फतेहपुर मकबरा विवाद- सपा नेता पप्पू सिंह चौहान पार्टी से निष्कासित, पुलिस ने दर्ज की FIR

Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक ऐतिहासिक मकबरे को लेकर हुए बवाल ने सियासी और सामाजिक हलचल मचा दी है। इस घटना में समाजवादी पार्टी...

Aug 13, 2025 - 11:20
 0  15
फतेहपुर मकबरा विवाद- सपा नेता पप्पू सिंह चौहान पार्टी से निष्कासित, पुलिस ने दर्ज की FIR
फतेहपुर मकबरा विवाद- सपा नेता पप्पू सिंह चौहान पार्टी से निष्कासित, पुलिस ने दर्ज की FIR

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक ऐतिहासिक मकबरे को लेकर हुए बवाल ने सियासी और सामाजिक हलचल मचा दी है। इस घटना में समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता पप्पू सिंह चौहान का नाम सामने आने के बाद पार्टी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें निष्कासित कर दिया। पुलिस ने इस मामले में 10 लोगों के खिलाफ नामजद और 150 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। मकबरे में तोड़फोड़ और भगवा झंडा फहराने की घटना ने क्षेत्र में तनाव पैदा कर दिया, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं।

घटना फतेहपुर जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र के अबूनगर में स्थित नवाब अबू समद के ऐतिहासिक मकबरे से जुड़ी है। कुछ हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने दावा किया कि यह मकबरा पहले ठाकुर जी का मंदिर था, जिसे बाद में मकबरा बना दिया गया। इस दावे के आधार पर कुछ लोगों ने मकबरे पर चढ़कर भगवा झंडा फहराया और वहां तोड़फोड़ करने की कोशिश की। इस दौरान धार्मिक नारे लगाए गए और मकबरे के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचाया गया। सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कई लोग भगवा झंडे लिए हुए ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे।

इस घटना ने स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ा दिया, और दोनों समुदायों के बीच पथराव की स्थिति भी बन गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और मकबरे के आसपास के क्षेत्र को सील कर दिया। फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार सिंह ने बताया कि इलाके में कड़ी निगरानी रखी जा रही है और ड्रोन की मदद से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। मकबरे के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत रातोंरात कर दी गई, ताकि तनाव को और बढ़ने से रोका जा सके। पुलिस ने 10 नामजद व्यक्तियों, जिनमें पप्पू सिंह चौहान, बजरंग दल के नेता धर्मेंद्र सिंह, बीजेपी नेता अभिषेक शुक्ला, जिला पंचायत सदस्य अजय सिंह, बीजेपी नेता देवनाथ धाकड़, नगर पालिका सभासद विनय तिवारी, पुष्पराज पटेल, ऋतिक पाल, और प्रसून तिवारी शामिल हैं, के खिलाफ FIR दर्ज की। इसके अलावा, 150 अज्ञात लोगों पर भी मुकदमा दर्ज किया गया है। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 190, 191(2), 191(3), 196, 301, संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, और 7 CLA एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

इस घटना में पप्पू सिंह चौहान का नाम सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी ने सख्त रुख अपनाया। सपा के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र प्रताप सिंह ने पत्र जारी कर पप्पू सिंह चौहान को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि कानून विरोधी गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को पार्टी में जगह नहीं दी जाएगी। सपा ने अपने बयान में कहा कि जो लोग पार्टी की विचारधारा के खिलाफ काम करते हैं या बीजेपी की मानसिकता के साथ मिलकर समाज में अशांति फैलाते हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

इस कार्रवाई को सपा प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश पर किया गया, जिन्होंने इस घटना को पार्टी की छवि के लिए नुकसानदेह माना। पप्पू सिंह चौहान, जो फतेहपुर के हुसैनगंज विधानसभा क्षेत्र के जमरांवा गांव के रहने वाले हैं, ने इस निष्कासन के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया। इस वीडियो में उन्होंने सपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सपा में केवल एक समुदाय विशेष का बोलबाला है और हिंदू समुदाय के लोगों को आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि वह सनातन धर्म के लिए लड़ते रहेंगे और पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है, जिसमें कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ ने इसे सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने की कोशिश बताया।

इस घटना ने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर सियासी हलचल मचा दी है। सपा ने जहां पप्पू सिंह चौहान को निष्कासित कर अपनी सख्ती दिखाई, वहीं विपक्षी दलों ने इस घटना को बीजेपी पर निशाना साधने के लिए इस्तेमाल किया। सपा विधायक अतुल प्रधान ने दावा किया कि यह विवाद बीजेपी और प्रशासन की मिलीभगत से फैलाया गया है। उन्होंने कहा कि जनता अब बीजेपी की सांप्रदायिक राजनीति को समझ चुकी है। दूसरी ओर, बीजेपी के जिला अध्यक्ष मुखलाल पाल और हिंदू महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज त्रिवेदी ने दावा किया कि मकबरा पहले ठाकुर जी का मंदिर था और वहां पूजा करने का उनका अधिकार है। हालांकि, इन दोनों का नाम FIR में शामिल नहीं है। मुस्लिम संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उलेमा काउंसिल और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जिला अध्यक्ष जीशान रजा ने इसे ऐतिहासिक स्मारक पर हमला बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। बरेली के मौलाना शहाबुद्दhbar रजवी ने हिंदू महासभा पर मकबरे को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में सौहार्द बिगाड़ने का काम करती हैं।

प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। मकबरे के एक किलोमीटर के दायरे में सभी सड़कों को बंद कर दिया गया है और ड्रोन निगरानी शुरू की गई है। पड़ोसी जिलों कौशांबी और प्रयागराज से अतिरिक्त पुलिस बल मंगवाया गया है। फतेहपुर के जिलाधिकारी रवींद्र सिंह ने कहा कि कानून-व्यवस्था सामान्य करने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। पुलिस ने पांच विशेष टीमें गठित की हैं, जो आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही हैं। फतेहपुर का यह मकबरा विवाद पिछले 18 सालों से समय-समय पर चर्चा में रहा है। कुछ लोग इसे मंदिर बताते हैं, जबकि ऐतिहासिक दस्तावेज इसे मुगल काल के सूबेदार नवाब अबू समद का मकबरा बताते हैं। इस विवाद को हल करने के लिए प्रशासन और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा। यह घटना समाज में कई गंभीर सवाल खड़े करती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ऐतिहासिक स्थलों को लेकर इस तरह के विवाद समाज में सौहार्द को नुकसान पहुंचा रहे हैं? कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देती हैं और समाज को बांटने का काम करती हैं। साथ ही, यह भी सवाल उठता है कि क्या राजनीतिक दल इस तरह के मुद्दों का फायदा उठाकर अपनी सियासी रोटियां सेंक रहे हैं?

Also Read- इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग जांच- कैश एट होम मामले में कार्रवाई तेज।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow