Jharkhand Higher Education: झारखंड में प्रति 1 लाख युवाओं पर सिर्फ 9 कॉलेज, AISHE रिपोर्ट में खुलासा; छात्राओं के नामांकन में आई तेजी 

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की AISHE रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में प्रति 1 लाख युवाओं पर मात्र 9 कॉलेज उपलब्ध हैं। हालांकि छात्राओं के नामांकन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

Aug 31, 2026 - 12:34
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Jharkhand Higher Education: झारखंड में प्रति 1 लाख युवाओं पर सिर्फ 9 कॉलेज, AISHE रिपोर्ट में खुलासा; छात्राओं के नामांकन में आई तेजी 
झारखंड उच्च शिक्षा कॉलेज रिपोर्ट
  • Jharkhand Higher Education: झारखंड में कॉलेज घनत्व राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे, उच्च शिक्षा में बेटियों की हिस्सेदारी बढ़ी 
  • झारखंड में उच्च शिक्षा का संकट: 1 लाख युवाओं पर मात्र 9 कॉलेज, केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा 
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की AISHE रिपोर्ट: झारखंड में प्रति लाख युवाओं पर महज 9 कॉलेज, छात्राओं के दाखिले में बढ़त

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) की नवीनतम रिपोर्ट में झारखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग के प्रति एक लाख युवाओं पर औसतन मात्र 9 कॉलेज ही उपलब्ध हैं, जो राष्ट्रीय औसत की तुलना में बेहद कम है। बुनियादी ढांचे और शिक्षण संस्थानों की सीमित संख्या के कारण मौजूदा कॉलेजों पर विद्यार्थियों का अत्यधिक दबाव बना हुआ है। हालांकि, इस सीमित संसाधन के बीच एक सकारात्मक पहलू यह भी दर्ज किया गया है कि राज्य में छात्राओं के सकल नामांकन अनुपात में लगातार सुधार देखा जा रहा है। सरकार अब इन कमियों को दूर करने के लिए नए संस्थानों की स्थापना और संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। 

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों के आंकड़ों का विश्लेषण कर तैयार की गई रिपोर्ट में झारखंड की कॉलेज सघनता की चिंताजनक स्थिति सामने आई है। आंकड़ों के मुताबिक राज्य में युवा आबादी के अनुपात में कॉलेजों की संख्या काफी कम है। देश के कई प्रमुख राज्यों में जहां प्रति लाख युवाओं पर 30 से अधिक कॉलेज मौजूद हैं, वहीं झारखंड में यह आंकड़ा केवल 9 पर सिमटा हुआ है। इस कमी के कारण राज्य के मौजूदा डिग्री कॉलेजों में प्रति कॉलेज औसत विद्यार्थियों का नामांकन राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर पहुंच गया है, जिससे कक्षाओं और संसाधनों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। 

अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण के नवीनतम आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि राज्य में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों के लिए स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा के विकल्प सीमित हैं। सीमित महाविद्यालयों के चलते सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या फिर बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। प्रति संस्थान विद्यार्थियों की अधिक संख्या होने के कारण छात्र-शिक्षक अनुपात पर भी इसका प्रतिकूल असर देखा जा रहा है।

दूसरी तरफ रिपोर्ट में राहत देने वाली बात यह सामने आई है कि उच्च शिक्षा में बालिकाओं की भागीदारी का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं, प्रोत्साहन कार्यक्रमों और सामाजिक जागरूकता के चलते डिग्री स्तर पर छात्राओं का नामांकन अनुपात छात्रों के मुकाबले बेहतर स्थिति में पहुंच रहा है। विशेष रूप से सामाजिक रूप से पिछड़े और जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में छात्राओं द्वारा पारंपरिक कला, विज्ञान और वाणिज्य संकायों में दाखिला लेने की दर में सुधार दर्ज किया गया है।

शिक्षाविदों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों का दायरा बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक प्रखंड और अनुमंडल स्तर पर नए डिग्री कॉलेजों की स्थापना नहीं होगी, तब तक उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को उस स्तर तक नहीं पहुंचाया जा सकता जिसकी आवश्यकता आधुनिक रोजगार बाजार में है।

राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार इस असंतुलन से भलीभांति अवगत है और पिछले कुछ वर्षों में नए मॉडल डिग्री कॉलेजों, महिला महाविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों की स्थापना की दिशा में काम तेज किया गया है। अधिकारियों का दावा है कि आने वाले समय में नए स्वीकृत भवनों और परिसरों के चालू होने से प्रति लाख युवाओं पर कॉलेजों की उपलब्धता के आंकड़े में सुधार देखने को मिलेगा।

कॉलेजों की सीमित संख्या का सीधा असर विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव और शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ता है। एक-एक कॉलेज में क्षमता से अधिक दाखिले होने के कारण प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और खेल सुविधाओं का लाभ सभी विद्यार्थियों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाता। वहीं दूसरी ओर छात्राओं के नामांकन में हो रही वृद्धि राज्य में महिला सशक्तिकरण और साक्षरता दर को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है, जिससे भविष्य में कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है।

राज्य सरकार को अब उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए योजनाबद्ध तरीके से बजट आवंटन और रिक्त शिक्षण पदों पर भर्ती प्रक्रिया को गति देनी होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप बहुविषयक शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा देने, नए विश्वविद्यालयों के अंतर्गत संबद्धता प्रक्रिया को सुगम बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ करने से युवाओं को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

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