सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा: क्या बच्चों के लापता होने के पीछे देशव्यापी नेटवर्क सक्रिय है।
देश में बच्चों के लापता होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से गंभीर सवाल पूछे हैं। अदालत ने केंद्र को निर्देश
- लापता बच्चों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र को पैटर्न जांचने और आंकड़े जुटाने का निर्देश
- बच्चों की गुमशुदगी पर SC का बड़ा आदेश: क्या गिरोह या राज्य-स्तरीय समूह जिम्मेदार, केंद्र से मांगी रिपोर्ट
देश में बच्चों के लापता होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से गंभीर सवाल पूछे हैं। अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह यह पता लगाए कि क्या इन घटनाओं के पीछे कोई देशव्यापी नेटवर्क या राज्य-विशिष्ट गिरोह सक्रिय है। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि यह जांचना जरूरी है कि क्या मामलों में कोई पैटर्न है या ये केवल आकस्मिक घटनाएं हैं। केंद्र को सभी राज्यों से आंकड़े एकत्र कर उनका विश्लेषण करने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बच्चों के लापता होने के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताई। पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या इन घटनाओं के पीछे कोई राष्ट्रव्यापी नेटवर्क या राज्य-विशिष्ट समूह काम कर रहा है। अदालत ने कहा कि यह जानना आवश्यक है कि क्या मामलों में कोई निश्चित पैटर्न मौजूद है या ये बिखरी हुई घटनाएं हैं। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आंकड़े संकलित कर उनका विश्लेषण करे।
यह सुनवाई एक जनहित याचिका के दौरान हुई जिसमें बच्चों की गुमशुदगी और ट्रैफिकिंग के मामलों पर ध्यान आकर्षित किया गया था। अदालत ने पहले भी कई निर्देश दिए थे जिसमें राज्यों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने और मिशन वात्सल्य पोर्टल पर डेटा अपलोड करने के आदेश शामिल हैं। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि कुछ राज्यों ने लापता बच्चों और अभियोजन से जुड़े आंकड़े उपलब्ध करा दिए हैं लेकिन लगभग एक दर्जन राज्यों ने अभी तक डेटा साझा नहीं किया है।
पीठ ने कहा कि केंद्र को यह पता लगाना चाहिए कि क्या बच्चों के लापता होने के मामलों के पीछे कोई राष्ट्रव्यापी नेटवर्क या राज्य-विशिष्ट गिरोह है। अदालत ने पूछा कि क्या यह कोई पैटर्न है या केवल संयोग। केंद्र को सभी राज्यों से आंकड़े एकत्र करने और विश्लेषण करने का निर्देश दिया गया। यदि जरूरी हुआ तो सख्त आदेश जारी किए जा सकते हैं।
अदालत ने सुझाव दिया कि जिन बच्चों को बचाया गया है उनसे पूछताछ की जानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि उनके गायब होने के लिए कौन लोग या संगठन जिम्मेदार हैं। पीठ ने कहा कि डेटा साझा नहीं करने वाले राज्यों पर नाराजगी है और यदि सहयोग नहीं हुआ तो कड़े कदम उठाए जाएंगे। केंद्र को डेटा संकलन में तेजी लाने की आवश्यकता बताई गई।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि कुछ राज्यों ने आंकड़े सौंप दिए हैं लेकिन एक दर्जन राज्यों ने डेटा उपलब्ध नहीं कराया। पूर्ण डेटा मिलने के बाद ही सही विश्लेषण संभव होगा। अदालत ने केंद्र से सभी राज्यों से समन्वय स्थापित करने को कहा। यह मामला बच्चों की सुरक्षा और ट्रैफिकिंग रोकने से जुड़ा है। अदालत ने पहले भी राज्यों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने और पोर्टल पर डेटा अपलोड करने के निर्देश दिए थे। अब केंद्र को आंकड़ों के आधार पर पैटर्न की जांच करनी होगी। अदालत ने चिंता जताई कि लापता बच्चों की संख्या चिंताजनक है और समय पर कार्रवाई जरूरी है।
पीठ ने सुझाव दिया कि बचाए गए बच्चों से बातचीत कर यह पता लगाया जाए कि उनके गायब होने के पीछे कौन जिम्मेदार है। यह कदम ट्रैफिकिंग नेटवर्क का पता लगाने में मदद कर सकता है। अदालत ने कहा कि इस तरह की जांच से जिम्मेदार तत्वों का खुलासा होगा।
अदालत ने केंद्र को समयबद्ध तरीके से रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई में केंद्र को प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होगी। यह आदेश बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मामला जनहित याचिका पर आधारित है जिसमें लापता बच्चों की बढ़ती संख्या पर ध्यान दिलाया गया। अदालत ने पहले भी कई निर्देश दिए थे। अब पैटर्न और नेटवर्क की जांच पर फोकस है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर देता है। डेटा संकलन से सही तस्वीर सामने आएगी। जांच से बच्चों की सुरक्षा में सुधार की उम्मीद है।
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