'नमस्ते डीएम अंकल, स्कूल जाते वक्त कपड़े भीग जाते हैं': नदी में खड़े होकर बच्चों ने लगाई पक्के पुल की गुहार, वीडियो वायरल होते ही एक्शन में प्रशासन
घूघा नदी में खड़े होकर स्कूली बच्चों ने डीएम से पक्का पुल बनवाने की गुहार लगाई। वीडियो वायरल होने के बाद डीएम के निर्देश पर नायब तहसीलदार ने मौके पर जांच की।

- Ghooga River Bridge Demand: 'नमस्ते डीएम अंकल, पुल बनवा दीजिए', घूघा नदी में खड़े होकर बच्चों ने लगाई गुहार; प्रशासन में मचा हड़कंप
- School Children River Video: नदी के पानी में खड़े होकर स्कूली बच्चों ने मांगी पक्के पुल की सौगात, डीएम के आदेश पर जांच को पहुंचे नायब तहसीलदार
- Ghooga River: घूघा नदी में खड़े होकर स्कूली बच्चों ने पक्के पुल के लिए लगाई डीएम से गुहार, नायब तहसीलदार ने मौके पर पहुंच की जांच
रुस्तमनगर निकट रायपुर क्षेत्र में घूघा नदी के पानी में खड़े होकर स्कूली बच्चों द्वारा पक्का पुल बनवाने की भावुक अपील का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होते ही प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई। हर साल बरसात के मौसम में ग्रामीणों द्वारा बनाया गया लकड़ी का अस्थायी पुल बह जाने के कारण बच्चों को स्कूल जाने के लिए नदी के गहरे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनके कपड़े और किताबें भीग जाती हैं। इस समस्या को उजागर करने वाला वीडियो संज्ञान में आते ही जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने त्वरित संज्ञान लिया और नायब तहसीलदार सतीश मिश्रा को मौके पर भेजकर स्थलीय जांच कराई। प्रशासन के सक्रिय होते ही कई गांवों के ग्रामीणों और बच्चों में स्थायी पुल बनने की नई उम्मीद जगी है।
रुस्तमनगर निकट रायपुर गांव और आसपास के दर्जनों गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ने वाली घूघा नदी पर पक्के पुल की मांग को लेकर स्कूली बच्चों ने अनोखा विरोध दर्ज कराया। हर दिन स्कूल जाने के लिए जान जोखिम में डालने को मजबूर मासूम छात्रों ने नदी के बहाव के बीच खड़े होकर एक वीडियो संदेश रिकॉर्ड किया।
इस वीडियो में बच्चे यह कहते हुए दिखाई दिए कि हर दिन स्कूल जाते समय नदी पार करने से उनके कपड़े और बस्ते खराब हो जाते हैं। बच्चों ने जिलाधिकारी को सीधे संबोधित करते हुए क्षेत्र में एक पक्का पुल बनवाने की मांग की। यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया के माध्यम से जिला प्रशासन तक पहुंचा, अधिकारियों ने बिना देरी किए जमीनी स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी।
घूघा नदी पर आवागमन सुचारू रखने के लिए ग्रामीण प्रतिवर्ष आपसी सहयोग और लकड़ी की मदद से एक अस्थायी पुल तैयार करते हैं। यह अस्थायी पुल रुस्तमनगर रायपुर से हकीमगंज, पुसवाड़ा, गद्दीनगली, रायपुर चुन्नावाला, भगवंतनगर समेत कई सीमावर्ती गांवों और उत्तराखंड क्षेत्र तक के सफर को आसान बनाता है।
मानसून के दिनों में जैसे ही नदी में उफान आता है और पानी का बहाव तेज होता है, यह लकड़ी का पुल पानी में बह जाता है। इसके बाद ग्रामीणों और बच्चों के सामने दो ही रास्ते बचते हैं या तो वे नदी के तेज पानी में उतरकर पार करें या फिर कई किलोमीटर का अतिरिक्त लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचे। शुक्रवार को जब बच्चों का यह वीडियो एक राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी तक पहुंचाया गया, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए नायब तहसीलदार सतीश मिश्रा को स्थलीय निरीक्षण के लिए रवाना किया।
नायब तहसीलदार सतीश मिश्रा ने मौके पर पहुंचकर नदी की भौगोलिक स्थिति, पानी के स्तर और वैकल्पिक मार्गों का जायजा लिया। इस दौरान स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने उन्हें एक लिखित ज्ञापन सौंपकर स्थायी समाधान की गुहार लगाई। बच्चों ने अधिकारियों को बताया कि पुल के न होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है और बरसात के दिनों में स्कूल पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं होता।
अधिकारियों ने बच्चों और ग्रामीणों की पूरी बात सुनने के बाद आश्वस्त किया कि मौके की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, ताकि शासन स्तर से सेतु निर्माण के लिए आवश्यक प्रस्ताव और बजट की स्वीकृति प्राप्त की जा सके। वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन की त्वरित पहल पर संतोष जताते हुए जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराने की अपील की है।
मासूम बच्चों के इस वीडियो और प्रशासनिक तत्परता ने ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे की कमी को एक बार फिर मुख्यधारा के विमर्श में ला दिया है। घूघा नदी पर पक्का पुल न होने का सीधा असर केवल स्कूली बच्चों की शिक्षा पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय किसानों की उपज ढुलाई और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ता है।
प्रशासनिक जांच शुरू होने से प्रभावित गांवों के हजारों निवासियों में इस बात का भरोसा बढ़ा है कि वर्षों पुरानी इस बुनियादी समस्या का अब स्थायी निराकरण हो सकेगा। इसके साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से जनसमस्याओं के समाधान की प्रशासनिक जवाबदेही भी रेखांकित हुई है।
नायब तहसीलदार द्वारा तैयार की जा रही स्थलीय जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) या सेतु निगम के तकनीकी अधिकारियों से घूघा नदी पर पुल निर्माण की तकनीकी व्यवहार्यता और लागत का आकलन कराया जाएगा। ग्रामीण उम्मीद जता रहे हैं कि शासन स्तर से जल्द स्वीकृति मिलने के बाद आने वाले समय में बच्चों को नदी के पानी से होकर स्कूल जाने के जोखिम से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकेगी।
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