Digital Arrest Fraud: सीबीआई और पुलिस अधिकारी बनकर रेलवे के पूर्व कर्मी से ठगे ₹30 लाख, अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश

दिल्ली पुलिस ने रिटायर्ड रेलवे कर्मी से डिजिटल अरेस्ट कर 30 लाख रुपये ठगने वाले मुख्य आरोपी को हरियाणा से गिरफ्तार किया। जांच में अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा।

Aug 23, 2026 - 15:14
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Digital Arrest Fraud: सीबीआई और पुलिस अधिकारी बनकर रेलवे के पूर्व कर्मी से ठगे ₹30 लाख, अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश
Digital Arrest Fraud
  • दिल्ली में रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी से 'डिजिटल अरेस्ट' कर 30 लाख की ठगी, मुख्य आरोपी हरियाणा से गिरफ्तार
  • डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर बुजुर्ग से ऐंठ लिए 30 लाख रुपये, दिल्ली पुलिस ने हरियाणा से दबोचा मुख्य आरोपी
  • दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई: रिटायर्ड रेलवे कर्मी से 30 लाख रुपये ठगने वाला साइबर ठग हरियाणा से गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर तीस लाख रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के मुख्य आरोपी को हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया है। शातिर साइबर अपराधियों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताकर बुजुर्ग को कई घंटों तक वीडियो कॉल पर बंधक जैसी स्थिति में रखा था। मामले की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस टीम ने तकनीकी निगरानी और बैंक खातों के वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण के आधार पर छापेमारी कर आरोपी को धर दबोचा। पुलिस अब इस संगठित गिरोह के अन्य सहयोगियों और पैसे के लेन-देन में प्रयुक्त म्यूल बैंक खातों के नेटवर्क की गहन छानबीन कर रही है।

राजधानी दिल्ली में वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाकर की जा रही साइबर ठगी के तहत एक पूर्व रेलवे कर्मचारी से डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर तीस लाख रुपये की भारी भरकम रकम ऐंठ ली गई। पीड़ित को व्हाट्सएप और स्काइप जैसे वीडियो कॉलिंग माध्यमों से संपर्क कर बताया गया कि उनके आधार और बैंक विवरणों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे गैरकानूनी कृत्यों में हुआ है।

आरोपियों ने स्वयं को कानून प्रवर्तन एजेंसियों और जांच अधिकारियों के रूप में प्रस्तुत करते हुए जाली गिरफ्तारी वारंट और आधिकारिक दस्तावेजों का प्रदर्शन किया। इसके बाद गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर पीड़ित को लगातार ऑनलाइन निगरानी में रखा गया और सत्यापन के नाम पर उनके बैंक खाते से तीस लाख रुपये विभिन्न संदिग्ध खातों में स्थानांतरित करवा लिए गए।

पीड़ित बुजुर्ग के अनुसार उनके पास अज्ञात नंबर से फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को जांच एजेंसी का प्रतिनिधि बताया। कॉलर ने दावा किया कि मुंबई या अन्य किसी महानगर में दर्ज आपराधिक मामले में उनके पहचान पत्रों का संदिग्ध इस्तेमाल हुआ है। इसके तुरंत बाद उन्हें एक कमरे में अकेले रहकर वीडियो कॉल पर उपस्थित रहने का आदेश दिया गया, जिसे साइबर फ्रॉड की दुनिया में 'डिजिटल अरेस्ट' कहा जाता है।

वीडियो कॉल के दौरान स्क्रीन पर पुलिस स्टेशन जैसा माहौल और फर्जी सील लगे दस्तावेज दिखाकर पीड़ित पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया गया। ठगों ने कहा कि यदि वे तुरंत सहयोग नहीं करेंगे और अपनी वित्तीय संपत्तियों की जांच नहीं कराएंगे, तो स्थानीय पुलिस टीम उनके घर पहुंचकर उन्हें तत्काल जेल भेज देगी। दहशत में आकर बुजुर्ग ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी से तीस लाख रुपये साइबर ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए। धनराशि ट्रांसफर होने के बाद जब ठगों ने संपर्क तोड़ दिया, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने तुरंत साइबर हेल्प लाइन और स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई।

दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारियों ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने त्वरित तकनीकी विश्लेषण शुरू किया। जिन बैंक खातों में पैसे भेजे गए थे, उनकी कड़ी को जोड़ते हुए लोकेशन ट्रेस की गई, जिसके बाद हरियाणा में एक ठिकाने पर छापेमारी कर मुख्य आरोपी को हिरासत में लिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी से कई मोबाइल फोन, फर्जी सिम कार्ड और संदिग्ध बैंक पासबुक बरामद हुए हैं।

वहीं विधि विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि भारतीय कानूनी व्यवस्था में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई विधिक प्रावधान मौजूद नहीं है। कोई भी पुलिस बल, सीबीआई या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को न तो गिरफ्तार कर सकती है और न ही जांच के नाम पर किसी निजी बैंक खाते में पैसे जमा करने का निर्देश देती है।

डिजिटल अरेस्ट के जरिए बुजुर्गों और सेवानिवृत्त कर्मियों को निशाना बनाए जाने की यह घटना साइबर सुरक्षा की दृष्टि से बेहद गंभीर चुनौती को दर्शाती है। इस घटना से यह बात फिर स्पष्ट हुई है कि साइबर गिरोह संगठित तरीके से मनोवैज्ञानिक डर पैदा कर लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं।

इस खुलासे के बाद दिल्ली पुलिस और वित्तीय संस्थानों ने बुजुर्गों के खातों से होने वाले असामान्य और बड़े लेन-देन पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके साथ ही विभिन्न सोशल मीडिया और संचार माध्यमों के जरिए जनसामान्य को जागरूक करने के अभियानों को और अधिक व्यापक बनाया जा रहा है ताकि लोग ऐसे फर्जी कॉल्स के झांसे में आने से बच सकें।

गिरफ्तार आरोपी को संबंधित न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी गई रकम किन-किन खातों से होकर निकाली गई या अन्य हवाला माध्यमों में भेजी गई। पुलिस द्वारा ठगी गई धनराशि को फ्रीज कराने की प्रक्रिया भी जारी है ताकि पीड़ित को उनकी रकम वापस दिलाई जा सके।

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर सरकारी अधिकारी बनकर डराने-धमकाने वालों की बातों में न आएं। किसी भी प्रकार की संदिग्ध वीडियो कॉल आने पर तुरंत कॉल काट दें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल अथवा आपातकालीन हेल्पलाइन 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

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