सिडनी के बॉन्डी बीच पर हनुक्का उत्सव के दौरान पिता-पुत्र ने छह लाइसेंसी हथियारों से किया आतंकी हमला, 15 लोगों की मौत।
सिडनी के प्रसिद्ध बॉन्डी बीच पर 14 दिसंबर 2025 की शाम को एक आतंकी हमला हुआ जिसमें कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और 40 से अधिक
सिडनी के प्रसिद्ध बॉन्डी बीच पर 14 दिसंबर 2025 की शाम को एक आतंकी हमला हुआ जिसमें कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और 40 से अधिक लोग घायल हो गए। यह हमला हनुक्का उत्सव के पहले दिन चाबाड ऑफ बॉन्डी द्वारा आयोजित चानुका बाय द सी कार्यक्रम के दौरान हुआ। कार्यक्रम आर्चर पार्क के प्लेग्राउंड क्षेत्र में चल रहा था जहां लगभग 1000 लोग जुटे थे। हमलावर दो थे, एक 50 वर्षीय पिता साजिद अक्रम और उनका 24 वर्षीय पुत्र नवेद अक्रम। साजिद अक्रम के पास रिक्रिएशनल हंटिंग लाइसेंस था जिसके तहत उनके नाम पर छह लंबी दूरी की बंदूकें रजिस्टर्ड थीं और इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल हमले में किया गया। साजिद अक्रम एक फल विक्रेता थे जबकि उनके पुत्र नवेद बेरोजगार ब्रिकलेयर थे।
हमला शाम लगभग 6:47 बजे शुरू हुआ जब दोनों हमलावरों ने पास के पैदल पुल से भीड़ पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। गोलीबारी की आवाज सुनकर लोग इधर-उधर भागने लगे और अफरा-तफरी मच गई। कई लोग घायल होकर गिर पड़े जबकि कुछ पार्क से बाहर निकलने की कोशिश में फंस गए। मरने वालों में एक 10 वर्षीय बच्ची भी शामिल थी और पीड़ितों की उम्र 10 से 87 वर्ष तक थी। घायलों में तीन बच्चे और दो पुलिस अधिकारी भी थे जो गोलियों का जवाब दे रहे थे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जवाबी कार्रवाई की जिसमें साजिद अक्रम मारा गया जबकि नवेद गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल में पुलिस हिरासत में है। पुलिस ने घटना को आतंकी हमला घोषित किया क्योंकि यह हनुक्का उत्सव के दौरान यहूदी समुदाय को निशाना बनाकर किया गया। मौके से दो सक्रिय विस्फोटक उपकरण बरामद किए गए जिन्हें सुरक्षित किया गया। बाद में एक तीसरा उपकरण भी मिला। हमलावरों की कार से भी हथियार और सामग्री जब्त की गई। हमलावर बॉनीरिग क्षेत्र में रहते थे और हमले से पहले परिवार को मछली पकड़ने जाने की बात कहकर निकले थे। उनके घर पर छापेमारी की गई। नवेद अक्रम का नाम पहले 2019 में इस्लामिक स्टेट से जुड़े एक मामले में जांच के दायरे में आया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
घटना के दौरान एक स्थानीय व्यक्ति ने एक हमलावर से हथियार छीन लिया जिससे कई जानें बच गईं। वह व्यक्ति गोली लगने से घायल हुआ लेकिन अस्पताल में स्थिर है। पुलिस ने मौके पर छह हथियार बरामद किए जो साजिद अक्रम के लाइसेंस से जुड़े थे। यह हमला 1996 के पोर्ट आर्थर नरसंहार के बाद ऑस्ट्रेलिया का सबसे घातक सामूहिक गोलीबारी का मामला है। घटना के बाद बंदूक कानूनों पर बहस छिड़ गई क्योंकि लाइसेंस प्राप्त हथियारों का दुरुपयोग हुआ। हनुक्का उत्सव में लोग मेंोरा जलाने और उत्सव मनाने आए थे लेकिन गोलीबारी से सब कुछ तहस-नहस हो गया। कई पीड़ितों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया जहां कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। घटना ने यहूदी समुदाय को लक्षित करने के कारण एंटीसेमिटिक हमले की श्रेणी में रखा गया। पुलिस जांच जारी है और हमलावरों की तैयारी तथा अन्य संभावित सहयोगियों की पड़ताल की जा रही है। हमले में मारे गए लोगों में विभिन्न उम्र के व्यक्ति शामिल थे और कई परिवार प्रभावित हुए। एक 10 वर्षीय लड़की की मौत ने सभी को झकझोर दिया। घायलों का इलाज कई अस्पतालों में चल रहा है जहां कुछ की स्थिति नाजुक है। पुलिस ने क्षेत्र को सील कर दिया और जांच टीम मौके पर काम कर रही है। विस्फोटक उपकरणों की मौजूदगी से हमले की गंभीरता का पता चलता है।
साजिद अक्रम के पास दस वर्ष पुराना लाइसेंस था और वे गन क्लब के सदस्य थे। उनके नाम पर रजिस्टर्ड छह बंदूकें हमले में इस्तेमाल हुईं। नवेद अक्रम अस्पताल में है और उन पर आरोप लगने की संभावना है। घटना ने ऑस्ट्रेलिया में बंदूक नियंत्रण कानूनों की फिर से समीक्षा की मांग को बल दिया। हमलावरों ने हमले से पहले कैम्पसी में किराए का मकान लिया था जहां से तैयारी की गई लगती है। यह हमला बॉन्डी बीच जैसे लोकप्रिय स्थान पर हुआ जहां आमतौर पर पर्यटक और स्थानीय लोग आते हैं। हनुक्का का पहला दिन होने से यहूदी समुदाय बड़ी संख्या में जुटा था। गोलीबारी दस मिनट तक चली और दर्जनों राउंड फायर किए गए। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से स्थिति नियंत्रित हुई। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हमलावर पिता-पुत्र की जोड़ी थी जो एक ही घर में रहते थे। साजिद फल बेचने का काम करते थे जबकि नवेद बेरोजगार था। हमले की योजना पहले से थी और वे मछली पकड़ने का बहाना बनाकर निकले। पुलिस ने उनके घर और अन्य स्थानों पर तलाशी ली। विस्फोटक उपकरण सक्रिय थे जिन्हें विशेष टीम ने निष्क्रिय किया।
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