Abu El-Sayed First Muslim US Senator - अमेरिका में पहले मुस्लिम सीनेटर के चुने जाने पर भारत में बहस, प्रियंका चतुर्वेदी ने मिसालों से दिया करारा जवाब
अमेरिका में पहले मुस्लिम सीनेटर अबू अल-सैयद की जीत पर भारत में तुलना करने वालों को शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने करारा जवाब देते हुए भारतीय मिसालें गिनाईं।

- Priyanka Chaturvedi On US Midterms - 'अमेरिका अब पहुंचा, भारत दशकों पहले कर चुका', मुस्लिम सीनेटर के चुनाव पर तुलना करने वालों को दिखाया आईना
- US Senate Abu El-Sayed Row - भारत में मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाने वालों पर भड़कीं प्रियंका चतुर्वेदी, गिनाए राष्ट्रपतियों से लेकर CJI तक के नाम
- Political Debate On Minority Representation - अमेरिका में पहली बार मुस्लिम सीनेटर: पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं- भारत का इतिहास समृद्ध
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026 के नतीजों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अबू अल-सैयद (Abu El-Sayed) ने इतिहास रचते हुए अमेरिकी सीनेट में पहले मुस्लिम सांसद के रूप में प्रवेश किया है। अमेरिका के 250 साल के संसदीय इतिहास में पहली बार किसी मुस्लिम नेता के उच्च सदन (सीनेट) में पहुंचने को वैश्विक स्तर पर एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
हालांकि, इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के बाद भारत के राजनीतिक और बौद्धिक हलकों में तुलनात्मक बहस शुरू हो गई। सोशल मीडिया पर कुछ विचारकों और आलोचकों ने यह सवाल उठाना शुरू कर दिया कि क्या भारत में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए इस तरह का शीर्ष प्रतिनिधित्व देखने को मिलता है।
- प्रियंका चतुर्वेदी का दो टूक जवाब: 'भारत दशकों पहले यह देख चुका'
भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और समावेशी इतिहास पर सवाल उठाने वालों को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आईना दिखाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक बेहद तथ्यपरक और तीखी पोस्ट साझा करते हुए बिना किसी का नाम लिए ऐसे तत्वों को करारा जवाब दिया।
प्रियंका चतुर्वेदी ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका जिस मुकाम पर आज 2026 में आकर पहुंचा है, भारत आजादी के बाद से ही उस समावेशी और धर्मनिरपेक्ष चरित्र को स्वाभाविक रूप से जीता आया है। उन्होंने जोर दिया कि भारत को समावेशिता का पाठ अमेरिका या पश्चिमी देशों से सीखने की कोई आवश्यकता नहीं है।
राष्ट्रपतियों, सीजेआई और शीर्ष पदों की गिनाई लंबी फेहरिस्त
प्रियंका चतुर्वेदी ने भारत के संवैधानिक इतिहास से कई शानदार उदाहरण सामने रखे:
देश के सर्वोच्च पद पर तीन मुस्लिम राष्ट्रपति: भारत में डॉ. जाकिर हुसैन, फखरुद्दीन अली अहमद और 'मिसाइल मैन' कहे जाने वाले भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम देश के प्रथम नागरिक और राष्ट्रपति पद की गरिमा बढ़ा चुके हैं।
उपराष्ट्रपति और न्यायपालिका: मोहम्मद हिदायतुल्ला और हामिद अंसारी जैसे दिग्गज देश के उपराष्ट्रपति रहे। इसके अलावा जस्टिस मोहम्मद हिदायतुल्ला, जस्टिस एम. हमीदुल्लाह बेग, जस्टिस ए.एम. अहमदी और जस्टिस अल्तमस कबीर देश के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) रह चुके हैं।
सशस्त्र बल और खुफिया एजेंसियां: भारतीय वायुसेना प्रमुख (एयर चीफ मार्शल) के रूप में आईएच लतीफ और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के शीर्ष पदों पर मुस्लिम अधिकारियों ने देश की सुरक्षा की कमान संभाली।
कैबिनेट और संसद: मौलाना अबुल कलाम आजाद से लेकर कई कद्दावर नेता देश के गृह, विदेश और शिक्षा मंत्रालयों के साथ-साथ लोकसभा और राज्यसभा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की जड़ें इतनी गहरी और सर्वसमावेशी हैं कि योग्यता और राष्ट्र सेवा के दम पर किसी भी धर्म या पृष्ठभूमि का व्यक्ति देश के शीर्षतम पद तक पहुंचता रहा है, इसलिए अमेरिकी चुनावों का हवाला देकर भारत को कमतर आंकने की मानसिकता पूरी तरह से गलत और खोखली है।
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