मोदी-पुतिन शिखर सम्मेलन- भारत-रूस के बीच हुए कई अहम समझौते, व्यापार को 100 अरब डॉलर का लक्ष्य, रक्षा-ऊर्जा सहयोग में नई ऊंचाई की कही बात, देखें पूरी रिपोर्ट।
भारत और रूस के बीच 5 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण समझौते हुए, जो दोनों देशों
भारत और रूस के बीच 5 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण समझौते हुए, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद 16 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का कार्यक्रम शामिल है। शिखर सम्मेलन हैदराबाद हाउस में आयोजित हुआ, जहां दोनों नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों के बीच संबंधों की मजबूती पर जोर दिया। संयुक्त बयान में कहा गया कि वर्तमान जटिल भू-राजनीतिक स्थिति में भारत-रूस संबंध बाहरी दबावों से अटल बने रहेंगे। समझौतों में रक्षा तकनीक के संयुक्त विकास, ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता, स्वास्थ्य, प्रवासन और जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्र शामिल हैं। पुतिन ने भारत को ईंधन आपूर्ति में बाधा न आने का आश्वासन दिया, जबकि मोदी ने यूक्रेन संघर्ष को संवाद से समाप्त करने का संदेश दिया।
शिखर सम्मेलन की शुरुआत 4 दिसंबर को पलम एयर फोर्स स्टेशन पर पुतिन के आगमन से हुई, जहां मोदी ने उनका स्वागत किया। अगले दिन राष्ट्रपति भवन में औपचारिक समारोह के बाद राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। वार्ता में दोनों पक्षों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा। कार्यक्रम 2030 के तहत राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने और डिजिटल भुगतान प्रणालियों को मजबूत करने पर सहमति बनी। यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर काम तेज करने का निर्णय लिया गया। निवेश संवर्धन और संरक्षण के लिए पारस्परिक लाभकारी समझौते पर अधिकारियों को निर्देश दिए गए। रास्ट्रिया केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स, नेशनल फर्टिलाइजर्स और इंडियन पोटाश ने रूसी कंपनी जेएससी यूरालकेम के साथ उर्वरक क्षेत्र में प्रमुख समझौता किया। ये कदम वैश्विक प्रतिबंधों के बीच ऊर्जा और व्यापार सहयोग को सुनिश्चित करेंगे।
रक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने पर विशेष ध्यान दिया गया। दोनों देशों ने संयुक्त अनुसंधान, विकास और उत्पादन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया, जो भारत की मेक इन इंडिया पहल से जुड़ा है। इंद्र संयुक्त सैन्य अभ्यास को जारी रखने और रक्षा प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान पर सहमति बनी। उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के संयुक्त निर्माण पर काम तेज होगा। ऊर्जा क्षेत्र में रूस ने भारत को तेल और गैस की लंबी अवधि की आपूर्ति का आश्वासन दिया। परमाणु ऊर्जा में तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई। उर्वरक आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए नए संयुक्त उद्यमों पर विचार किया गया। ये समझौते वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेंगे। पुतिन ने कहा कि रूस भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए ईंधन आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आने देगा।
स्वास्थ्य और प्रवासन क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। एक समझौते के तहत दोनों देशों के नागरिकों के अस्थायी श्रम गतिविधियों को विनियमित किया जाएगा, जो कुशल भारतीय श्रमिकों के रूस प्रवास को आसान बनाएगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नई पहल शुरू की गई। जलवायु कार्रवाई और कम कार्बन विकास पर संयुक्त प्रयासों पर सहमति बनी, जिसमें पेरिस समझौते के तहत तंत्रों का उपयोग शामिल है। ब्रिक्स जलवायु पहलों में समन्वय बढ़ेगा। बंदरगाह, शिपिंग और समुद्री सहयोग पर एक समझौता हस्ताक्षरित हुआ, जो समुद्री कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। अकादमिक और मीडिया सहयोग को बढ़ाने के लिए नए समझौते हुए। दिल्ली विश्वविद्यालय ने रूस की नेशनल रिसर्च यूनिवर्सिटी हायर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के साथ सहयोग समझौता किया, जिसके तहत स्पेस मिरर लैब स्थापित होगी। ये कदम लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाएंगे।
आतंकवाद और सुरक्षा पर दोनों नेताओं ने कड़ा रुख अपनाया। संयुक्त बयान में कहा गया कि आतंकवाद मानवता पर सीधा हमला है, और इसके खिलाफ शून्य सहिष्णुता नीति अपनाई जाएगी। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम और मॉस्को के क्रोकस सिटी हॉल में हुए हमलों की निंदा की गई। सीमा-पार आतंकवाद, उग्रवाद, संगठित अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण के खिलाफ सहयोग बढ़ेगा। उभरती प्रौद्योगिकियों और यूएवी खतरों पर ध्यान केंद्रित किया गया। बहुपक्षीय मंचों जैसे संयुक्त राष्ट्र, जी20, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन में समन्वित कार्रवाई पर सहमति बनी। रूस ने भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता करेगा। ये कदम वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धता दर्शाते हैं।
शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-रूस बिजनेस फोरम भी आयोजित हुआ, जिसमें रूसी प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। मोदी ने कहा कि भारत सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन की नीति से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। फोरम में व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी पर चर्चा हुई। रूस ने इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस में फ्रेमवर्क समझौते को अपनाने का निर्णय लिया। सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए रूसी नागरिकों के लिए 30 दिनों का मुफ्त ई-टूरिस्ट वीजा और 30 दिनों का ग्रुप टूरिस्ट वीजा शुरू करने की घोषणा की गई। मोदी ने पुतिन को भारतीय शिल्पकला के उपहार भेंट किए, जिनमें असम की फाइन ब्लैक टी, मुर्शिदाबाद का चांदी का चाय सेट, महाराष्ट्र का हस्तनिर्मित चांदी का घोड़ा, आगरा का संगमरमर का शतरंज सेट, कश्मीरी केसर और रूसी भाषा में अनुवादित श्रीमद्भगवद्गीता शामिल थे।
रक्षा मंत्रियों की बैठक में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने आपसी विश्वास पर आधारित साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुरmu ने पुतिन से मुलाकात की, जहां राज्य भोज आयोजित किया गया। मुरmu ने भाषण में भारत-रूस मित्रता की मजबूती का उल्लेख किया। शिखर सम्मेलन के बाद पुतिन ने दिल्ली से प्रस्थान किया, जहां मोदी ने उनकी विदाई ली। संयुक्त प्रेस वक्तव्य में मोदी ने कहा कि पुतिन के नेतृत्व और दूरदृष्टि ने संबंधों को नई ऊंचाई दी है। पुतिन ने भारत की स्वतंत्र और संप्रभु नीति की प्रशंसा की। यह सम्मेलन 2021 के बाद पुतिन की पहली भारत यात्रा थी, जो यूक्रेन संघर्ष के बाद महत्वपूर्ण साबित हुई।
समझौतों का प्रभाव द्विपक्षीय संबंधों पर सकारात्मक पड़ेगा। व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ेगा। रक्षा सहयोग से भारत की आत्मनिर्भरता मजबूत होगी। ऊर्जा समझौते से आपूर्ति श्रृंखला स्थिर रहेगी। स्वास्थ्य और प्रवासन समझौते से लोगों का आवागमन आसान होगा। जलवायु कार्रवाई में संयुक्त प्रयास वैश्विक लक्ष्यों को पूरा करेंगे। बहुपक्षीय सहयोग से दोनों देशों की वैश्विक भूमिका मजबूत होगी। शिखर सम्मेलन ने संबंधों को नई दिशा दी, जो 2030 तक साझा भविष्य का आधार बनेगा। पुतिन ने मोदी को 2026 में रूस यात्रा के लिए आमंत्रित किया।
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