'मेरी रगों में मुख्तार अंसारी का खून है...': जेल से बाहर आते ही गरजे विधायक अब्बास अंसारी, कहा- जल्द वक्त बदलेगा
Abbas Ansari Statement: जेल से रिहाई के बाद मऊ विधायक अब्बास अंसारी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी रगों में मुख्तार अंसारी का लहू है और जल्द ही वक्त बदलेगा।

- Abbas Ansari Statement: 'रगों में मुख्तार का लहू है, जल्द बदलेगा वक्त', जेल से रिहा होने के बाद अब्बास अंसारी के तीखे तेवर
- अब्बास अंसारी का सियासी मंच से बड़ा बयान: बोले- 'अभी बुरा समय है लेकिन रात हमेशा नहीं रहती', यूपी की सियासत में हलचल
- UP Politics: मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी का बड़ा बयान, कहा- 'रगों में पिता का खून है, जुल्म के खिलाफ लड़ेंगे'
उत्तर प्रदेश के मऊ सदर से विधायक और दिवंगत पूर्व बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी ने जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद राजनीतिक मंच से कड़े तेवर दिखाए हैं। लंबे समय तक कानूनी प्रक्रियाओं और कारागार में रहने के उपरांत समर्थकों के बीच पहुंचे अब्बास अंसारी ने भावुक और आक्रामक अंदाज में भाषण दिया। उन्होंने खुले तौर पर कहा कि उनकी रगों में उनके पिता मुख्तार अंसारी का खून दौड़ रहा है और वे किसी भी दबाव या जुल्म के आगे झुकने वाले नहीं हैं। अब्बास अंसारी ने अपने मौजूदा दौर को एक अस्थायी बुरा समय बताते हुए दावा किया कि हमेशा रात नहीं रहती और बहुत जल्द राजनीतिक वक्त बदलेगा। उनके इस बयान के बाद पूर्वांचल से लेकर लखनऊ तक सियासी गलियारों में नई बहस छिड़ गई है।
जेल से रिहाई और अदालती राहत के बाद सार्वजनिक गतिविधियों में शामिल हुए मऊ विधायक अब्बास अंसारी ने अपने समर्थकों और स्थानीय जनता को संबोधित करते हुए बेहद आक्रामक बयान दिया है। अंसारी परिवार के राजनीतिक प्रभाव और अपने पिता मुख्तार अंसारी की विरासत का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने पारिवारिक संघर्ष से पीछे हटने वाले नहीं हैं। जनसभा में बोलते हुए अब्बास अंसारी ने कहा कि उनका शरीर और उनकी रगों में बहने वाला लहू जनता की अमानत है, जिसे जरूरत पड़ने पर वे समाज के लिए समर्पित करने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा विपरीत परिस्थितियों को लोग उनकी कमजोरी न समझें, क्योंकि सत्ता और समय का चक्र हमेशा एक समान नहीं रहता।
अब्बास अंसारी विभिन्न आपराधिक मामलों और कानूनी जांचों के चलते लंबे समय तक जेल में निरुद्ध रहे थे। अदालत से जमानत और राहत मिलने के बाद वे धीरे-धीरे अपने राजनीतिक क्षेत्र और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय होने लगे हैं। हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में जब वे मंच पर पहुंचे, तो उन्होंने अपने विरोधियों और प्रशासनिक तंत्र को निशाने पर लेते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि रात चाहे जितनी भी लंबी हो, सुबह का सूरज जरूर निकलता है।
अपने संबोधन में उन्होंने रूपक का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जब सूरज ढलता है तो अंधेरा छा जाता है, लेकिन नए सवेरे के साथ ही नकारात्मक शक्तियों का अंत होता है। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि उनके पिता के न रहने के बाद भी वे मैदान छोड़कर भागने वाले नहीं हैं और जनता के अधिकारों तथा मान-सम्मान की लड़ाई हर मंच पर पूरी ताकत से लड़ेंगे। इस दौरान उपस्थित समर्थकों ने उनके भाषण पर जमकर नारेबाजी की, जिसका वीडियो अब विभिन्न डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से प्रसारित हो रहा है।
अब्बास अंसारी के इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित है और अब माफिया संस्कृति या बाहुबल के दिन पूरी तरह लद चुके हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि जो लोग कानून से ऊपर खुद को समझते थे, उन्हें अदालत और संविधान के दायरे में रहना ही होगा, और जनता किसी भी तरह के दबाव या धमकियों को स्वीकार नहीं करेगी।
अब्बास अंसारी के इस बदले हुए तेवर का सीधा प्रभाव पूर्वांचल की क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ना तय माना जा रहा है। मऊ, गाजीपुर, बलिया और आसपास के जिलों में अंसारी परिवार का एक बड़ा प्रभाव क्षेत्र रहा है। जेल से बाहर आने के बाद उनके इस प्रकार के भाषणों से जहां उनके समर्थकों में नया उत्साह देखा जा रहा है, वहीं स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भी कानून-व्यवस्था को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। इसके साथ ही आगामी राजनीतिक सम्मेलनों और चुनावों से पहले इस बयान से राजनीतिक ध्रुवीकरण और तीखी बयानबाजी का नया दौर शुरू होने की पूरी संभावना बन गई है।
कानूनी जानकारों के अनुसार अब्बास अंसारी को अदालत द्वारा दी गई जमानत की शर्तों और प्रशासनिक दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है। प्रशासन उनके भाषणों और सार्वजनिक गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रख रहा है ताकि किसी भी तरह के आचार संहिता या कानूनी प्रतिबंधों का उल्लंघन न हो। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अब्बास अंसारी अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए कौन सा दलगत गठबंधन चुनते हैं और क्या वे पूर्वांचल के सियासी समीकरणों में अपने परिवार के पुराने प्रभाव को पुनर्स्थापित कर पाते हैं या नहीं। वहीं समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि को अपने क्षेत्र की जनता के बीच अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार है। विपक्षी दलों का तर्क है कि सरकार राजनीतिक प्रतिशोध के तहत विरोधी नेताओं को निशाना बनाती रही है, ऐसे में न्यायपालिका से राहत मिलने के बाद जनप्रतिनिधि का अपनी भावनाएं व्यक्त करना स्वाभाविक है। वहीं स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब्बास अंसारी इस तरह के भावनात्मक और आक्रामक बयानों के जरिए पूर्वांचल में अंसारी परिवार के पारंपरिक वोट बैंक और समर्थकों के मनोबल को फिर से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
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