₹250 से शुरुआत कर खड़ा किया ₹90 लाख का कारोबार: केरल की शिजे की मशरूम फार्मिंग सफलता की कहानी
केरल की 57 वर्षीय शिजे ने महज ₹250 की लागत से ऑयस्टर मशरूम उगाने की शुरुआत की थी। आज उनका कारोबार ₹90 लाख तक पहुंच चुका है और वे 10,000 से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षित कर चुकी हैं।

- खाली समय का सही इस्तेमाल और ऑयस्टर मशरूम की खेती: 57 वर्षीय शिजे ने तैयार किया ₹90 लाख का बिजनेस मॉडल
- ऑयस्टर मशरूम और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स से बदली किस्मत: केरल की महिला उद्यमी ने 10,000 से अधिक लोगों को दी ट्रेनिंग
- ₹250 के निवेश से ₹90 लाख का टर्नओवर: जानिए कैसे केरल की शिजे बनीं सफल मशरूम किसान और ट्रेनर
केरल की 57 वर्षीय शिजे ने सीमित संसाधनों और न्यूनतम पूंजी के साथ कृषि उद्यमिता का एक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। घरेलू कामकाज के बाद मिलने वाले खाली समय का उपयोग करते हुए उन्होंने महज ₹250 की लागत से ऑयस्टर मशरूम उगाने की शुरुआत की थी। निरंतर प्रयोगों, उत्पाद विविधीकरण और बाजार की समझ के बल पर आज उनका यह प्रयास लगभग ₹90 लाख के सालाना कारोबार में बदल चुका है।
शुरुआती दौर में ताजे मशरूम बेचने तक सीमित रहने के बाद उन्होंने जल्द ही महसूस किया कि ताजे मशरूम की शेल्फ लाइफ कम होती है और बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर आय पर पड़ता है। इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने वैल्यू-एडेड (मूल्य संवर्धित) उत्पादों की दिशा में कदम बढ़ाया।
- वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स से मिली बाजार में मजबूती
शिजे ने केवल कच्चे मशरूम बेचने के बजाय उससे अचार, पाउडर, सूप मिक्स और अन्य खाने-पीने के उत्पाद तैयार करने शुरू किए। इस रणनीति ने दो बड़े फायदे दिए पहला, उत्पाद खराब होने का जोखिम समाप्त हो गया और दूसरा, प्रसंस्कृत उत्पादों से मिलने वाला लाभ मार्जिन काफी बढ़ गया। उनके द्वारा बनाए गए इन उत्पादों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ खुदरा दुकानों में भी अच्छी मांग मिलने लगी।
स्थानीय स्तर पर गुणवत्ता नियंत्रण और प्राकृतिक तरीकों से उत्पादन बनाए रखने के कारण ग्राहकों का भरोसा बढ़ता गया। जैसे-जैसे मांग में वृद्धि हुई, उन्होंने अपने उत्पादन के बुनियादी ढांचे का विस्तार किया और अन्य स्थानीय महिलाओं को भी इस प्रक्रिया से जोड़ना शुरू किया।
- 10,000 से अधिक लोगों को दिया प्रशिक्षण
अपने व्यवसाय को स्थापित करने के साथ ही शिजे ने अपने ज्ञान और तकनीक को दूसरों के साथ साझा करने की पहल की। अब तक वे 10,000 से अधिक लोगों को ऑयस्टर मशरूम उगाने, रख-रखाव करने और उससे मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे चुकी हैं।
उनके प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विशेष रूप से ग्रामीण महिलाएं, गृहिणियां और स्वरोजगार के इच्छुक युवा शामिल होते हैं। प्रतिभागियों को कम जगह और सीमित लागत में मशरूम उत्पादन की बारीकियां समझाई जाती हैं, जिससे कई परिवारों को अतिरिक्त घरेलू आय का साधन विकसित करने में मदद मिली है। लघु स्तर पर शुरू हुआ यह मॉडल आज यह दर्शाता है कि आधुनिक कृषि में वैज्ञानिक तरीकों और मूल्य संवर्धन का समन्वय ग्रामीण आजीविका को किस तरह सुदृढ़ बना सकता है।
What's Your Reaction?









