Pilibhit Voter List Glitch - SIR प्रक्रिया के बाद पीलीभीत में सामने आई गड़बड़ी, एक ही EPIC नंबर पर दर्ज मिले अलग-अलग नाम

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद पीलीभीत में एक ही एपिक नंबर पर अलग-अलग व्यक्तियों के नाम दर्ज होने का मामला सामने आया है।

Oct 24, 2026 - 17:37
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Pilibhit Voter List Glitch - SIR प्रक्रिया के बाद पीलीभीत में सामने आई गड़बड़ी, एक ही EPIC नंबर पर दर्ज मिले अलग-अलग नाम
  • Election Commission Duplicate EPIC - पीलीभीत में मतदाता सूची पर उठे सवाल, एक वोटर आईडी नंबर पर कई व्यक्तियों का ब्योरा
  • UP Electoral Roll Error - मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के बाद विवाद, पीलीभीत में डुप्लिकेट एपिक नंबरों का मामला उजागर
  • Pilibhit Administration in Action - एक ही वोटर पहचान पत्र संख्या पर कई मतदाता, प्रशासनिक जांच के घेरे में बीएलओ और ऑपरेटर

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण और अद्यतनीकरण के लिए चलाए गए विशेष पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद पीलीभीत जिले से एक चौंकाने वाली तकनीकी व प्रशासनिक खामी सामने आई है। जिले के कई विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे मामले उजागर हुए हैं, जहां एक ही मतदाता पहचान पत्र संख्या (EPIC Number) पर अलग-अलग व्यक्तियों के नाम, पते और अन्य व्यक्तिगत विवरण दर्ज हैं। एक ही पहचान संख्या पर भिन्न-भिन्न मतदाताओं के नाम होने से चुनावी प्रणाली और डेटा सत्यापन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय स्तर पर जब मतदाताओं ने अपने पहचान पत्र और मतदाता सूची में दर्ज विवरण का ऑनलाइन मिलान किया, तब इस विसंगति की जानकारी सामने आई। कई नागरिकों ने पाया कि जिस विशिष्ट अल्फान्यूमेरिक कोड (EPIC) का उपयोग वे वर्षों से करते आ रहे हैं, उसी कोड पर जिले के किसी अन्य गांव या वार्ड के किसी अन्य व्यक्ति का नाम भी चुनाव आयोग के पोर्टल पर प्रदर्शित हो रहा है।

  • तकनीकी त्रुटि या मानवीय लापरवाही?

प्रारंभिक तौर पर इस तरह की गड़बड़ी के पीछे डेटा फीडिंग के दौरान हुई मानवीय चूक या निर्वाचन आयोग के सॉफ्टवेयर माइग्रेशन में आई तकनीकी खामी को जिम्मेदार माना जा रहा है। विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा घर-घर जाकर नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत या स्थानांतरित लोगों के नाम हटाने और मौजूदा प्रविष्टियों में संशोधन का कार्य किया गया था।

जानकारों का कहना है कि जब डेटा ऑपरेटरों द्वारा पोर्टल पर नए मतदाताओं या संशोधित प्रविष्टियों को डिजिटल रूप दिया गया, तो संभवतः सॉफ्टवेयर वैलिडेशन में खामी के चलते एक ही पूर्व-आवंटित संख्या दूसरी प्रविष्टि के साथ मैप हो गई। हालांकि, चुनाव आयोग के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि प्रत्येक नागरिक का एपिक नंबर पूरी तरह विशिष्ट (यूनिक) होना चाहिए और एक संख्या दो अलग-अलग व्यक्तियों को कभी आवंटित नहीं की जा सकती।

  • प्रशासन की सक्रियता और सुधार की प्रक्रिया

मामला उजागर होने और राजनीतिक व सामाजिक स्तर पर सवाल उठने के बाद जिला निर्वाचन कार्यालय ने इसका संज्ञान लिया है। संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) को इन विसंगतियों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर डेटा डुप्लिकेशन हुआ है, तो संबंधित प्रविष्टियों की भौतिक जांच कराई जाएगी। मूल मतदाता के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखते हुए प्रभावित व्यक्तियों को नियमानुसार नया और सही एपिक नंबर जारी करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है ताकि भविष्य में किसी भी वास्तविक मतदाता को अपने मताधिकार का प्रयोग करने में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

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