कोटा में घर में घुसा 8 फीट का विशाल मगरमच्छ: हयात खान ने कंधों पर उठाकर चंबल नदी में सुरक्षित छोड़ा, ग्रामीणों में डर का साया।
राजस्थान के कोटा जिले के इटावा उपखंड स्थित बंजारी गांव में शुक्रवार रात एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। एक ग्रामीण के घर में अचानक 8 फीट लंबा और करीब 80
राजस्थान के कोटा जिले के इटावा उपखंड स्थित बंजारी गांव में शुक्रवार रात एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। एक ग्रामीण के घर में अचानक 8 फीट लंबा और करीब 80 किलोग्राम वजनी मगरमच्छ घुस आया। परिवार के सदस्यों को जैसे ही इसका पता चला, वे चीखते-चिल्लाते बाहर भाग निकले। गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग और पुलिस को सूचना दी, लेकिन कई घंटे बीत जाने के बावजूद कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची। आखिरकार, स्थानीय वन्यजीव प्रेमी हयात खान टाइगर और उनकी टीम को बुलाया गया। हयात ने अपनी टीम के साथ मिलकर करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद मगरमच्छ को पकड़ लिया। सबसे रोमांचक दृश्य तब आया जब हयात ने मगरमच्छ को कंधों पर उठा लिया। यह नजारा किसी फिल्मी सीन जैसा था। बाद में मगरमच्छ को चंबल नदी के गेटा क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। लोग हयात की बहादुरी की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों ने प्रशासन से तालाबों में मगरमच्छों की समस्या का स्थायी समाधान मांगा है।
घटना शुक्रवार रात करीब 10 बजे की है। बंजारी गांव चंबल नदी के किनारे बसा एक छोटा सा ग्रामीण इलाका है। यहां के कई घर तालाबों और नदी के पास बने हैं। मगरमच्छ अक्सर सूखे या बाढ़ के समय इन इलाकों में घुस आते हैं। मकान मालिक लटूरलाल ने बताया कि वे परिवार के साथ कमरे में बैठे हंसी-मजाक कर रहे थे। तभी बाहर से कुत्तों के भौंकने की आवाज आई। बाहर झांकते ही उन्होंने देखा कि एक विशालकाय मगरमच्छ गेट तोड़कर अंदर घुस रहा है। वह तेजी से पीछे के कमरे में चला गया। लटूरलाल ने कहा, हम सब घबरा गए। महिलाएं और बच्चे चीखने लगे। हम बाहर भागे और दरवाजा बंद कर दिया। लेकिन डर इस बात का था कि मगरमच्छ कहीं फिर न घूमे। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के सामने का तालाब मगरमच्छों का अड्डा बन गया है। बारिश के मौसम में वे आसानी से घरों तक पहुंच जाते हैं।
सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने वन विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल की। लेकिन रात के समय कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। पुलिस को भी फोन किया गया, लेकिन वे भी तुरंत नहीं पहुंच सके। ऐसे में स्थानीय लोगों ने हयात खान को याद किया। हयात खान, जिन्हें प्यार से टाइगर कहा जाता है, कोटा क्षेत्र के प्रसिद्ध वन्यजीव रेस्क्यू वॉलंटियर हैं। वे पिछले कई सालों से सांप, मगरमच्छ और अन्य जंगली जानवरों को बचाने का काम कर रहे हैं। उनकी टीम में स्थानीय युवक शामिल हैं, जो रस्सियां, टेप और लकड़ियों का इस्तेमाल करते हैं। हयात ने बताया कि जब वे मौके पर पहुंचे, तो मगरमच्छ कमरे में छिपा हुआ था। हमने पहले उसके मुंह पर मजबूत टेप लगाया, ताकि वह काट न सके। फिर पैरों को रस्सियों से बांधा। मगरमच्छ जवान था, इसलिए संघर्ष कर रहा था। लेकिन हमारी ट्रेनिंग से हमने उसे काबू कर लिया। हयात ने खुद मगरमच्छ को कंधों पर लादा और वाहन तक ले गए। वीडियो में यह सीन साफ दिख रहा है। हयात के कंधों पर मगरमच्छ लटका हुआ है, जैसे कोई योद्धा शिकार उठा रहा हो। आसपास ग्रामीण तालियां बजा रहे थे।
रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शनिवार सुबह मगरमच्छ को चंबल नदी के गेटा इलाके में छोड़ दिया गया। चंबल नदी घड़ियालों और मगरमच्छों का प्राकृतिक आवास है। यहां पर्याप्त पानी और शिकार मिलता है। हयात ने कहा कि मगरमच्छ को नुकसान नहीं पहुंचाया गया। हमारा मकसद जानवरों को सुरक्षित रखना है। यह घटना पिछले एक साल में बंजारी गांव की तीसरी ऐसी घटना है। इससे पहले दो मगरमच्छ रेस्क्यू हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तालाबों में मगरमच्छों की संख्या बढ़ रही है। बाढ़ या कम पानी के समय वे खेतों और घरों की ओर बढ़ जाते हैं। एक ग्रामीण ने बताया, बच्चे बाहर खेलते हैं। कभी-कभी तो रात में डर लगता है। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि तालाब साफ करवाएं या मगरमच्छों को कहीं और शिफ्ट करें। सुरक्षा के लिए दीवारें या जागरूकता कैंप लगवाएं।
कोटा जिला चंबल नदी के किनारे होने से वन्यजीवों की घटनाएं आम हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो सालों में जिले में 20 से ज्यादा मगरमच्छ रेस्क्यू हुए हैं। ज्यादातर मुग्गर प्रजाति के होते हैं, जो खतरनाक लेकिन शिकारी नहीं। फिर भी, मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन और बाढ़ से जानवर अपना क्षेत्र छोड़ देते हैं। हयात जैसे वॉलंटियर्स की भूमिका महत्वपूर्ण है। लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा वाजिब है। वन विभाग ने कहा कि वे मामले की जांच करेंगे और भविष्य में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। स्थानीय एसडीएम ने मीटिंग बुलाई है, जहां तालाबों की सफाई पर चर्चा होगी।
सोशल मीडिया पर वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं। एक यूजर ने लिखा, हयात सर सलाम। बाहुबली से कम नहीं। दूसरा बोला, प्रशासन सो रहा है। वॉलंटियर्स ही असली हीरो हैं। कई लोग ने चंबल के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा की अपील की। हयात कोटा के रामगंज मंडी क्षेत्र के रहने वाले हैं। वे एक सामान्य किसान हैं, लेकिन जंगली जानवरों से प्यार करते हैं। उनकी टीम ने 100 से ज्यादा रेस्क्यू किए हैं। वे कहते हैं, जानवर भी भगवान की रचना हैं। उन्हें मारना गुनाह है। हम उन्हें घर भेजते हैं। इस घटना ने एक बार फिर जागरूकता पैदा की है। ग्रामीण अब सतर्क हैं। रात में दरवाजे बंद रखते हैं। बच्चे तालाब के पास नहीं जाते।
यह घटना राजस्थान के अन्य इलाकों में भी हो रही है। बूंदी और सवाई माधोपुर में भी मगरमच्छों की शिकायतें हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मगरमच्छ संरक्षित हैं। इन्हें नुकसान पहुंचाना अपराध है। लेकिन मानव सुरक्षा भी जरूरी। सरकार को संतुलन बनाना होगा। तालाबों में फेंसिंग, जागरूकता बोर्ड और रेस्क्यू टीम की स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए। हयात जैसे लोगों को सम्मानित करना चाहिए। वे बिना सरकारी मदद के जान जोखिम में डालते हैं। बंजारी गांव अब शांत है। लेकिन ग्रामीण सतर्क हैं। वे उम्मीद करते हैं कि प्रशासन उनकी मांग मानेगा। वरना अगली बार हादसा बड़ा हो सकता है। यह घटना हमें सिखाती है कि प्रकृति और मानव का संतुलन जरूरी है। जानवरों को जगह दो, तो वे भी इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।
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