Trending: चूरू में DSP द्वारा महिला कांस्टेबल की पीठ पर हाथ मारने का वीडियो वायरल, मारपीट का आरोप, पुलिस ने दी सफाई।
राजस्थान के चूरू में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान डीएसपी सुनील झाझड़िया का एक वीडियो वायरल, जिसमें वे एक महिला कांस्टेबल की पीठ पर हाथ मारते दिख रहे हैं...
हाइलाइट्स:
- चूरू पुलिस ने वीडियो को एडिटेड और भ्रामक बताया, कहा- डीएसपी ने कांस्टेबल को बुलाने के लिए हल्के से हाथ रखा, मारपीट नहीं की।
- महिला कांस्टेबल ने वीडियो को गलत तरीके से वायरल करने का आरोप लगाते हुए छह लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की।
- आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल ने डीएसपी के तत्काल निलंबन की मांग की।
- चूरू पुलिस ने वीडियो की सत्यता और इसके प्रसार की मंशा की जांच शुरू की।
राजस्थान के चूरू जिले में सोमवार को एक घटना ने सोशल मीडिया पर तूल पकड़ लिया, जब एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें चूरू के डीएसपी सुनील झाझड़िया एक महिला कांस्टेबल की पीठ पर हाथ मारते नजर आए। यह घटना उस समय हुई जब कांग्रेस कार्यकर्ता जिला कलेक्ट्रेट की ओर रैली निकाल रहे थे, जिसमें वे बिजली, पानी, सफाई और कचरा निपटान जैसी बुनियादी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे थे। वीडियो में डीएसपी को महिला कांस्टेबल की पीठ पर जोर से प्रहार करते और चिल्लाते देखा गया, जिसके बाद इस मामले ने विवाद का रूप ले लिया। चूरू जिला, जो राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में स्थित है, लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। गर्मी के मौसम में बिजली और पानी की किल्लत, सड़कों की खराब स्थिति और कचरा निपटान की समस्या ने स्थानीय लोगों में असंतोष पैदा कर रखा है। इस पृष्ठभूमि में, कांग्रेस पार्टी ने चूरू में एक प्रदर्शन का आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों कार्यकर्ता जिला कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े। उनकी मांग थी कि स्थानीय प्रशासन इन समस्याओं का तत्काल समाधान करे। प्रदर्शन के दौरान, कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की, जिसे रोकने के लिए पुलिस को तैनात किया गया था।
इसी दौरान, एक वीडियो सामने आया जिसमें डीएसपी सुनील झाझड़िया एक महिला कांस्टेबल की पीठ पर हाथ मारते दिख रहे हैं। वीडियो में उनकी चिल्लाहट और महिला कांस्टेबल की तुरंत प्रतिक्रिया साफ दिखाई दे रही है। यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, खासकर X पर वायरल हो गया। वीडियो में दिखाए गए दृश्यों ने कई लोगों को आक्रोशित कर दिया, और डीएसपी के व्यवहार को अनुचित और महिला कांस्टेबल के साथ अभद्रता के रूप में देखा गया।
- पुलिस की सफाई:
चूरू पुलिस ने इस मामले में तुरंत अपनी स्थिति स्पष्ट की। चूरू के पुलिस अधीक्षक (एसपी) जय यादव ने एक बयान जारी कर कहा कि वायरल वीडियो को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। पुलिस का दावा है कि डीएसपी सुनील झाझड़िया ने महिला कांस्टेबल को मारने के इरादे से हाथ नहीं उठाया, बल्कि वह गलत दिशा में जा रही थी, और उसे बुलाने के लिए डीएसपी ने उसकी पीठ पर हल्के से हाथ रखा था। एसपी ने यह भी बताया कि वीडियो को जानबूझकर कांट-छांट कर वायरल किया गया ताकि पुलिस प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला कांस्टेबल ने इस घटना को लेकर कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की है। इसके विपरीत, कांस्टेबल ने खुद वीडियो को गलत और भ्रामक बताया और इसके प्रसार के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने इस मामले में छह लोगों के खिलाफ वीडियो को गलत तरीके से वायरल करने का मामला दर्ज किया है और इसकी जांच शुरू कर दी है।
- महिला कांस्टेबल का पक्ष:
महिला कांस्टेबल, जिसका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, ने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वीडियो को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने दावा किया कि डीएसपी ने उन्हें मारने की मंशा नहीं दिखाई, बल्कि यह एक सामान्य संकेत था जो प्रदर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने की स्थिति में दिया गया। कांस्टेबल ने यह भी कहा कि वीडियो को एडिट करके गलत संदेश फैलाया गया है। उन्होंने इस मामले में छह लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की, जिन्हें वे वीडियो के गलत प्रसार के लिए जिम्मेदार मानती हैं। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के नेता और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने डीएसपी सुनील झाझड़िया के खिलाफ तत्काल निलंबन की मांग की और इस घटना को महिला कांस्टेबल के साथ अभद्र व्यवहार का गंभीर मामला बताया। बेनीवाल ने राजस्थान सरकार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस मामले में सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने अपने X पोस्ट में लिखा, “यह घटना निंदनीय है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है। सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
चूरू पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि वे वीडियो की सत्यता की जांच कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इसे जानबूझकर विवाद पैदा करने के लिए एडिट किया गया था। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि वीडियो को वायरल करने वाले लोगों की मंशा क्या थी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वीडियो के प्रसार में कोई आपराधिक मंशा पाई गई, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कांग्रेस का प्रदर्शन चूरू में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को लेकर था। स्थानीय लोग बिजली कटौती, पानी की कमी, सड़कों की खराब स्थिति और कचरा निपटान की समस्याओं से त्रस्त हैं। गर्मी के मौसम में ये समस्याएं और गंभीर हो गई हैं, जिसके चलते कांग्रेस ने इस प्रदर्शन का आयोजन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट में प्रवेश करने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने रोकने का प्रयास किया। इस दौरान हुई अफरा-तफरी में ही यह घटना घटी, जिसने बाद में विवाद का रूप ले लिया।
X पर इस वीडियो को कई यूजर्स ने शेयर किया, जिसमें कुछ ने डीएसपी के व्यवहार की निंदा की, तो कुछ ने पुलिस की सफाई का समर्थन किया। @ReportBharat ने लिखा, “चूरू में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह वाकई मारपीट थी या सिर्फ गलतफहमी?” वहीं, @news4rajasthan ने पुलिस के बयान को शेयर करते हुए लिखा, “पुलिस का दावा है कि वीडियो को गलत तरीके से वायरल किया गया।” इस तरह की पोस्ट्स ने इस मामले को और चर्चा में ला दिया। यह मामला अभी जांच के दायरे में है, और पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वे इसकी तह तक जाएंगे। वीडियो की सत्यता और इसके पीछे की मंशा की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह घटना वास्तव में मारपीट थी या गलतफहमी का नतीजा। फिलहाल, यह मामला चूरू में चर्चा का केंद्र बना हुआ है, और स्थानीय लोग इसकी प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं।
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