Bilibili Creator Monetization: हर 1000 व्यूज पर 60 रुपये तक की कमाई, क्या YouTube को टक्कर देगा बिलीबिली

Bilibili Monetization Model: चीनी वीडियो प्लेटफॉर्म बिलीबिली पर प्रति 1000 व्यूज ₹60 तक की कमाई का दावा। जानिए क्रिएटर्स के लिए यह मॉडल कितना प्रभावी है।

Aug 27, 2026 - 11:54
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Bilibili Creator Monetization: हर 1000 व्यूज पर 60 रुपये तक की कमाई, क्या YouTube को टक्कर देगा बिलीबिली
  • Bilibili vs YouTube: चीनी वीडियो प्लेटफॉर्म बिलीबिली का नया अर्निंग मॉडल, क्रिएटर्स के बीच बढ़ी दिलचस्पी
  • यूट्यूब को मिलेगी चुनौती? बिलीबिली पर हर 1000 व्यूज पर मिल रहे ₹60, जानिए कैसे काम करता है यह मॉडल
  • चीनी वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म Bilibili की नई क्रिएटर योजना, 1,000 व्यूज पर ₹60 के भुगतान से मची हलचल

वैश्विक क्रिएटर इकोनॉमी में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच चीनी वीडियो शेयरिंग और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म बिलीबिली (Bilibili) अपने नए और आकर्षक मोनेटाइजेशन मॉडल को लेकर डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है। विभिन्न ऑनलाइन रिपोर्ट्स और क्रिएटर चर्चाओं के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर प्रति 1,000 व्यूज पर लगभग ₹60 (लगभग 5 युआन या $0.70 के आसपास) तक के भुगतान का इंसेंटिव मॉडल पेश किया जा रहा है। इस आकर्षक पे-आउट स्ट्रक्चर ने लंबे समय से यूट्यूब (YouTube) पर निर्भर कंटेंट क्रिएटर्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है। एशिया-प्रशांत और वैश्विक बाजारों में अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश में जुटा यह प्लेटफॉर्म अब वीडियो स्ट्रीमिंग के स्थापित दिग्गजों को सीधी चुनौती देने की तैयारी में दिख रहा है।

लंबे समय से एनीमे, कॉमिक्स और गेमिंग (ACG) समुदाय के बीच लोकप्रिय रहा चीनी प्लेटफॉर्म बिलीबिली अब मुख्यधारा के वीडियो स्ट्रीमिंग बाजार में अपना विस्तार कर रहा है। हालिया दिनों में प्लेटफॉर्म द्वारा क्रिएटर्स को दिए जा रहे रेवेन्यू शेयर और इंसेंटिव प्लान के तहत प्रति 1,000 व्यूज पर औसतन ₹60 तक की कमाई की संभावना ने डिजिटल इंडस्ट्री में नई बहस छेड़ दी है। आमतौर पर विकासशील और गैर-पश्चिमी बाजारों में यूट्यूब जैसे स्थापित प्लेटफॉर्म्स पर शुरुआती क्रिएटर्स का आरपीएम (Revenue Per Mille) काफी कम रहता है। ऐसे में बिलीबिली की ओर से प्रस्तुत यह निश्चित और अपेक्षाकृत ऊंचा पे-आउट मॉडल स्वतंत्र वीडियो निर्माताओं के लिए एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है।

बिलीबिली ने अपनी शुरुआत मुख्य रूप से युवा दर्शकों और विशेष कंटेंट के लिए की थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसने अपने इकोसिस्टम को व्यापक बनाते हुए नॉलेज वीडियो, व्लॉगिंग, लाइफस्टाइल और टेक कंटेंट को भी शामिल किया है। कंपनी ने वैश्विक स्तर पर क्रिएटर्स को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए 'क्रिएटर इंसेंटिव प्रोग्राम' और लाइव वर्चुअल गिफ्टिंग को अपग्रेड किया है।

इस व्यवस्था के तहत, योग्य क्रिएटर्स को उनके वीडियो के ओरिजिनल होने, एंगेजमेंट रेट (लाइक्स, कमेंट्स, शेयर्स) और व्यूज के आधार पर भुगतान किया जा रहा है। जहां यूट्यूब का रेवेन्यू मॉडल मुख्य रूप से विज्ञापनों की नीलामी (Ad Auction) और दर्शकों के भौगोलिक क्षेत्र पर निर्भर करता है, वहीं बिलीबिली अपने प्लेटफॉर्म फंड और मर्चेंडाइजिंग तथा मेंबरशिप रेवेन्यू के जरिए क्रिएटर्स को एक बुनियादी स्थिर आय सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है। इसी कारण कई मध्यम और उभरते हुए क्रिएटर्स अपने कंटेंट को मल्टी-प्लेटफॉर्म पर डिस्ट्रीब्यूट करने की रणनीति अपना रहे हैं।

क्रिएटर इकोनॉमी:

वीडियो स्ट्रीमिंग बाजार में आरपीएम (RPM) का अर्थ प्रति एक हजार व्यूज पर मिलने वाला वास्तविक राजस्व होता है। यह दर्शकों के देश, वीडियो की श्रेणी और विज्ञापनदाताओं की मांग के आधार पर तेजी से बदलता है।

डिजिटल मार्केटिंग विशेषज्ञों और क्रिएटर कम्युनिटी की इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई उभरते कंटेंट क्रिएटर्स का मानना है कि यदि किसी प्लेटफॉर्म पर शुरुआत से ही निश्चित रिटर्न मिले, तो नए चैनलों को टिकाए रखना आसान हो जाता है। विशेष रूप से टेक और एजुकेशनल कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स ने इसे अपनी आय के विविधीकरण (Diversification) के एक अच्छे साधन के रूप में देखा है।

दूसरी ओर, डिजिटल मीडिया विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी नए प्लेटफॉर्म के लिए शुरुआती दौर में ऊंचा इंसेंटिव देना आम बात है, ताकि ज्यादा से ज्यादा क्रिएटर्स को जोड़ा जा सके। विशेषज्ञों का तर्क है कि लंबे समय में क्या कंपनी इस तरह के पे-आउट को बनाए रख पाएगी, यह उसके विज्ञापन आधार और सशुल्क सब्सक्रिप्शन की वृद्धि पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, पश्चिमी और दक्षिण एशियाई बाजारों में भाषा और स्थानीय नियमों के अनुपालन की अपनी सीमाएं हैं, जिन्हें पार करना बिलीबिली के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

इस नए घटनाक्रम का सीधा प्रभाव क्रिएटर इंसेंटिव स्ट्रक्चर पर पड़ता दिखाई दे रहा है। यूट्यूब और मेटा जैसी दिग्गज कंपनियों को भी गैर-प्रीमियम क्षेत्रों में अपने क्रिएटर्स को रोके रखने के लिए रेवेन्यू शेयरिंग और सब्सक्रिप्शन मॉडल्स में सुधार के लिए प्रेरित होना पड़ सकता है। इसके साथ ही, क्रिएटर्स अब किसी एक प्लेटफॉर्म पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं और अपने वीडियो को विभिन्न विदेशी और क्षेत्रीय प्लेटफॉर्म्स पर एक साथ प्रकाशित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बिलीबिली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने उपयोगकर्ता आधार और विज्ञापन तंत्र को किस प्रकार विकसित करता है। डेटा प्राइवेसी, स्थानीय सामग्री नियम और भुगतान गेटवे की सुलभता ऐसे प्रमुख बिंदु होंगे जो तय करेंगे कि यह प्लेटफॉर्म यूट्यूब के एकाधिकार को कितनी वास्तविक चुनौती दे पाता है। फिलहाल क्रिएटर्स इस नए माध्यम को एक अतिरिक्त आय स्रोत के रूप में टटोलने में जुटे हैं।

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