Saurabh Rajput Murder Case - फांसी की सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे मुस्कान और साहिल, निचली अदालत का फैसला चुनौती
सौरभ राजपूत हत्याकांड में मौत की सजा पाने वाले मुस्कान और साहिल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है। सेशन कोर्ट के फैसले और फांसी की सजा को चुनौती दी गई है।

मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मौत की सजा पाए दोनों दोषियों मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। अपराध जगत में 'नीला ड्रम मर्डर केस' के नाम से चर्चित इस मामले में दोनों ने जिला एवं सत्र अदालत मेरठ द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा और दोषसिद्धि के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। दाखिल याचिका में निचली अदालत के आदेश को निरस्त करने और सजा रद्द करने की मांग की गई है। मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई होने के आसार हैं।
निचली अदालत के साक्ष्यों और जांच प्रक्रिया पर सवाल
उच्च न्यायालय में दाखिल अपील में बचाव पक्ष की ओर से अभियोजन द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और पुलिस विवेचना की निष्पक्षता पर कानूनी सवाल खड़े किए गए हैं। अपीलकर्ताओं का तर्क है कि निचली अदालत ने परिस्थितियों और गवाहियों के मूल्यांकन में प्रक्रियात्मक त्रुटियों को नजरअंदाज किया। इसी आधार पर दोषसिद्धि और मृत्युदंड दोनों को खारिज करने का अनुरोध किया गया है।
मेरठ सेशन कोर्ट ने सुनाई थी फांसी की सजा
इससे पूर्व मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने मामले को जघन्यतम अपराध मानते हुए 30 सितंबर को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को अदालत ने दोनों को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया था।
सौरभ राजपूत की हत्या कर शव को नीले ड्रम में छिपाने की इस सनसनीखेज वारदात ने कानून-व्यवस्था और आम जनमानस का ध्यान खींचा था। पुलिस ने तकनीकी और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। अब सत्र न्यायालय के कठोर आदेश के बाद दोनों दोषियों ने न्यायिक राहत के लिए उच्च न्यायालय की शरण ली है, जहां आगामी दिनों में अपील स्वीकार किए जाने और सुनवाई की तारीख तय होने पर स्थिति स्पष्ट होगी।
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