देहरादून में त्रिपुरा छात्र की मौत पर नागालैंड मंत्री का बयान: पूर्वोत्तर के लोग भारत का अभिन्न हिस्सा, शब्दों से भावनाएं आहत हो सकती हैं। 

त्रिपुरा के एक 24 वर्षीय छात्र अंजेल चकमा की देहरादून में हुई मौत की घटना ने पूरे देश में चर्चा पैदा कर दी है। अंजेल चकमा देहरादून के एक निजी

Jan 2, 2026 - 12:56
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देहरादून में त्रिपुरा छात्र की मौत पर नागालैंड मंत्री का बयान: पूर्वोत्तर के लोग भारत का अभिन्न हिस्सा, शब्दों से भावनाएं आहत हो सकती हैं। 
देहरादून में त्रिपुरा छात्र की मौत पर नागालैंड मंत्री का बयान: पूर्वोत्तर के लोग भारत का अभिन्न हिस्सा, शब्दों से भावनाएं आहत हो सकती हैं। 

त्रिपुरा के एक 24 वर्षीय छात्र अंजेल चकमा की देहरादून में हुई मौत की घटना ने पूरे देश में चर्चा पैदा कर दी है। अंजेल चकमा देहरादून के एक निजी विश्वविद्यालय में एमबीए के अंतिम वर्ष के छात्र थे और त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के रहने वाले थे। यह घटना 9 दिसंबर 2025 को सेलाकुई क्षेत्र में हुई, जहां अंजेल और उनके छोटे भाई माइकल पर कुछ लोगों ने हमला किया। हमले में अंजेल गंभीर रूप से घायल हो गए और 17 दिनों तक अस्पताल में जीवन और मौत से जूझने के बाद 26 दिसंबर 2025 को उनकी मौत हो गई। हमले में चाकू और पीतल की मुक्की का इस्तेमाल किया गया, जिससे अंजेल की रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क में गंभीर चोटें आईं। नागालैंड के मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि पूर्वोत्तर के लोग भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं। उन्होंने इटानगर में पत्रकारों से बातचीत में जोर देकर कहा कि किसी के शब्द दूसरों की भावनाओं को चोट पहुंचा सकते हैं और बोलने से पहले सोचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हम किसी पूरे समुदाय को दोष नहीं दे सकते, लेकिन ऐसे लोग जो ऐसा करते हैं, वे पूर्वोत्तर के लोगों के बारे में कुछ नहीं जानते। मंत्री ने आगे कहा कि हम खुद को किसी भी रूप में चीनी नहीं मानते और हम मोमो नहीं हैं, मोमो एक व्यंजन है। हमारे चेहरे अलग हो सकते हैं, हम नागालैंड, मणिपुर या त्रिपुरा से आते हैं, लेकिन हम भारत के अभिन्न हिस्से हैं।

घटना के अनुसार, अंजेल और उनके भाई सेलाकुई मार्केट में थे जब कुछ लोगों से उनका विवाद हुआ। विवाद के दौरान कथित तौर पर नस्लीय टिप्पणियां की गईं, जिनमें चीनी, चिंकी या मोमो जैसे शब्द शामिल थे। अंजेल ने इन टिप्पणियों का विरोध किया और कहा कि वे भारतीय हैं, जिसके बाद हमला हुआ। पुलिस ने मामले में हत्या और संयुक्त दायित्व की धाराएं जोड़ीं और छह आरोपियों में से पांच को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी फरार है। पुलिस जांच जारी है और विशेष जांच दल गठित किया गया है। इस घटना ने पूर्वोत्तर के छात्रों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि देहरादून में बड़ी संख्या में पूर्वोत्तर के छात्र पढ़ाई करते हैं। अंजेल की मौत के बाद त्रिपुरा और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में शोक और आक्रोश का माहौल है। छात्र संगठनों ने न्याय की मांग की है और पूर्वोत्तर के लोगों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए उपायों की जरूरत बताई है। मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने अपने बयान में यह भी कहा कि ऐसे लोगों को पूर्वोत्तर लाकर दिखाना चाहिए कि यहां के लोग कितने मेहमाननवाज और अच्छे हैं, ताकि वे समझ सकें कि हम चीनी या अन्य नहीं, बल्कि भारतीय हैं।

घटना की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने देहरादून के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है और मामले की रिपोर्ट मांगी है। पुलिस ने कहा है कि जांच में अब तक नस्लीय कोण के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन जांच सभी पहलुओं से की जा रही है। अंजेल के परिवार ने न्याय की मांग की है और कहा कि पूर्वोत्तर के लोग भी भारतीय हैं और उनके साथ समान व्यवहार होना चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर पूर्वोत्तर के लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर किया है, जहां शब्दों और व्यवहार से भावनाएं आहत होती हैं। मंत्री के बयान ने इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया कि पूर्वोत्तर राज्य भारत का अभिन्न हिस्सा हैं और उनकी संस्कृति, भाषा तथा परंपराएं देश को समृद्ध बनाती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे घटनाएं अज्ञानता और पूर्वाग्रह को दर्शाती हैं। अंजेल चकमा की मौत एक दुखद घटना है, जो यह याद दिलाती है कि शब्दों का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि वे गहरी चोट पहुंचा सकते हैं। पूर्वोत्तर के लोग देश के अन्य हिस्सों में पढ़ाई या काम के लिए जाते हैं और उन्हें सुरक्षित महसूस करना चाहिए। इस घटना से जुड़े तथ्य यह हैं कि अंजेल एक मेहनती छात्र थे और उनके भाई के साथ मार्केट में सामान्य काम से थे जब विवाद हुआ। हमले के बाद अंजेल को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक इलाज चला। उनकी मौत के बाद शव त्रिपुरा लाया गया, जहां अंतिम संस्कार हुआ। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी की है और जांच आगे बढ़ रही है। मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग का बयान इस घटना पर एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया है, जिसमें उन्होंने पूर्वोत्तर की एकता और भारत से जुड़ाव पर जोर दिया।

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