UPI लेनदेन पर राहत, 2000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर GST नहीं, वित्त मंत्रालय ने दी स्पष्ट जानकारी।

UPI Transactions News: केंद्र सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए होने वाले लेनदेन पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) लगाने की अफवाहों को खारिज कर ....

Jul 29, 2025 - 11:49
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UPI लेनदेन पर राहत, 2000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर GST नहीं, वित्त मंत्रालय ने दी स्पष्ट जानकारी।
UPI लेनदेन पर राहत, 2000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर GST नहीं, वित्त मंत्रालय ने दी स्पष्ट जानकारी।

केंद्र सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए होने वाले लेनदेन पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) लगाने की अफवाहों को खारिज कर दिया है। वित्त मंत्रालय ने 22 जुलाई 2025 को राज्यसभा के मॉनसून सत्र के दौरान साफ किया कि 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर GST लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यह खबर उन लाखों लोगों के लिए राहत की बात है, जो रोजमर्रा के भुगतान के लिए UPI का उपयोग करते हैं। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि GST परिषद ने इस तरह की कोई सिफारिश नहीं की है, और सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस स्पष्टीकरण ने कर्नाटक में व्यापारियों को मिले GST नोटिस के बाद पैदा हुए भ्रम को भी दूर किया है।

पिछले कुछ समय से यह अफवाह थी कि सरकार 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर 18 प्रतिशत GST लगाने की योजना बना रही है। यह चर्चा तब तेज हुई, जब कर्नाटक में वाणिज्यिक कर विभाग ने UPI लेनदेन के डेटा के आधार पर लगभग 6000 व्यापारियों को GST मांग नोटिस भेजे। इन नोटिस ने छोटे व्यापारियों और आम लोगों में चिंता पैदा कर दी थी। कई लोगों को डर था कि UPI के जरिए भुगतान करना महंगा हो सकता है, जिससे डिजिटल भुगतान की लोकप्रियता पर असर पड़ सकता है।

22 जुलाई 2025 को राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने वित्त मंत्रालय से सवाल पूछा कि क्या सरकार 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर GST लगाने पर विचार कर रही है। इस सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट किया कि GST परिषद ने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। उन्होंने कहा, "GST दरें और छूट पूरी तरह से GST परिषद की सिफारिशों पर निर्भर करती हैं, जिसमें केंद्र और सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर GST लगाने की कोई सिफारिश नहीं आई है।"

  • कर्नाटक में GST नोटिस का मामला

कर्नाटक में छोटे व्यापारियों को भेजे गए GST नोटिस ने इस मुद्दे को और हवा दी थी। कर्नाटक के वाणिज्यिक कर विभाग ने UPI लेनदेन के डेटा का विश्लेषण करके उन व्यापारियों को नोटिस जारी किए, जिनका वार्षिक कारोबार सेवा क्षेत्र में 20 लाख रुपये या सामान के कारोबार में 40 लाख रुपये से अधिक था। GST कानून के अनुसार, ऐसे कारोबारियों को GST रजिस्ट्रेशन कराना और अपने टर्नओवर की जानकारी देना अनिवार्य है। कर्नाटक के वाणिज्यिक कर विभाग की संयुक्त आयुक्त मीरा सुरेश पंडित ने कहा कि ये नोटिस GST नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए भेजे गए थे, न कि UPI लेनदेन पर टैक्स लगाने के लिए।

केंद्रीय खाद्य, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी स्पष्ट किया कि ये नोटिस कर्नाटक सरकार के वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा जारी किए गए थे, न कि केंद्र सरकार द्वारा। उन्होंने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के उस दावे को हास्यास्पद बताया, जिसमें उन्होंने कहा था कि इन नोटिसों में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है। जोशी ने कहा, "GST के दो घटक हैं—केंद्र के अधीन सीGST और राज्य के अधीन एसGST। कर्नाटक में ये नोटिस राज्य के अधिकारियों ने जारी किए हैं।"

  • UPI की लोकप्रियता और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा

UPI भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय साधन बन चुका है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा विकसित और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों के तहत संचालित यह प्रणाली दो बैंक खातों के बीच तत्काल धन हस्तांतरण की सुविधा देती है। वित्त वर्ष 2024-25 में UPI लेनदेन की कुल राशि 260.56 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जिसमें व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) लेनदेन 59.3 लाख करोड़ रुपये के थे। यह डिजिटल भुगतान में बढ़ते उपभोक्ता विश्वास और व्यापारियों के बीच UPI की स्वीकार्यता को दर्शाता है।

सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। जनवरी 2020 में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) हटा दिया था। इसका मतलब है कि व्यापारियों को UPI लेनदेन के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता, जिसके कारण UPI पर GST लागू होने का सवाल ही नहीं उठता।

इसके अलावा, सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 से UPI को बढ़ावा देने के लिए एक प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इस योजना के तहत छोटे मूल्य के पी2एम लेनदेन को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। वित्त वर्ष 2021-22 में इसके लिए 1389 करोड़ रुपये, 2022-23 में 2210 करोड़ रुपये और 2023-24 में 3631 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। यह योजना छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान अपनाने और नवाचार को बढ़ावा देने में मदद करती है।

  • UPI पर GST की अफवाहों का प्रभाव

2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर GST लगने की अफवाह ने न केवल आम लोगों, बल्कि छोटे व्यापारियों में भी चिंता पैदा की थी। कर्नाटक में व्यापारियों ने इन नोटिसों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। सोशल मीडिया पर भी कई उपयोगकर्ताओं ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की। एक एक्स उपयोगकर्ता ने लिखा, "UPI ने भुगतान को इतना आसान बना दिया है, लेकिन टैक्स लगने की खबरों ने सबको परेशान कर दिया।"

हालांकि, वित्त मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद व्यापारियों और आम लोगों को राहत मिली है। कई समाचार चैनलों और वेबसाइटों, जैसे न्यूज़18, अमर उजाला और ईटी नाउ, ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। एक अन्य एक्स पोस्ट में लिखा गया, "2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर GST लगाने की खबरें फर्जी हैं। सरकार ने साफ कर दिया कि ऐसा कोई प्लान नहीं है।"

  • UPI की वैश्विक स्थिति

एसीआई वर्ल्डवाइड की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में वैश्विक रियल-टाइम लेनदेन में भारत की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत थी। यह भारत के डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व को दर्शाता है। मार्च 2025 तक UPI लेनदेन की कुल राशि 24.77 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी, जो वित्त वर्ष 2019-20 के 21.3 लाख करोड़ रुपये से काफी अधिक है। यह वृद्धि डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाती है।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने UPI सिस्टम को और सुरक्षित और तेज बनाने के लिए नए नियम भी लागू किए हैं। इनमें बार-बार बैलेंस चेक करने या ट्रांजैक्शन स्टेटस को रिफ्रेश करने जैसे कार्यों को सीमित करना शामिल है, ताकि सिस्टम पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

  • GST संग्रह और डिजिटल अर्थव्यवस्था

भारत का GST संग्रह भी हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है। मार्च 2025 में GST संग्रह 9.9 प्रतिशत बढ़कर 1.96 लाख करोड़ रुपये और अप्रैल 2025 में 2.37 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसमें केंद्रीय GST, राज्य GST, एकीकृत GST और मुआवजा उपकर शामिल हैं। यह वृद्धि डिजिटल लेनदेन, विशेष रूप से UPI के बढ़ते उपयोग को दर्शाती है।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने चिंता जताई थी कि UPI पर GST लगाने से डिजिटल भुगतान की गति धीमी हो सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने हाल ही में कहा था कि UPI सिस्टम को चलाने के लिए लागत आती है, और इस खर्च को किसी न किसी तरह वहन करना पड़ता है। लेकिन सरकार ने साफ कर दिया कि वह UPI को मुफ्त और सुलभ बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • आम लोगों और व्यापारियों के लिए राहत

वित्त मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण से उन लोगों को बड़ी राहत मिली है जो UPI का उपयोग किराने की दुकान, बिल भुगतान, ऑनलाइन खरीदारी और अन्य रोजमर्रा के लेनदेन के लिए करते हैं। छोटे व्यापारियों के लिए भी यह अच्छी खबर है, क्योंकि UPI ने उनके व्यवसाय को आसान और तेज बनाया है। एक छोटे व्यापारी, रमेश कुमार, ने न्यूज़18 को बताया, "हम UPI पर निर्भर हैं। अगर इस पर टैक्स लगता, तो हमें नकद लेनदेन पर वापस जाना पड़ता, जो समय और मेहनत दोनों बर्बाद करता है।"

वित्त मंत्रालय ने 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर GST लगाने की अफवाहों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह फैसला डिजिटल इंडिया अभियान को मजबूती देता है और UPI को आम लोगों और व्यापारियों के लिए सस्ता और सुविधाजनक बनाए रखता है। GST परिषद की सिफारिशों के बिना सरकार इस तरह का कोई कदम नहीं उठा सकती, और फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। कर्नाटक में व्यापारियों को मिले नोटिस राज्य सरकार की कार्रवाई का हिस्सा थे, और केंद्र सरकार ने इसमें अपनी भूमिका से इनकार किया है।

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