भोपाल: पुलिसकर्मियों की बर्बर पिटाई से 22 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र की दर्दनाक मौत, DSP के साले उदित गायके की हत्या पर सवालों का सैलाब।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक ऐसी घटना सामने आई है जो पुलिस व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ी कर रही है। यहां पिपलानी थाना क्षेत्र के इंद्रपुरी सी सेक्टर में देर रात दो पुलिस कांस्टेबलों
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक ऐसी घटना सामने आई है जो पुलिस व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ी कर रही है। यहां पिपलानी थाना क्षेत्र के इंद्रपुरी सी सेक्टर में देर रात दो पुलिस कांस्टेबलों द्वारा 22 वर्षीय युवक उदित गायके की बेरहमी से पिटाई के बाद उसकी मौत हो गई। उदित एक होनहार इंजीनियरिंग छात्र थे, जिनकी हाल ही में बेंगलुरु में अच्छी नौकरी लगने वाली थी। वे बालाघाट में तैनात डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) केतन अडलक के साले थे। घटना का एक वीडियो सीसीटीवी में कैद हो गया, जिसमें साफ दिख रहा है कि एक कांस्टेबल उदित को पकड़े हुए है और दूसरा डंडे से उनकी कमर और सिर पर वार कर रहा है। शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण पैंक्रियाज में गंभीर चोट और आंतरिक रक्तस्राव बताया गया। दोनों आरोपी कांस्टेबल संतोष बामनिया और सौरभ आर्या को तुरंत निलंबित कर दिया गया है, लेकिन वे फरार बताए जा रहे हैं। मृतक के परिवार ने मामले की सीबीआई या एसआईटी से निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि न्याय मिल सके।
यह दर्दनाक घटना 9-10 अक्टूबर 2025 की रात करीब 1:30 बजे घटी। उदित गायके वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) के सिहोर कैंपस से साइबर सिक्योरिटी में बीटेक की फाइनल ईयर के छात्र थे। वे भोपाल के अशोका गार्डन इलाके के बैंक कॉलोनी में रहते थे। उनके पिता राजकुमार गायके मध्य प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड में इंजीनियर हैं, जबकि मां एक स्कूल टीचर हैं। उदित परिवार के इकलौते बेटे थे और दो बड़ी बहनों में से एक की शादी DSP केतन अडलक से हुई है। उदित पिछले तीन महीनों से बेंगलुरु में नौकरी की तलाश में रह रहे थे। तीन दिन पहले ही वे भोपाल लौटे थे, ताकि कॉलेज के दस्तावेज ले सकें। अगले ही हफ्ते उनका इंटरव्यू था, जहां 8 लाख सालाना पैकेज की नौकरी मिलने की उम्मीद थी। दोस्तों के अनुसार, उदित एक खुशमिजाज और मेहनती लड़के थे। वे पढ़ाई के साथ-साथ दोस्तों के साथ समय बिताना भी पसंद करते थे।
गुरुवार की शाम उदित अपने दोस्तों अक्षत भार्गव और नितेश के साथ इंद्रपुरी में एक छोटी सी पार्टी मना रहे थे। वे कार में बैठकर म्यूजिक सुन रहे थे और हल्का-फुल्का नाच-गाना कर रहे थे। रात करीब 11 बजे अक्षत ने उदित को घर छोड़ने का फैसला किया। कार एमपी-04-सीटी-4532 नंबर वाली थी। जैसे ही उन्होंने इग्निशन ऑन किया, आसपास के लोग शोर मचाने की शिकायत पर पेट्रोलिंग कर रहे दो कांस्टेबल संतोष बामनिया और सौरभ आर्या वहां पहुंच गए। दोनों पिपलानी थाने के ही थे। दोस्तों का कहना है कि पुलिसवालों ने कार में घुसकर गाली-गलौज शुरू कर दी। उदित डर गए और कार से उतरकर पास की एक गली में भागने लगे। कांस्टेबलों ने उनकी पीछा किया और गली में पकड़ लिया। वहां उन्होंने उदित को जमीन पर गिरा दिया, उनकी टी-शर्ट फाड़ दी और डंडों से पीटा। एक कांस्टेबल ने उदित के हाथ पकड़ रखे थे, जबकि दूसरे ने कमर, सिर और पेट पर कई वार किए। दोस्तों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन पुलिसवालों ने उनसे 10 हजार रुपये की मांग की। कहा कि पैसे दो तो मामला सुलझा देंगे, वरना और मारेंगे। जब दोस्तों ने मना किया, तो पिटाई और तेज हो गई।
सीसीटीवी फुटेज में पूरा मंजर साफ नजर आता है। उदित बिना शर्ट के सड़क पर पड़े हैं, उनका चेहरा दर्द से विकृत है। एक पुलिसकर्मी बंदूक लहराते हुए खड़ा है, जबकि दूसरा डंडा चला रहा है। पिटाई के बाद उदित की हालत बिगड़ गई। वे सांस लेने में तकलीफ महसूस करने लगे, उल्टी होने लगी और बेहोश हो गए। दोस्तों ने उन्हें कार में बिठाया और सबसे पहले पास के एक पुलिस आउटपोस्ट ले गए। वहां कुछ परिचित पुलिसकर्मियों ने उन्हें पहचाना और तुरंत एम्स भोपाल रेफर कर दिया। लेकिन अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। समय करीब 4 बजे था। प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों ने पाया कि उदित के शरीर पर कई चोटें हैं, खासकर पेट और सिर पर। शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पैंक्रियाज में गंभीर क्षति और आंतरिक रक्तस्राव को मौत का मुख्य कारण बताया गया। वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया। लाखों लोगों ने इसे शेयर किया और पुलिस की बर्बरता की निंदा की।
उदित की मौत की खबर मिलते ही परिवार टूट गया। उनकी मां रोते हुए कहती हैं कि बेटा तो कल ही घर आया था, सब कुछ ठीक था। पिता राजकुमार ने बताया कि उदित बहुत उत्साहित थे नौकरी के बारे में। DSP केतन अडलक ने भी गहरा सदमा झेला है। वे बालाघाट से भोपाल पहुंचे और परिवार के साथ एम्स गए। परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने लापरवाही बरती। अगर तुरंत मदद की जाती, तो शायद उदित बच जाते। शुक्रवार शाम को परिजन और दोस्तों ने पिपलानी थाने के बाहर प्रदर्शन किया। वे नारे लगाते रहे, पुलिस प्रशासन होश में आओ। परिवार ने हत्या का केस दर्ज करने की मांग की, जो बाद में कर ली गई। डीसीपी जोन-2 विवेक सिंह ने कहा कि दोनों कांस्टेबलों को निलंबित किया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज हो गया है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगी हैं। वे फरार हैं, लेकिन जल्द पकड़े जाएंगे। जांच में दोस्तों के बयान लिए गए हैं और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण हो रहा है।
यह घटना भोपाल में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि रात्रिकालीन पेट्रोलिंग के नाम पर ऐसी बर्बरता स्वीकार नहीं। उदित जैसे युवा भविष्य के सपने देख रहे होते हैं, उनकी जान लेना अपराध है। सोशल मीडिया पर लोग गुस्से से भरे हैं। एक यूजर ने लिखा कि वर्दी वाले गुंडे बन गए हैं, क्या ये सुरक्षा के लिए हैं? दूसरे ने कहा कि DSP का साला होने से कोई फर्क नहीं पड़ता, आम आदमी के साथ तो और बुरा होता होगा। छात्र संगठनों ने भी विरोध जताया। वे कहते हैं कि कैंपस से निकलते ही ऐसा अन्याय। भोपाल कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर ने परिवार से मुलाकात की और न्याय का भरोसा दिलाया। एक एसीपी स्तर की जांच भी बैठाई गई है। पोस्टमॉर्टम वीडियोग्राफी के साथ हुआ, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन परिवार संतुष्ट नहीं। वे कहते हैं कि आंतरिक जांच से न्याय नहीं मिलेगा, सीबीआई या एसआईटी जरूरी है।
उदित की कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है। आज के युवा पढ़ाई और करियर में व्यस्त हैं, लेकिन एक छोटी सी पार्टी उनकी जिंदगी छीन सकती है। पुलिस को ट्रेनिंग की जरूरत है कि वे शांति से काम करें, न कि हिंसा से। अगर कांस्टेबल समझाते या हेल्पलाइन पर कॉल करते, तो शायद सब अलग होता। यह घटना पूरे मध्य प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। मीडिया ने इसे प्रमुखता से दिखाया। कई चैनलों पर बहस हो रही है कि पुलिस सुधार कैसे हों। सरकार ने कहा है कि दोषियों को सख्त सजा मिलेगी। लेकिन सजा से उदित वापस नहीं आएंगे। उनके परिवार का क्या होगा? मां-बाप का इकलौता सहारा चला गया। बहनें सदमे में हैं। समाज को अब जागना होगा। हमें ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। अगर हम चुप रहे, तो अगला शिकार कोई और हो सकता है। उदित की याद में दोस्तों ने एक छोटा सा कैंडल मार्च निकाला। वे कहते हैं कि भाई की मौत व्यर्थ न जाए। आशा है कि न्याय मिले और ऐसी बर्बरता दोबारा न हो।
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