आगरा में ग्रीन गैस मीटर अपडेट के नाम पर ₹10 लाख की साइबर ठगी, ₹13 के बकाये का झांसा देकर खाली किए बैंक खाते
आगरा में साइबर जालसाजों ने ग्रीन गैस मीटर अपडेट करने और महज ₹13 का बकाया बिल भरने का झांसा देकर एक उपभोक्ता के बैंक खातों से ₹10 लाख उड़ा लिए। साइबर क्राइम थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है।

- ₹13 के बिल का झांसा और खाते से उड़े ₹10 लाख: आगरा में एपीके फाइल डाउनलोड कराकर साइबर अपराधियों ने लगाया चूना
- गैस कनेक्शन काटने की फर्जी चेतावनी देकर आगरा में रिटायर्ड कर्मी से बड़ी ठगी, जानिए साइबर जालसाजों का नया पैंतरा
- यूटिलिटी बिल फ्रॉड का नया मामला: ग्रीन गैस मीटर अपडेट कराने के बहाने ₹10 लाख का फ्रॉड, साइबर पुलिस जांच में जुटी
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में साइबर जालसाजों ने पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का मीटर अपडेट कराने और बेहद मामूली बकाया बिल का भुगतान करने का झांसा देकर एक व्यक्ति के बैंक खातों में सेंध लगा दी। जालसाजों ने पीड़ित को ग्रीन गैस का कनेक्शन कटने का डर दिखाकर मोबाइल पर एक संदिग्ध एप्लीकेशन (APK File) इंस्टॉल कराई और कुछ ही समय में खातों से लगभग ₹10 लाख निकाल लिए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है।
- कैसे रची गई ठगी की पटकथा?
प्राप्त विवरण के अनुसार, पीड़ित के मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से संदेश आया, जिसमें कहा गया कि उनके ग्रीन गैस कनेक्शन का मीटर अपडेट होना शेष है और महज ₹13 का मामूली बिल बकाया है। संदेश में चेतावनी दी गई थी कि यदि निर्धारित समय के भीतर इसका समाधान नहीं किया गया, तो गैस आपूर्ति बाधित कर दी जाएगी।
दैनिक घरेलू जरूरतों से जुड़ा मामला होने के कारण पीड़ित ने संदेश में दिए गए संपर्क सूत्र पर बात की। कॉल रिसीव करने वाले व्यक्ति ने खुद को गैस आपूर्ति कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि बताया और कहा कि मीटर को ऑनलाइन प्रणाली से सिंक्रनाइज़ करने के लिए एक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
- रिमोट एक्सेस और एपीके फाइल से खाली किए खाते
आरोपी ने औपचारिकता पूरी कराने के नाम पर पीड़ित के फोन पर एक लिंक साझा किया और ऐप डाउनलोड करने को कहा। जैसे ही पीड़ित ने फाइल इंस्टॉल कर ₹13 के भुगतान की प्रक्रिया शुरू की, उनके फोन का पूरा रिमोट एक्सेस साइबर जालसाजों के पास चला गया।
स्क्रीन शेयरिंग और की-लॉगर तकनीक के जरिए जालसाजों ने नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स और वन-टाइम पासवर्ड (OTP) को इंटरसेप्ट कर लिया। इसके बाद पीड़ित के खाते से कई चरणों में कुल ₹10 लाख की रकम अज्ञात बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई। बैंक से बड़ी निकासी के संदेश मिलने पर पीड़ित को धोखाधड़ी का अहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क साधा।
- मनी ट्रेल की पड़ताल
साइबर क्राइम थाना पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, मामले में संबंधित बैंक नोडल अधिकारियों से संपर्क कर उस खाते को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसमें ठगी की रकम भेजी गई थी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि यह गिरोह किन-किन राज्यों में सक्रिय है और यूटिलिटी बिलों के नाम पर उपभोक्ताओं का डाटा कहां से हासिल कर रहा है।
- यूटिलिटी बिल और मीटर अपडेट फ्रॉड से ऐसे रहें सुरक्षित
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने आम नागरिकों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें: किसी भी अनजान नंबर से आए एसएमएस या व्हाट्सएप संदेश में दिए गए लिंक से कभी भी कोई फाइल या ऐप डाउनलोड न करें।
आधिकारिक माध्यमों का ही उपयोग करें: गैस, बिजली या पानी के बिल का भुगतान हमेशा अधिकृत मोबाइल एप्लीकेशन (जैसे संबंधित कंपनी का आधिकारिक ऐप, भारत बिल पे या प्रमाणित यूपीआई ऐप) के जरिए ही करें।
रिमोट एक्सेस ऐप से बचें: किसी भी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर अपने फोन में स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट कंट्रोल एप्लीकेशन (जैसे AnyDesk, TeamViewer आदि) कभी इंस्टॉल न करें।
तत्काल हेल्पलाइन पर दर्ज कराएं शिकायत: वित्तीय धोखाधड़ी होने पर बिना समय गंवाए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, जिससे समय रहते ट्रांजैक्शन को रोका जा सके।
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