Trending: नशे में धुत डॉक्टर के कारण होमगार्ड की मौत, CMO ने शुरू की जांच, ललितपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही का शर्मनाक चेहरा।
उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक ऐसा मामला सामने आया...
ललितपुर: उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। एक सड़क दुर्घटना में घायल होमगार्ड की समय पर इलाज न मिलने के कारण मौत हो गई, जबकि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर वंश गोपाल गुप्ता कथित तौर पर शराब के नशे में धुत अपने कमरे में चड्डी-बनियान पहने पड़े रहे। इस घटना ने उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ललितपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की है और आरोपी डॉक्टर के खिलाफ शासन को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।
- लापरवाही की हद
18 जून 2025 की रात को ललितपुर जिले के बार क्षेत्र में एक सड़क दुर्घटना में एक होमगार्ड गंभीर रूप से घायल हो गया। राहगीरों ने तत्काल उसे बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां तत्काल इलाज की उम्मीद थी। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर जो दृश्य सामने आया, वह हैरान करने वाला था। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर वंश गोपाल गुप्ता अपने कमरे में शराब के नशे में धुत पाए गए। X पर वायरल पोस्ट्स के अनुसार, डॉक्टर ने न केवल मरीज को देखने से इनकार किया, बल्कि आधे घंटे से अधिक समय तक कमरे से बाहर ही नहीं आए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घायल होमगार्ड को अस्पताल लाने वाले राहगीरों और परिजनों ने डॉक्टर को बार-बार बुलाने की कोशिश की। CHC के अन्य कर्मचारियों ने भी डॉक्टर को जगाने का प्रयास किया, लेकिन नशे में होने के कारण वह मरीज तक नहीं पहुंचे। इस बीच, घायल होमगार्ड की हालत बिगड़ती चली गई, और समय पर इलाज न मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। स्ट्रेचर पर खून बहता रहा, लेकिन अस्पताल की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। X पर वायरल एक वीडियो में परिजनों का गुस्सा और दुख साफ झलक रहा था। एक परिजन ने डॉक्टर से कहा, "आप ड्यूटी पर हैं, और मरीज तड़प रहा है।" जवाब में डॉक्टर वंश गोपाल गुप्ता ने कथित तौर पर कहा, "मर गया तो मैं क्या करूं?" इस बयान ने न केवल परिजनों को आहत किया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी भारी आक्रोश पैदा किया।
- परिजनों का दर्द और हंगामा
होमगार्ड की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अस्पताल में हंगामा किया और डॉक्टर वंश गोपाल गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। परिजनों का आरोप था कि अगर समय पर इलाज मिला होता, तो शायद उनके प्रियजन की जान बच सकती थी। एक परिजन ने 'आज तक' से बातचीत में कहा, "हम रात में उसे लेकर आए थे। डॉक्टर को बुलाने के लिए हमने बहुत कोशिश की, लेकिन वह नशे में थे और कमरे से बाहर ही नहीं आए। हमारा परिवार तबाह हो गया।" परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि CHC में अन्य कर्मचारी भी लापरवाही बरत रहे थे। कुछ कर्मचारियों ने मरीज को देखने की बजाय परिजनों को टालने की कोशिश की। इस घटना का वीडियो परिजनों ने सोशल मीडिया पर शेयर किया, जो तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में साफ दिख रहा था कि स्ट्रेचर पर खून बिखरा हुआ था, और मरीज की हालत गंभीर थी, लेकिन अस्पताल की ओर से कोई तत्काल कार्रवाई नहीं हुई।
- प्रशासनिक प्रतिक्रिया: CMO ने गठित की जांच कमेटी
घटना के बाद ललितपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की। CMO ने कहा, "यह एक गंभीर मामला है, और हम इसे हल्के में नहीं ले रहे हैं। डॉक्टर वंश गोपाल गुप्ता के खिलाफ शासन को पत्र लिखा गया है, और जांच कमेटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।" पुलिस ने भी इस मामले में जांच शुरू की है। बार थाने के प्रभारी ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर डॉक्टर के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, अभी तक डॉक्टर को निलंबित नहीं किया गया है, जिसके कारण परिजनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बार की बदहाली
यह पहली बार नहीं है जब बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही सुर्खियों में आई हो। नवंबर 2024 में भी एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक परिवार ने आरोप लगाया था कि CHC के कर्मचारी नशे में धुत थे और मरीजों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे थे। उस मामले में भी CMO ने जांच कमेटी गठित की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार CHC में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। अस्पताल में अक्सर दवाइयां खत्म हो जाती हैं, और डॉक्टर समय पर ड्यूटी पर नहीं मिलते। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "यहां के अस्पताल में इलाज के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। गरीब लोग मजबूरी में यहां आते हैं, लेकिन हालात इतने खराब हैं कि जान जोखिम में पड़ जाती है।"
X पर इस घटना ने भारी हंगामा मचाया। कई यूजर्स ने उत्तर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा, "यह योगी सरकार के सुशासन का दावा है? सरकारी अस्पताल शराबखाने बन गए हैं।" एक अन्य यूजर ने ट्वीट किया, "डॉक्टर वंश गोपाल गुप्ता को तत्काल बर्खास्त करना चाहिए। यह लापरवाही नहीं, हत्या है।" कई लोगों ने इस घटना को उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बदहाली का प्रतीक बताया। एक पोस्ट में लिखा गया, "ललितपुर का यह मामला सिर्फ एक डॉक्टर की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी है। क्या सरकार अब भी चुप रहेगी?"
- उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
यह घटना उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक और उदाहरण है। हाल के वर्षों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां डॉक्टरों की लापरवाही या नशे में ड्यूटी करने के कारण मरीजों की जान चली गई। उदाहरण के लिए, दिसंबर 2024 में जालौन के माधौगढ़ CHC में भी एक डॉक्टर कुलदीप राजपूत शराब के नशे में मरीजों के साथ अभद्रता करते पाए गए थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जैसे आयुष्मान भारत और मुफ्त स्वास्थ्य मेले, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका प्रभाव सीमित ही दिखता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत बदतर है, जहां न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही जरूरी उपकरण।इस घटना ने कई कानूनी और नैतिक सवाल खड़े किए हैं।
पहला, क्या एक डॉक्टर का नशे में ड्यूटी करना केवल अनुशासनात्मक मामला है, या इसे आपराधिक लापरवाही माना जाना चाहिए? दूसरा, क्या स्वास्थ्य विभाग इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस नीति लागू करेगा? तीसरा, क्या परिजनों को इस नुकसान का मुआवजा मिलेगा? कानून के जानकारों का कहना है कि यदि जांच में डॉक्टर की लापरवाही सिद्ध होती है, तो उनके खिलाफ IPC की धारा 304A (लापरवाही से मृत्यु) के तहत मामला दर्ज हो सकता है। साथ ही, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के तहत डॉक्टर का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। ललितपुर के बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की यह घटना केवल एक डॉक्टर की लापरवाही की कहानी नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का दुखद चेहरा है। होमगार्ड की मौत ने एक बार फिर सिस्टम की खामियों को उजागर किया है। CMO की जांच कमेटी से उम्मीद है कि यह मामले की तह तक जाएगी और दोषियों को सजा मिलेगी।
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