बांग्लादेश में कार्यकर्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद मीडिया संस्थानों पर हमले, फंसे पत्रकार ने कहा- 'आप मुझे मार रहे हैं'। 

बांग्लादेश में प्रमुख छात्र नेता और इंकिलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत की खबर फैलते ही देशभर में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए

Dec 19, 2025 - 15:20
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बांग्लादेश में कार्यकर्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद मीडिया संस्थानों पर हमले, फंसे पत्रकार ने कहा- 'आप मुझे मार रहे हैं'। 
बांग्लादेश में कार्यकर्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद मीडिया संस्थानों पर हमले, फंसे पत्रकार ने कहा- 'आप मुझे मार रहे हैं'। 

बांग्लादेश में प्रमुख छात्र नेता और इंकिलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत की खबर फैलते ही देशभर में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए। 32 वर्षीय हादी की मौत 18 दिसंबर 2025 को सिंगापुर के एक अस्पताल में हुई, जहां वे 12 दिसंबर को ढाका में गोली लगने के बाद इलाज करा रहे थे। हमले में हादी के सिर में गोली लगी थी और उनकी हालत गंभीर होने पर उन्हें 15 दिसंबर को सिंगापुर ले जाया गया था। सिंगापुर के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद हादी की मौत हो गई। हादी की मौत की सूचना मिलते ही ढाका सहित कई शहरों में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने हमलावरों की गिरफ्तारी और न्याय की मांग की। ढाका के शाहबाग चौराहे पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और नारेबाजी की। हिंसा देर रात तक जारी रही, जिसमें ढाका के प्रमुख मीडिया कार्यालयों को निशाना बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने दो बड़े मीडिया संस्थानों के भवनों में आग लगा दी और तोड़फोड़ की, जिससे कई पत्रकार और कर्मचारी इमारतों के अंदर फंस गए। आगजनी की घटनाएं करवान बाजार क्षेत्र में हुईं, जहां धुआं और आग की लपटें उठती देखी गईं। एक फंसे हुए पत्रकार ने इमारत के अंदर से संदेश भेजा, जिसमें कहा कि "मैं अब सांस नहीं ले पा रहा हूं, आप मुझे मार रहे हैं"। यह संदेश मीडिया कार्यालय में आग लगने के दौरान भेजा गया, जब पत्रकार छत पर शरण लेने को मजबूर हुए। दमकलकर्मियों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद कम से कम 25 पत्रकारों को एक मीडिया भवन से सुरक्षित निकाला। दूसरे भवन में भी पत्रकार और कर्मचारी फंस गए थे, जहां तोड़फोड़ और आगजनी हुई। प्रदर्शनकारियों ने भवनों के सामने आग लगाई और अंदर तोड़फोड़ की।

हिंसा ढाका तक सीमित नहीं रही बल्कि चटगांव, राजशाही और अन्य शहरों में भी फैल गई। चटगांव में पत्थरबाजी हुई और कुछ जगहों पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। ढाका में एक सांस्कृतिक संस्थान पर भी हमला हुआ। प्रदर्शनकारियों ने सड़कें ब्लॉक कीं और यातायात बाधित किया। पुलिस और पैरामिलिट्री बलों को तैनात किया गया ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। सुबह तक सड़कें शांत रहीं, लेकिन जुमे की नमाज के बाद फिर हिंसा की आशंका जताई गई।

हादी 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता थे, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री की सरकार को सत्ता से हटा दिया था। वे इंकिलाब मंच के वरिष्ठ नेता थे और फरवरी 2026 में होने वाले संसदीय चुनावों में ढाका-8 सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। हमला 12 दिसंबर को ढाका के पुराना पल्टन क्षेत्र में हुआ था, जब हादी रिक्शा पर जा रहे थे और मोटरसाइकिल सवार नकाबपोश हमलावरों ने उन पर गोली चलाई। हमले के बाद पुलिस ने मुख्य संदिग्धों की तस्वीरें जारी कीं और जानकारी देने वाले को 50 लाख टका इनाम की घोषणा की। कुछ संदिग्धों के परिवार के सदस्यों को हिरासत में लिया गया है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने हादी की मौत पर राष्ट्र को संबोधित किया और इसे राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने 20 दिसंबर को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया, जिसमें सभी सरकारी और निजी भवनों पर झंडा आधा झुका रहेगा। विदेशों में बांग्लादेश मिशनों पर भी यही लागू होगा। जुमे की नमाज के बाद विशेष प्रार्थनाएं आयोजित करने के निर्देश दिए गए। यूनुस ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि हिंसा से लोकतंत्र की प्रगति नहीं रुकेगी। सरकार ने हादी के परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी लेने की घोषणा की।

हादी की मौत के बाद प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर पूर्व शासक दल से जुड़ी संपत्तियों को निशाना बनाया। ढाका में धानमोंडी क्षेत्र में एक ऐतिहासिक आवास पर हमला हुआ, जहां तोड़फोड़ और आगजनी की गई। अन्य शहरों में भी इसी तरह की घटनाएं हुईं। इंकिलाब मंच ने अपने बयान में लोगों से हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी से बचने की अपील की और कहा कि ऐसे कृत्य देश को अस्थिर करने की साजिश का हिस्सा हो सकते हैं। मंच ने शाहबाग में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया। पुलिस ने हमले की जांच तेज कर दी है और कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। मुख्य संदिग्ध की तलाश जारी है। हादी की मौत से चुनावी माहौल पर असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि वे युवाओं के बीच लोकप्रिय थे। अंतरिम सरकार ने चुनावी हिंसा को बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी है। सिंगापुर सरकार बांग्लादेश उच्चायोग की मदद से हादी के शव को वापस लाने की व्यवस्था कर रही है। मीडिया संस्थानों पर हमले के दौरान एक वरिष्ठ संपादक को भी प्रदर्शनकारियों ने परेशान किया, जिसमें उन्हें भीड़ में धक्का दिया गया और अपशब्द कहे गए। यह घटना मीडिया भवनों के बाहर हुई। हिंसा की इन घटनाओं ने प्रेस की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। दमकल विभाग ने आग पर काबू पाया और फंसे कर्मचारियों को बचाया। कई मीडिया भवनों को भारी नुकसान हुआ, जिससे संचालन प्रभावित रहा।

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