मायावती का 70वें जन्मदिन पर ब्राह्मणों को साधने का बड़ा ऐलान: बीएसपी अकेले लड़ेगी 2027 यूपी चुनाव, भाजपा-सपा-कांग्रेस पर हमला बोला। 

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 15 जनवरी 2026 को अपने 70वें जन्मदिन के अवसर पर लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में

Jan 16, 2026 - 14:53
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मायावती का 70वें जन्मदिन पर ब्राह्मणों को साधने का बड़ा ऐलान: बीएसपी अकेले लड़ेगी 2027 यूपी चुनाव, भाजपा-सपा-कांग्रेस पर हमला बोला। 
मायावती का 70वें जन्मदिन पर ब्राह्मणों को साधने का बड़ा ऐलान: बीएसपी अकेले लड़ेगी 2027 यूपी चुनाव, भाजपा-सपा-कांग्रेस पर हमला बोला। 
  • ब्राह्मणों को सम्मान और प्रतिनिधित्व की जरूरत पर जोर: मायावती ने कहा बीएसपी सरकार में पूरी होंगी आकांक्षाएं, अन्य पार्टियों पर लगाया उपेक्षा का आरोप
  • यूपी की सियासत में नया मोड़ लेकर आई मायावती की घोषणा: ब्राह्मण समुदाय को बीजेपी-सपा से सावधान रहने की सलाह, गठबंधन से इनकार कर स्वतंत्र चुनाव लड़ने का फैसला

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 15 जनवरी 2026 को अपने 70वें जन्मदिन के अवसर पर लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जिसमें उन्होंने ब्राह्मण समुदाय को संबोधित करते हुए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समुदाय को सम्मान, प्रतिनिधित्व और जीविका के साधनों की आवश्यकता है और केवल बीएसपी सरकार ने ही अतीत में इनकी आकांक्षाओं को पूरा किया है। मायावती ने ब्राह्मणों से अपील की कि वे भाजपा, कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियों के जाल में न फंसें। उन्होंने बताया कि बीएसपी ने कई विधानसभा चुनावों में ब्राह्मणों को टिकट वितरण और सरकार में उचित भागीदारी दी है तथा उनके खिलाफ किसी भी अन्याय या अत्याचार को होने नहीं दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बीएसपी सत्ता में आती है तो ब्राह्मणों, क्षत्रियों, जाटों और यादवों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। साथ ही ऊपरी जातियों जैसे क्षत्रिय और वैश्य समुदायों के हितों, कल्याण और सुरक्षा की रक्षा की जाएगी। मायावती ने भाजपा सरकार पर ब्राह्मण समुदाय की उपेक्षा का आरोप लगाया और कहा कि हाल ही में भाजपा के ब्राह्मण विधायकों ने वर्तमान सरकार के तहत समुदाय की उपेक्षा और अत्याचारों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सपा की पीडीए मुहिम की आलोचना की और कहा कि सपा शासन में गुंडे, माफिया और भ्रष्ट लोग हावी थे तथा यादवों को छोड़कर सभी समुदायों को परेशान किया गया जिसमें दलित सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। उन्होंने 1995 के गेस्ट हाउस कांड का जिक्र किया जहां सपा के गुंडों ने उन पर हमले का प्रयास किया था। मायावती ने स्पष्ट किया कि बीएसपी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी और किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि पूरे देश में सभी चुनाव बीएसपी अपनी पूरी ताकत से लड़ेगी। हालांकि भविष्य में यदि कोई गठबंधन साथी ऊपरी जातियों के वोट बीएसपी को ट्रांसफर कर सके तो विचार किया जा सकता है लेकिन यह अभी दूर की बात है। उन्होंने भाजपा सरकार पर दलितों और पिछड़ों के लिए निराशा फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि कानून व्यवस्था सपा शासन जैसी हो गई है। उन्होंने पिछले चुनावों में ईवीएम से छेड़छाड़ की आशंका जताई लेकिन कहा कि बीएसपी इसके बावजूद चुनाव लड़ेगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक शॉर्ट सर्किट हुआ जिससे धुआं फैल गया और कार्यक्रम बीच में ही समाप्त हो गया।

मायावती की इस घोषणा का आधार हालिया राजनीतिक घटनाक्रम है जिसमें भाजपा के ब्राह्मण विधायकों की बैठक शामिल है। 23 दिसंबर 2025 को भाजपा विधायक पीएन पाठक के आवास पर करीब 45-50 ब्राह्मण विधायकों की बैठक हुई थी जिसमें पूर्वी यूपी और बुंदेलखंड के विधायक शामिल थे। यह बैठक पाठक की पत्नी के जन्मदिन के बहाने आयोजित थी जहां लिट्टी-चोखा परोसा गया था। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बैठक को लिट्टी-चोखा पार्टी कहकर व्यंग्य किया था और भाजपा विधायकों में बगावत की संभावना जताई थी। मायावती ने इस बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा में भी ब्राह्मण विधायक समुदाय की उपेक्षा और अत्याचारों से चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस के ब्राह्मण विधायक भी ऐसी चिंता व्यक्त कर चुके हैं। मायावती ने ब्राह्मणों से कहा कि वे किसी की लिट्टी-चोखा की बैटी नहीं बल्कि सम्मान, प्रतिनिधित्व और जीविका के साधन चाहते हैं। उन्होंने 2007 के चुनाव का जिक्र किया जब बीएसपी ने ब्राह्मण-दलित सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला से सफलता पाई थी और ब्राह्मणों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया था। उन्होंने कहा कि अन्य सरकारों ने बीएसपी की कल्याणकारी योजनाओं की नकल की लेकिन सही इरादे से लागू नहीं किया। मायावती ने आरोप लगाया कि भाजपा, कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियां सांम, दाम, दंड, भेद की नीति अपनाकर बीएसपी को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं और पार्टी को इसका मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए। उन्होंने पार्टी संगठन को मजबूत करने और यूपी में सत्ता में वापसी के लिए काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन से बीएसपी को कम फायदा और ज्यादा नुकसान हुआ है क्योंकि दलित वोट साथी पार्टी को ट्रांसफर हो जाता है लेकिन ऊपरी जातियों का वोट जातिवादी मानसिकता के कारण बीएसपी को नहीं मिलता।

मायावती के इस बयान पर भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया आई है। केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि भारत कई रंगों वाली एक सुंदर गुलदस्ता जैसा है और केवल एक जाति की बात करने से अन्य जातियों के सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि हम सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास में विश्वास करते हैं। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि ब्राह्मण समुदाय ने ऐतिहासिक रूप से पूरे समाज के कल्याण के लिए काम किया है और वे एकता में विश्वास करते हैं न कि विभाजन में। यूपी भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि ब्राह्मण समुदाय को बीएसपी से किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है और वे स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम हैं। जेडीयू नेता केसी त्यागी ने मायावती को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे धीरे-धीरे कई सामाजिक समूहों से दूर हो गई हैं जिसमें उनके अपने आधार समर्थक भी शामिल हैं। कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने जन्मदिन की बधाई दी लेकिन मायावती की राजनीतिक लाइन को भ्रमित बताया और इसे रणनीतिक अनिश्चितता से जोड़ा। आरएलडी नेता और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने बयान पर टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि उन्होंने इसे नहीं देखा है तथा मायावती को अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की शुभकामनाएं दीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती का संदेश 2027 से पहले यूपी की राजनीति में बीएसपी को केंद्रीय स्थान दिलाने की सोची-समझी कोशिश है। उन्होंने सम्मान, प्रतिनिधित्व और सामाजिक संतुलन की पुरानी बयानबाजी को दोहराया है और देखना है कि पुराना ब्राह्मण-दलित फॉर्मूला राज्य की राजनीति को फिर से आकार दे सकता है या नहीं। ब्राह्मण यूपी की आबादी का करीब 11-12 प्रतिशत हैं लेकिन करीब 30 जिलों में चुनावी रूप से प्रभावशाली हैं।

मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सपा पर विशेष हमला बोला और कहा कि सपा की पीडीए मुहिम पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक पर केंद्रित है लेकिन सपा शासन में यादवों को छोड़कर सभी समुदायों को परेशान किया गया। उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण का सबसे ज्यादा फायदा यादव समुदाय को मिला लेकिन बीएसपी सरकारों में किसी समुदाय या धर्म के साथ भेदभाव नहीं किया गया और यादवों के हितों का भी ध्यान रखा गया जिसे आगे भी जारी रखा जाएगा। उन्होंने भाजपा पर कहा कि दलितों और पिछड़ों को निराश किया है और कानून व्यवस्था सपा शासन जैसी हो गई है। मायावती ने कहा कि बीएसपी का अनुभव दिखाता है कि गठबंधन से कम फायदा और ज्यादा नुकसान होता है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन मजबूत करने का निर्देश दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छत की लाइट में शॉर्ट सर्किट से चिंगारी और धुआं फैल गया जिससे कार्यक्रम बीच में ही समाप्त हो गया और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार कॉन्फ्रेंस में यूपी चुनाव रणनीति और ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर चर्चा होनी थी।

मायावती की घोषणा से यूपी की राजनीति में हलचल मच गई है। उन्होंने ब्राह्मण समुदाय को बीजेपी से सावधान रहने की सलाह दी। भाजपा की ओर से सतर्क लेकिन दृढ़ प्रतिक्रिया आई है। एसपी सिंह बघेल ने जाति की बात पर सवाल उठाया। मनोज तिवारी ने ब्राह्मणों की एकता पर जोर दिया। पंकज चौधरी ने बीएसपी से प्रमाणपत्र की जरूरत न होने की बात कही। केसी त्यागी ने सामाजिक समूहों से दूरी पर टिप्पणी की। तारिक अनवर ने राजनीतिक लाइन को भ्रमित बताया। जयंत चौधरी ने टिप्पणी से इनकार किया। विश्लेषक इसे 2027 से पहले बीएसपी की स्थिति मजबूत करने की कोशिश मानते हैं। मायावती ने 2007 की सफलता का जिक्र किया जब ब्राह्मण-दलित फॉर्मूला से जीत मिली थी। उन्होंने अन्य पार्टियों पर योजनाओं की नकल का आरोप लगाया। गठबंधन से नुकसान पर जोर दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस शॉर्ट सर्किट से प्रभावित हुई।

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