Farooq Abdullah on Trump - अमेरिकी राष्ट्रपति पर भड़के फारूक अब्दुल्ला, बोले- उनकी नीतियों से दुनिया में आ रही तबाही

नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि आक्रामक रुख से दुनिया में तबाही फैल रही है।

Oct 23, 2026 - 17:21
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Farooq Abdullah on Trump - अमेरिकी राष्ट्रपति पर भड़के फारूक अब्दुल्ला, बोले- उनकी नीतियों से दुनिया में आ रही तबाही
  • Global Geopolitics UP - युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं, फारूक अब्दुल्ला ने डोनाल्ड ट्रंप की कार्यशैली पर खड़े किए सवाल
  • Farooq Abdullah Statement - जंग से केवल निर्दोषों की जाएगी जान, ट्रंप को बातचीत का रास्ता अपनाने की दी सलाह
  • J&K Politics Update - वैश्विक संघर्षों पर बोले नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख, संवाद ही शांति का एकमात्र व्यवहार्य रास्ता

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने वैश्विक तनाव और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर कड़ा प्रहार किया है। श्रीनगर में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि आज दुनिया जिस अशांति और संकट के दौर से गुजर रही है, उसमें अमेरिकी नेतृत्व की आक्रामक नीतियों की बड़ी भूमिका है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह ट्रंप की मेहरबानी है, जो आज दुनिया भर में तबाही का मंजर सामने आ रहा है।

फारूक अब्दुल्ला ने दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे सैन्य टकरावों का जिक्र करते हुए रेखांकित किया कि हथियारों और प्रतिबंधों के बल पर कभी भी स्थाई समाधान नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने कहा कि ताकत के अंधाधुंध इस्तेमाल से केवल आम और निर्दोष नागरिकों की जान जाती है, संपत्तियां नष्ट होती हैं और मानवीय त्रासदियां गहराती हैं।

  • युद्ध कोई समाधान नहीं, संवाद ही एकमात्र विकल्प

नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता ने अमेरिकी नेतृत्व से आग्रह किया कि वह सैन्य विकल्पों को बढ़ावा देने के बजाय कूटनीतिक संवाद को प्राथमिक साधन के रूप में स्वीकार करे। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि बड़े से बड़े विवादों का हल अंततः बातचीत की मेज पर बैठकर ही निकला है।

अब्दुल्ला ने कहा कि युद्ध से कभी किसी पक्ष की वास्तविक जीत नहीं होती, बल्कि दोनों ही पक्षों को भारी कीमत चुकानी पड़ती है। जब तक विश्व की महाशक्तियां टकराव की मानसिकता छोड़कर शांति और मध्यस्थता की राह नहीं अपनाएंगी, तब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम जनता पर इसका विपरीत असर पड़ता रहेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी अस्थिरता पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संसाधनों और व्यापारिक मार्गों पर युद्ध की वजह से सीधा खतरा पैदा हो गया है। पश्चिम एशिया और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में लाखों भारतीय और विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी आजीविका के लिए कार्यरत हैं।

वहां पैदा होने वाले किसी भी तरह के संकट से न केवल इन प्रवासी कामगारों का भविष्य दांव पर लगता है, बल्कि देश की आर्थिक व्यवस्था और पेट्रोलियम आपूर्ति पर भी गंभीर दबाव बनता है। उन्होंने भारत सरकार से भी अपील की कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति बहाली और युद्धविराम के प्रयासों में अपनी कूटनीतिक क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल करे।

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