एसआईआर पर अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल की टिप्पणी पर भारत का कड़ा रुख: राजदूत विनय क्वात्रा बोले- आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर सवाल उठाने वाली अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल को भारत ने कड़ा जवाब दिया है। राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इसे आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य हस्तक्षेप बताया।

- मतदाता सूची संशोधन पर अमेरिकी बयान पर भारत का पलटवार: राजदूत क्वात्रा ने कहा- हमारा लोकतंत्र जीवंत और निष्पक्ष
- भारत की चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली प्रमिला जयपाल को जवाब: राजदूत ने कहा- गलतफहमी दूर करने को तैयार
- एसआईआर प्रक्रिया पर अमेरिकी टिप्पणी को भारत ने बताया अस्वीकार्य, स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं का दिया हवाला
वाशिंगटन / नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल की टिप्पणियों पर भारत ने सख्त ऐतराज जताया है। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे और चुनावी प्रक्रियाओं पर उठाए गए सवालों को देश के आंतरिक मामलों में पूरी तरह "अस्वीकार्य हस्तक्षेप" करार दिया है।
भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से भारत में मतदाता सूची के मसौदे से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का दावा करते हुए चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने इसकी तुलना अमेरिका के घरेलू राजनीतिक घटनाक्रमों से करते हुए भारत में हो रहे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के समर्थन की बात कही थी।
- राजदूत विनय मोहन क्वात्रा का दो टूक जवाब
अमेरिकी सांसद के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर स्पष्ट किया कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है जहां मजबूत और स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाएं कार्यरत हैं।
राजदूत ने कहा कि भारत का स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने का एक लंबा और स्थापित इतिहास रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि देश की संप्रभु चुनावी और राजनीतिक प्रक्रियाओं पर बाहरी टिप्पणियां अनुचित हैं। इसके साथ ही क्वात्रा ने यह भी जोड़ा कि यदि सांसद के मन में इस प्रक्रिया को लेकर कोई भ्रांतियां हैं, तो उनकी गलतफहमियों को दूर करने के लिए भारत रचनात्मक संवाद के लिए हमेशा तैयार है।
एसआईआर अभियान को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारत निर्वाचन आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यह पूरी प्रक्रिया मतदाता सूचियों को त्रुटिरहित और अद्यतन बनाने का एक स्थापित प्रशासनिक नियम है। आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी पात्र मतदाता का नाम अनजाने में मसौदा सूची से छूट जाता है, तो उसे दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का पूरा विधिक अवसर दिया जाता है।
इसके अलावा, प्रभावित नागरिक फॉर्म-6 भरकर दोबारा अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। भारतीय कूटनीतिक हलकों का स्पष्ट मानना है कि पूरी तरह प्रशासनिक और कानूनी तंत्र के तहत संचालित इस प्रक्रिया पर विदेशी सांसदों द्वारा की गई राजनीतिक टिप्पणियां आधारहीन हैं।
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