Pak-Afghan Border Clash: डूरंड रेखा पर पाकिस्तान और तालिबान बलों में भारी गोलाबारी, दोनों देशों ने एक-दूसरे पर मढ़े आरोप

अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच भीषण सैन्य झड़पें हुई हैं। गोलाबारी और सीमा विवाद को लेकर काबुल और इस्लामाबाद दोनों ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाली है।

Oct 18, 2026 - 17:03
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Pak-Afghan Border Clash: डूरंड रेखा पर पाकिस्तान और तालिबान बलों में भारी गोलाबारी, दोनों देशों ने एक-दूसरे पर मढ़े आरोप
प्रतीकात्मक चित्र

अफगानिस्तान और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा (डूरंड रेखा) पर एक बार फिर तनाव गहरा गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच भारी हथियारों और मोर्टार से गोलाबारी की घटनाएं सामने आई हैं। झड़पों के बाद प्रमुख व्यापारिक और पारगमन मार्गों पर आवाजाही ठप हो गई है, जबकि सीमांत बस्तियों में नागरिक आबादी के बीच भय का माहौल बना हुआ है।

घटना के तुरंत बाद काबुल में सत्तारूढ़ तालिबान प्रशासन और इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तानी विदेश व सैन्य विभाग की ओर से परस्पर विरोधी बयान जारी किए गए हैं। दोनों ही पक्षों ने पहले गोलीबारी शुरू करने और सीमा पर अतिक्रमण का आरोप एक-दूसरे पर मढ़ा है।

दोनों पक्षों का क्या है आधिकारिक पक्ष?

पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, अफगान सीमा सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के पाकिस्तानी सीमा चौकियों और सीमा पर बाड़ लगाने में जुटे कर्मियों को निशाना बनाकर गोलीबारी शुरू की। पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग का कहना है कि उनकी ओर से केवल जवाबी रक्षात्मक कार्रवाई की गई है। इस्लामाबाद ने यह भी दावा किया कि सीमा पार से आतंकवादी तत्वों को पनाह मिलने और सीमा के नियमों का उल्लंघन होने से यह गतिरोध पैदा हुआ है।

दूसरी ओर, अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय और स्थानीय तालिबान कमांडरों ने पाकिस्तानी दावों को पूरी तरह खारिज किया है। अफगान पक्ष का कहना है कि पाकिस्तानी सेना ने अफगान सीमा के भीतर गोलाबारी की और नागरिक बस्तियों को नुकसान पहुंचाया। तालिबान का आरोप है कि पाकिस्तानी बलों ने विवादित सीमा पट्टी पर मनमाने तरीके से नई चौकियां और बुनियादी ढांचा स्थापित करने का प्रयास किया, जिसका स्थानीय सुरक्षा बलों ने विरोध किया।

विवाद की जड़: डूरंड रेखा और सीमा चौकियां

यह पहली बार नहीं है जब दोनों देशों के बीच सीमा पर खूनी टकराव हुआ है। 1893 में ब्रिटिश काल के दौरान खींची गई 2,640 किलोमीटर लंबी डूरंड रेखा को अफगानिस्तान की कोई भी सरकार ऐतिहासिक रूप से आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता नहीं देती।

हाल के महीनों में तनाव की मुख्य वजहें निम्नलिखित रही हैं:

  • सीमा बाड़ और चौकियों का निर्माण: पाकिस्तान द्वारा डूरंड रेखा पर बाड़ लगाने और नई निगरानी चौकियां बनाने का अफगान तालिबान लगातार कड़ा विरोध करता रहा है।

  • तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का मुद्दा: पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि टीटीपी के लड़ाके अफगान सरजमीं का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हमले कर रहे हैं। हालांकि, काबुल प्रशासन इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

  • पारगमन और व्यापार में अवरोध: झड़पें होते ही तोरखम और स्पिन बोल्डक-चमन जैसे प्रमुख रास्ते बंद कर दिए जाते हैं, जिससे दोनों ओर सैकड़ों मालवाहक ट्रक और आम यात्री फंस जाते हैं।

गोलाबारी के चलते सीमावर्ती इलाकों के कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों को संवेदनशील अग्रिम मोर्चों से दूर रहने के निर्देश दिए हैं। दोनों देशों के स्थानीय सैन्य कमांडरों के बीच फ्लैग मीटिंग के जरिए तनाव कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर बढ़ते अविश्वास के चलते सीमा पर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

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