हरियाणा के सरकारी तंत्र में डिजिटल क्रांति: iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से कर्मचारियों को दी जाएगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग।

हरियाणा सरकार ने अपने प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के मुख्य सचिव

Apr 7, 2026 - 12:27
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हरियाणा के सरकारी तंत्र में डिजिटल क्रांति: iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से कर्मचारियों को दी जाएगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग।
हरियाणा के सरकारी तंत्र में डिजिटल क्रांति: iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के माध्यम से कर्मचारियों को दी जाएगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग।
  • मुख्य सचिव ने सभी विभागों को जारी किए निर्देश; प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और जनसेवा में सुधार के लिए एआई कौशल विकास को बनाया गया मुख्य प्राथमिकता।
  • मिशन कर्मयोगी के तहत भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होगा हरियाणा का वर्कफोर्स, डेटा-संचालित निर्णय लेने और तकनीकी सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान।

हरियाणा सरकार ने अपने प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने प्रदेश के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों, निगमों और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर सरकारी कर्मचारियों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कौशल विकास को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी कामकाज में सटीकता लाना और जटिल कार्यों को सरल बनाना है। आईगॉट (iGOT) कर्मयोगी प्लेटफॉर्म, जो कि मिशन कर्मयोगी के तहत एक राष्ट्रीय डिजिटल लर्निंग पोर्टल है, इस पूरी कवायद का केंद्र बिंदु रहेगा। इसके माध्यम से कर्मचारी अपनी सुविधानुसार और अपनी गति से एआई से जुड़े विभिन्न प्रमाणित पाठ्यक्रमों को नि:शुल्क पूरा कर सकेंगे, जिससे न केवल उनके व्यक्तिगत कौशल में वृद्धि होगी बल्कि पूरे प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को भी मजबूती मिलेगी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एकीकरण शासन के विभिन्न स्तरों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया को काफी हद तक सुधारने वाला साबित होगा। हरियाणा सरकार का मानना है कि यदि कर्मचारी एआई के मूलभूत सिद्धांतों और इसके उन्नत अनुप्रयोगों से परिचित होंगे, तो वे डेटा का बेहतर विश्लेषण कर पाएंगे और अधिक प्रभावी नीतियां बना सकेंगे। इस पहल के तहत कर्मचारियों को जेनेरेटिव एआई, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और उत्पादकता बढ़ाने वाले आधुनिक उपकरणों से संबंधित पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ये कोर्स विशेष रूप से सार्वजनिक प्रशासकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इससे सरकारी फाइलिंग सिस्टम, सार्वजनिक शिकायत निवारण और कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है, क्योंकि एआई उपकरण दोहराव वाले कार्यों को स्वचालित करने और त्रुटियों की संभावना को कम करने में सहायक होते हैं।

हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (HIPA) इस पूरी मुहिम में एक मार्गदर्शक और सहायक की भूमिका निभा रहा है। हिपा द्वारा कर्मचारियों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि एआई केवल एक तकनीकी शब्द नहीं है, बल्कि यह दैनिक सरकारी कार्यों को बेहतर बनाने का एक माध्यम है। प्रशिक्षण सत्रों के दौरान कर्मचारियों को यह सिखाया जाएगा कि कैसे एआई का उपयोग करके वे नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई के माध्यम से प्राप्त अंतर्दृष्टि का उपयोग करके समस्याओं का समाधान अधिक तत्परता से किया जा सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक, सभी में एक ऐसी तकनीकी सोच विकसित की जाए जो नवाचार को प्रोत्साहित करे और पुराने ढर्रे पर चल रहे सरकारी कामकाज को बदल सके।

मिशन कर्मयोगी भारत का सबसे बड़ा सिविल सेवा क्षमता निर्माण सुधार है, जो शासन को 'नियम-आधारित' से बदलकर 'भूमिका-आधारित' बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत iGOT प्लेटफॉर्म अब तक करोड़ों पाठ्यक्रमों को पूरा करवाकर दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल लर्निंग पहलों में से एक बन चुका है। आईगॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म की तकनीकी क्षमताएं इस प्रशिक्षण को और भी सुगम बनाती हैं। इस पर 'एआई सारथी' जैसा व्यक्तिगत शिक्षण मार्गदर्शक उपलब्ध है, जो कर्मचारियों को उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों के आधार पर उपयुक्त पाठ्यक्रमों का सुझाव देता है। इसके अलावा, 'एआई ट्यूटर' की सुविधा भी दी गई है जो कठिन अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाने और कर्मचारियों के सवालों के जवाब देने में सक्षम है। हरियाणा सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यह प्रशिक्षण केवल ऐच्छिक नहीं है, बल्कि इसे वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन (APAR) से भी जोड़ा गया है, ताकि कर्मचारी इसे गंभीरता से लें और अपनी कार्यक्षमता में सुधार करें। इससे कर्मचारियों में निरंतर सीखने की प्रवृत्ति पैदा होगी और वे बदलते समय की मांग के अनुरूप खुद को ढाल सकेंगे।

राज्य के मुख्य सचिव ने अपने निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य की सरकारी कार्यप्रणाली पूरी तरह से डिजिटल और डेटा-आधारित होगी। ऐसे में जो कर्मचारी तकनीक के साथ कदम मिलाकर नहीं चलेंगे, वे व्यवस्था में पीछे छूट सकते हैं। एआई कौशल विकास की यह पहल हरियाणा को देश के उन चुनिंदा राज्यों की सूची में शामिल करती है जो शासन में आधुनिक तकनीक के उपयोग को लेकर सबसे अधिक गंभीर हैं। डिजिटल इंडिया के विजन को आगे बढ़ाते हुए, यह कदम सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने का भी एक जरिया है। जब कर्मचारी तकनीक के माध्यम से डेटा को प्रोसेस करेंगे, तो मानवीय पक्षपात की गुंजाइश कम होगी और अंतिम लाभार्थी तक लाभ अधिक पारदर्शी तरीके से पहुँच सकेगा। प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा और एआई से जुड़े जोखिमों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कर्मचारियों को यह सिखाया जा रहा है कि एआई का जिम्मेदारी से उपयोग कैसे किया जाए और डेटा गोपनीयता को कैसे सुनिश्चित किया जाए। उभरती हुई तकनीकों के साथ आने वाली चुनौतियों, जैसे कि एल्गोरिदम का पक्षपात और एथिकल एआई, को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। इसका उद्देश्य एक ऐसा सुरक्षित तकनीकी वातावरण तैयार करना है जहां नवाचार और सुरक्षा साथ-साथ चल सकें। हरियाणा सरकार के इस विजन से न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि प्रदेश के युवाओं को भी एक संदेश जाएगा कि सरकार आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ रही है और भविष्य की जरूरतों के लिए पूरी तरह तैयार है।

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