ट्रंप की टैरिफ धमकी से भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांचवें दिन गिरावट, निवेशकों की 13 लाख करोड़ की संपत्ति गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर संभावित सख्त टैरिफ नीति की धमकी तथा वैश्विक तनाव के कारण भारतीय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर संभावित सख्त टैरिफ नीति की धमकी तथा वैश्विक तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें कारोबारी दिन दबाव में रहा। पूरे सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में करीब 2200 अंकों की गिरावट आई जबकि निफ्टी में 2.5 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई। इस तेज गिरावट के चलते निवेशकों की लगभग 13 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई तथा बाजार पूंजीकरण में भारी कमी आई।
सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार में भारी बिकवाली देखी गई जिसमें सेंसेक्स 600 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ तथा निफ्टी भी लाल निशान में रहा। बैंकिंग, मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों में स्पष्ट दबाव दिखा जिससे छोटे निवेशकों में चिंता बढ़ गई। विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक बिकवाली हुई तथा बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा।
इस गिरावट के प्रमुख कारणों में रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 500 प्रतिशत तक टैरिफ की संभावना शामिल है जो भारत जैसे देशों को प्रभावित कर सकती है। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें तथा वैश्विक बाजारों में कमजोरी ने मिलकर दबाव बढ़ाया। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी तथा भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया।
ट्रंप प्रशासन द्वारा समर्थित विधेयक के तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की तैयारी है जो भारत की निर्यात को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका द्वारा पहले से ही भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जा चुके हैं तथा अब और बढ़ोतरी की आशंका से बाजार प्रभावित हुआ। विदेशी फंडों द्वारा निकासी तथा वैश्विक अनिश्चितता ने स्थिति को और जटिल बनाया। बाजार में यह गिरावट कई सत्रों से जारी है तथा सप्ताह भर में लगातार नुकसान दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह दबाव अमेरिकी टैरिफ नीति की अनिश्चितता, एफआईआई बिकवाली तथा तेल कीमतों से जुड़ा है। बैंकिंग तथा अन्य प्रमुख क्षेत्रों में कमजोरी साफ नजर आई। मौजूदा परिस्थितियों में निवेशक सतर्क बने हुए हैं तथा बाजार में उच्च अस्थिरता बनी हुई है। आने वाले दिनों में वैश्विक फैसलों, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले तथा कच्चे तेल की कीमतों की दिशा से बाजार की चाल तय होने की संभावना है।
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