कौन है गैंगस्टर अनिल पंडित? टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस से लेकर दिल्ली-हरियाणा तक जुड़े हैं तार
मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की जिम्मेदारी लेने वाला अनिल पंडित लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट से जुड़ा बताया जा रहा है। जानिए उसका आपराधिक नेटवर्क और दिल्ली-हरियाणा से जुड़े मामले।

- अमेरिका में बैठकर भारत में अपराध सिंडिकेट: जानिए अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हमले का दावा करने वाले अनिल पंडित की कुंडली
- बिश्नोई सिंडिकेट और अनिल पंडित: मुंबई, दिल्ली और पुणे तक फैली वारदातों में पुलिस रडार पर क्यों है यह नाम
- Tiger Shroff Attack: हमले की जिम्मेदारी लेने वाला अनिल पंडित कौन है, जांच एजेंसियों ने तेज की पड़ताल
मुंबई के जुहू इलाके में फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर हुई गोलीबारी के बाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय आपराधिक गिरोहों के नाम सामने आने लगे हैं। इस वारदात के तुरंत बाद सोशल मीडिया और कथित ऑडियो संदेशों के जरिए खुद को लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट से जुड़ा बताने वाले अनिल पंडित ने घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। इसके बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां और मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच अनिल पंडित के आपराधिक रिकॉर्ड और उसकी सक्रियता की गहन पड़ताल में जुट गई हैं।
- मूल रूप से हरियाणा का निवासी, अमेरिका से संचालन का दावा
जांच एजेंसियों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अनिल पंडित मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला है। सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि वह अवैध रास्तों ('डंकी रूट') के जरिए देश छोड़कर विदेश पहुंचा और फिलहाल अमेरिका में बैठकर अपने संपर्कों के जरिए भारत में आपराधिक वारदातों को अंजाम दिलवा रहा है। वह सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स पर अक्सर 'अनिल पंडित यूएसए' के नाम से संदेश जारी करता रहा है। भारत में उसके खिलाफ जबरन वसूली और आर्म्स एक्ट से जुड़े कई मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
- दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र में दर्ज मामलों से जुड़ाव
अनिल पंडित का नाम पहली बार किसी बड़ी घटना में नहीं उछला है। इससे पहले जून 2026 में दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में एक प्रमुख जिम के बाहर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग में भी उसकी संलिप्तता और सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने की बात सामने आई थी। इसके अलावा हरियाणा के पानीपत में मनी एक्सचेंज दफ्तर पर फायरिंग और गायक दिलेर खरकिया से जुड़े मामले में भी इसका नाम चर्चा में रहा था। महाराष्ट्र के पुणे और आसपास के इलाकों में दर्ज रंगदारी के कुछ मामलों में भी सुरक्षा एजेंसियां इसके स्थानीय गुर्गों के नेटवर्क की जांच कर रही हैं।
- स्थानीय शूटरों और विदेश में बैठे हैंडलर्स का गठजोड़
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट का काम करने का तरीका बेहद संगठित है। विदेश में बैठे हैंडलर्स एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर स्थानीय स्तर पर बेरोजगार या भटके हुए युवकों को हथियार और पैसे का लालच देकर भर्ती करते हैं। हमलावरों को वारदात के कुछ ही घंटे पहले हथियार और टारगेट की जानकारी दी जाती है, ताकि पकड़े जाने पर मुख्य साजिशकर्ता तक आसानी से न पहुंचा जा सके। जुहू की घटना में भी पुलिस ने राजस्थान के कोटा से तीन संदिग्धों को दबोचा है, जिनसे पूछताछ में स्थानीय कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
मुंबई पुलिस और साइबर सेल की टीमें हमले के बाद वायरल हुए ऑडियो और सोशल मीडिया पोस्ट्स की प्रामाणिकता की जांच कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि कई बार आपराधिक गिरोह केवल दहशत फैलाने और रंगदारी वसूलने के लिए ऐसी घटनाओं का श्रेय लेने का दावा करते हैं। जब तक फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों से इसकी पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
What's Your Reaction?





