दशहरा 2026: दिल्ली के द्वारका में खड़ा हुआ 221 फीट का विशालकाय रावण, 40 लाख की लागत और 120 कारीगरों की मेहनत से हुआ तैयार
दशहरा 2026 के अवसर पर दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 में 221 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया है। 120 कारीगरों द्वारा 40 लाख रुपये की लागत से बने इस पुतले का मुकुट ही 25 फीट का है। जानिए इसकी खासियतें।

- द्वारका सेक्टर-10 में देश का सबसे ऊंचा रावण: 25 फीट का मुकुट और वाटरप्रूफ बनावट, रिमोट कंट्रोल से होगा दहन
- दिल्ली रामलीला में रिकॉर्ड: 221 फीट ऊंचे रावण को संभालने के लिए खोदा गया 10 फीट गहरा गड्ढा, 3 महीने में बनकर हुआ तैयार
- द्वारका में दशहरे का भव्य आकर्षण: 221 फुट का रावण देखने उमड़ रहे लोग, 40 लाख रुपये में तैयार हुआ आधुनिक पुतला
विजयादशमी के पावन पर्व पर बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक रावण दहन इस बार राष्ट्रीय राजधानी में एक नए पैमाने पर देखने को मिल रहा है। पश्चिमी दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 स्थित रामलीला मैदान में 221 फीट ऊंचा रावण का पुतला खड़ा किया गया है। द्वारका श्री रामलीला सोसायटी द्वारा स्थापित इस विशालकाय पुतले को देखने के लिए अभी से दिल्ली-एनसीआर से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
आयोजन समिति के अनुसार, इस पूरे ढांचे को तैयार करने में लगभग 40 लाख रुपये की लागत आई है। पुतले का आकार इतना विशाल है कि इसका मुकुट ही 25 फीट ऊंचा बनाया गया है।
- 120 कारीगरों की 3 महीने की मेहनत
इस ऐतिहासिक पुतले के निर्माण के पीछे कारीगरों का लंबा परिश्रम जुड़ा है। लगभग 120 कुशल कारीगरों और शिल्पकारों की टीम ने पिछले तीन महीनों से दिन-रात काम करके इसे अंतिम रूप दिया है। पुतले के आंतरिक ढांचे को मजबूत बनाए रखने के लिए भारी मात्रा में बांस और कई टन लोहे के पाइपों का सहारा लिया गया है। इतनी भारी और ऊंची संरचना को हवा के दबाव से सुरक्षित रखने के लिए जमीन में 10 फीट गहरा विशेष गड्ढा खोदा गया, जिसमें पुतले के मुख्य स्तंभ को मजबूती से फिक्स किया गया है।
- बारिश से बेअसर वाटरप्रूफ परिधान
अक्सर दशहरे के आसपास होने वाली बेमौसम बारिश से पुतलों के भीगने और दहन में रुकावट आने का जोखिम रहता है। इस बार आयोजकों ने इसका तकनीकी समाधान निकालते हुए रावण की बाहरी पोशाक को पूरी तरह वाटरप्रूफ मखमली कपड़े (Waterproof Velvet) से तैयार करवाया है। इसके कारण हल्की या तेज बारिश में भी पुतले को नुकसान नहीं पहुंचेगा। इसके साथ ही मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों को भी लगभग 90-90 फीट की ऊंचाई पर तैयार किया गया है।
- रिमोट कंट्रोल से संपन्न होगा दहन
इस बार रावण दहन की प्रक्रिया में तकनीक का विशेष समन्वय किया गया है। पारंपरिक तरीके से मशाल से आग लगाने के बजाय दहन की शुरुआत आधुनिक रिमोट-कंट्रोल प्रणाली के जरिए की जाएगी। बटन दबाते ही पहले पुतले के विभिन्न हिस्सों में सुनियोजित आतिशबाजी शुरू होगी और उसके बाद पूरी संरचना धू-धू कर जल उठेगी। द्वारका सेक्टर-10 मैदान में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस और निजी सुरक्षाकर्मियों की व्यापक तैनाती की गई है।
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