Viral Video Indian Train: ट्रेन में मोबाइल चार्जिंग के लिए यात्री ने चाकू से फाड़ी स्लीपर सीट, रंगे हाथों पकड़े जाने पर की बहस
ट्रेन के स्लीपर कोच में फोन चार्ज करने के लिए चाकू से सीट फाड़ने का वीडियो वायरल हुआ है। पकड़े जाने पर युवक सह-यात्रियों से बहस करता नजर आया, जिससे सिविक सेंस पर नई बहस छिड़ गई है।

- रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का वीडियो वायरल, फोन चार्ज करने के चक्कर में काटी बर्थ की रेक्सीन
- 'सिविक सेंस' पर फिर उठे सवाल: ट्रेन कोच में सीट चीरते कैमरे में कैद हुआ युवक, यात्रियों के टोकने पर भी नहीं मानी गलती
- स्लीपर कोच में मोबाइल चार्जिंग का अजीबोगरीब कारनामा, चाकू से फाड़ी सीट; इंटरनेट पर लोगों का फूटा गुस्सा
नई दिल्ली: भारतीय रेल के स्लीपर कोच से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और नागरिक समझ (सिविक सेंस) के अभाव का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में एक युवक अपने मोबाइल फोन को चार्जिंग सॉकेट तक पहुंचाने के लिए सीट को चाकू से फाड़ते हुए कैमरे में कैद हुआ है। हैरानी की बात यह रही कि जब सह-यात्रियों ने उसे रंगे हाथों पकड़ा, तो शर्मिंदगी महसूस करने के बजाय वह पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी हरकत को सही ठहराते हुए बहस करने लगा।
यह घटना चलती ट्रेन के स्लीपर क्लास कोच की बताई जा रही है। वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि चार्जिंग पॉइंट और सीट के बीच दूरी होने या केबल की लंबाई कम पड़ने पर युवक ने साइड की रेक्सीन और फोम को चाकू से काटकर रास्ता बनाने की कोशिश की।
- यात्रियों के टोकने पर भी करता रहा बहस
जब आसपास मौजूद अन्य यात्रियों ने सीट को कटते देखा, तो उन्होंने तुरंत युवक का विरोध किया और उसका वीडियो बनाना शुरू कर दिया। टोकने पर युवक ने कोई पछतावा नहीं दिखाया, बल्कि यात्रियों से उलझने लगा। यात्रियों ने जब उसे रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी, तब उसने स्थिति से बचने का प्रयास किया।
सोशल मीडिया पर यह वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट यूजर्स ने कड़ी नाराजगी जताई है। कई लोगों ने रेलवे बोर्ड और रेल मंत्रालय से ऐसे गैर-जिम्मेदार यात्रियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और जुर्माना लगाने की मांग की है।
रेलवे नियमों के मुताबिक, ट्रेन के अंदर किसी भी तरह की संपत्ति (जैसे सीट, पंखे, शीशे या चार्जिंग सॉकेट) को नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है। रेलवे अधिनियम (Railway Act) की धारा 145 और 146 तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण कानून के तहत दोषी पाए जाने पर जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब रेलवे कोचों में स्वच्छता, सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी को लेकर लगातार जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
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