दिल्ली कैबिनेट का बड़ा फैसला: 'गो-दिल्ली फाउंडेशन' को मिली हरी झंडी, स्टार्टअप्स और युवाओं के लिए 50 करोड़ का फंड मंजूर

दिल्ली कैबिनेट ने स्टार्टअप्स और युवा उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए 50 करोड़ रुपये के प्रारंभिक फंड के साथ 'गो-दिल्ली फाउंडेशन' की स्थापना को मंजूरी दे दी है।

Oct 19, 2026 - 15:07
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दिल्ली कैबिनेट का बड़ा फैसला: 'गो-दिल्ली फाउंडेशन' को मिली हरी झंडी, स्टार्टअप्स और युवाओं के लिए 50 करोड़ का फंड मंजूर
  •  दिल्ली में नवाचार को रफ्तार: 50 करोड़ रुपये के कोष से बनेगा गो-दिल्ली फाउंडेशन, प्रोटोटाइप से बाजार तक मिलेगी मदद
  • युवा उद्यमियों को सीधा सहारा: दिल्ली सरकार ने दी गो-दिल्ली फाउंडेशन की स्थापना को मंजूरी
  • स्टार्टअप हब बनेगा दिल्ली: नॉट-फॉर-प्रॉफिट मॉडल पर शुरू होगा गो-दिल्ली फाउंडेशन, उद्योग विभाग करेगा संचालन
राजधानी में स्टार्टअप और नवाचार तंत्र को मजबूत करने की दिशा में दिल्ली कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। कैबिनेट की बैठक में 50 करोड़ रुपये के प्रारंभिक फंड के साथ ‘गो-दिल्ली फाउंडेशन’ (Go-Delhi Foundation) की स्थापना को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इस पहल का सीधा मकसद शोधकर्ताओं, युवा अन्वेषकों और उभरते उद्यमियों के तकनीकी विचारों को बाजार में उतरने योग्य उत्पादों और सफल उद्यमों में बदलना है।
 
  • कंपनी अधिनियम की धारा 8 के तहत होगा गठन
 
आधिकारिक विवरण के अनुसार, गो-दिल्ली फाउंडेशन की स्थापना कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के अंतर्गत एक गैर-लाभकारी (not-for-profit) कंपनी के रूप में की जाएगी। यह संस्था दिल्ली सरकार के उद्योग विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करेगी। धारा 8 संरचना का लाभ यह होगा कि इससे अर्जित किसी भी आय या लाभ का उपयोग लाभांश बांटने के बजाय सीधे उद्देश्यों के विस्तार और स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता देने में किया जा सकेगा।
 
  • हब-एंड-स्पोक मॉडल पर काम करेगी व्यवस्था
 
फाउंडेशन को एक 'हब-एंड-स्पोक' (Hub-and-Spoke) मॉडल पर संचालित करने की योजना तैयार की गई है। इसके तहत नए सिरे से अलग ढांचा खड़ा करने की जगह शहर में पहले से मौजूद सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों, प्रयोगशालाओं और उद्योग केंद्रों की सुविधाओं को एक साझा मंच से जोड़ा जाएगा। इससे उद्यमियों को अलग-अलग बुनियादी सुविधाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
 
  • प्रोटोटाइप से लेकर बाजार पहुंच तक सहायता
 
शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स और एमएसएमई (MSMEs) इकाइयों को इस योजना से व्यापक मदद मिलेगी। फाउंडेशन के माध्यम से उत्पाद इंजीनियरिंग, प्रोटोटाइपिंग, अत्याधुनिक टेस्टिंग लैब की उपलब्धता, तकनीकी परामर्श और इनक्यूबेशन की सुविधाएं दी जाएंगी। इसके साथ ही सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पूरी कराने और उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में भी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। 
 
इस पहल के अंतर्गत दिल्ली सरकार के विभिन्न विभाग अपनी व्यावहारिक प्रशासनिक व नागरिक समस्याओं को युवा नवप्रवर्तकों के सामने रखेंगे। इसके बाद चिन्हित समस्याओं के समाधान के रूप में विकसित तकनीकों का पायलट प्रोजेक्ट्स के माध्यम से परीक्षण किया जाएगा। इससे स्थानीय प्रशासन को तकनीकी समाधान मिलेंगे और नए स्टार्टअप्स को अपने उत्पाद का परीक्षण करने के लिए सीधा मंच प्राप्त होगा।

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