायक ने कहा, "हम कल सदन में इस विधेयक का पुरजोर विरोध करेंगे और मांग करेंगे कि समाज के सभी वर्गों और जनजातीय समुदायों से व्यापक चर्चा के बिना इसे जल्दबाजी में पास न किया जाए।"

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लागू करने के इस ऐतिहासिक निर्णय का राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य पर बहुत गहरा और दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। सबसे बड़ा सामाजिक प्रभाव विवाह, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों के कानूनी मानकीकरण पर पड़ेगा। उत्तराखंड की तर्ज पर यदि मध्य प्रदेश में भी जनजातीय (Tribal) आबादी को इस कानून से बाहर नहीं रखा गया, तो राज्य की विशाल आदिवासी आबादी के भीतर उनकी पारंपरिक प्रथाओं को लेकर नई बहस छिड़ सकती है। राजनीतिक मोर्चे पर, यह कदम आगामी चुनावों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के वैचारिक एजेंडे को और मजबूत करेगा, जिससे विपक्षी दलों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ेगा। इसके साथ ही, अन्य राज्यों पर भी अपने यहाँ यूसीसी को लेकर तेजी से कदम बढ़ाने का विधायी दबाव बनेगा।

अब सबकी निगाहें कल सोमवार को होने वाली मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं। सरकार की रणनीति बिल को पेश करने के साथ ही उस पर त्वरित बहस कराकर इसी सप्ताह पारित कराने की है। विपक्ष ने भी इस विधायी कदम का मुकाबला करने के लिए सदन के भीतर विरोध प्रदर्शन और वॉकआउट की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। कानूनी जानकारों का मानना है कि विधानसभा से पारित होने और महामहिम राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद भी इस कानून को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। अगले कुछ दिनों तक भोपाल का राजनीतिक गलियारा देश के सबसे बड़े विधायी घटनाक्रम का केंद्र बिंदु बना रहने वाला है।

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