भारत की 50 मिलियन डॉलर की मदद पर ‘अजीज’ मुस्लिम देश का बरस रहा प्यार, शहबाज शरीफ की बेचैनी बढ़ी!

भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के तनाव और सीजफायर समझौते के बाद एक नया कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। भारत ने एक ‘अजीज’ मुस्लिम देश....

May 13, 2025 - 14:23
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भारत की 50 मिलियन डॉलर की मदद पर ‘अजीज’ मुस्लिम देश का बरस रहा प्यार, शहबाज शरीफ की बेचैनी बढ़ी!

भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के तनाव और सीजफायर समझौते के बाद एक नया कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। भारत ने एक ‘अजीज’ मुस्लिम देश, जिसे सूत्रों ने मालदीव के रूप में पहचाना है, को 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 423 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता प्रदान की है। यह मदद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के माध्यम से ट्रेजरी बिल्स जारी करके दी गई है। इस सहायता ने न केवल मालदीव में भारत की साख को और मजबूत किया है, बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर दी है। मालदीव के नेताओं और नागरिकों ने भारत की इस दरियादिली की जमकर तारीफ की है, जिससे पाकिस्तान की क्षेत्रीय कूटनीति पर सवाल उठने लगे हैं।

  • मालदीव की तारीफ और भारत का बढ़ता प्रभाव:

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत की इस वित्तीय सहायता को “मालदीव के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम” करार दिया। उन्होंने X पर एक पोस्ट में लिखा, “भारत का यह सहयोग मालदीव के लिए आर्थिक स्थिरता और बुनियादी ढांचे के विकास में गेम-चेंजर साबित होगा। हम अपने मित्र राष्ट्र भारत के आभारी हैं।” मालदीव के विदेश मंत्रालय ने भी एक आधिकारिक बयान में कहा कि यह मदद पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं, और जलवायु परिवर्तन से निपटने जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए इस्तेमाल की जाएगी। सोशल मीडिया पर मालदीव के नागरिकों ने भारत की इस मदद को “सच्ची दोस्ती” का प्रतीक बताया। एक X यूजर ने लिखा, “भारत ने हमेशा मुश्किल वक्त में मालदीव का साथ दिया है। यह 50 मिलियन डॉलर की मदद हमारी अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी।

ThankYouIndia”। यह सहायता ऐसे समय में आई है, जब मालदीव हाल ही में आर्थिक चुनौतियों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से जूझ रहा है।

  • शहबाज शरीफ की बेचैनी:

पाकिस्तान, जो लंबे समय से मालदीव जैसे छोटे मुस्लिम देशों में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, के लिए भारत की यह कूटनीतिक जीत एक झटके की तरह है। शहबाज शरीफ, जो पहले ही भारत के साथ तनाव और अपनी घरेलू आलोचनाओं से घिरे हैं, के लिए यह खबर और भी परेशानी बढ़ाने वाली है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने मालदीव को आर्थिक और सैन्य सहायता की पेशकश की थी, लेकिन भारत की इस बड़ी मदद ने पाकिस्तान की कोशिशों पर पानी फेर दिया।पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। डॉन अखबार ने एक लेख में लिखा, “भारत की यह मदद मालदीव में उसकी बढ़ती पैठ को दर्शाती है, जो पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय है।” X पर एक पाकिस्तानी यूजर ने लिखा, “शहबाज शरीफ को अब समझ आ रहा होगा कि भारत कैसे कूटनीति खेलता है। मालदीव में हमारी बात कोई क्यों सुनेगा?”

  • पृष्ठभूमि और कूटनीतिक महत्व:

यह सहायता भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और दक्षिण एशिया में अपनी सॉफ्ट पावर को बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। मालदीव, जो रणनीतिक रूप से हिंद महासागर में स्थित है, भारत और चीन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। हाल के वर्षों में, मालदीव ने भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत किया है, खासकर 2018 के बाद, जब मुइज्जू की सरकार ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। भारत ने पहले भी मालदीव को कोविड-19 वैक्सीन, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, और रक्षा सहायता प्रदान की है।इसके विपरीत, पाकिस्तान का मालदीव के साथ संबंध सीमित रहा है, और उसकी आर्थिक स्थिति उसे बड़ी सहायता देने से रोकती है। 2023 में, पाकिस्तान ने मालदीव को 5 मिलियन डॉलर की सहायता की पेशकश की थी, लेकिन यह राशि भारत की मौजूदा मदद के मुकाबले नगण्य है। इसके अलावा, पाकिस्तान की छवि, खासकर आतंकवाद को लेकर, उसके क्षेत्रीय प्रभाव को कमजोर करती है।

  • चीन का रुख और क्षेत्रीय समीकरण:

चीन, जो मालदीव में अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत बड़े निवेश कर चुका है, भी भारत की इस मदद से असहज हो सकता है। ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में दावा किया कि भारत की यह सहायता “क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश” है। हालांकि, मालदीव ने स्पष्ट किया है कि वह भारत और चीन दोनों के साथ संतुलित संबंध रखना चाहता है।भारत के विदेश मंत्रालय ने इस सहायता को “मालदीव के लोगों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता” बताया और कहा कि यह दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगा। विदेश सचिव विक्रम मिसरी, जो हाल ही में पाकिस्तान के साथ सीजफायर समझौते को लेकर चर्चा में थे, ने इस सहायता की घोषणा के दौरान कहा, “भारत अपने मित्र देशों के साथ खड़ा है, और हमारा सहयोग पारदर्शी और बिना शर्त है।”

  • शहबाज शरीफ की चुनौतियां:

शहबाज शरीफ पहले ही भारत के ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर समझौते के बाद अपनी आलोचना से जूझ रहे हैं। पाकिस्तानी नागरिकों ने उनकी धीमी प्रतिक्रिया और “कमजोर” भाषण शैली की आलोचना की थी। अब मालदीव में भारत की इस कूटनीतिक जीत ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। मनीकंट्रोल के अनुसार, शहबाज की “ब्लड रिवेंज” की धमकी को उनके अपने नागरिकों ने “खोखला” करार दिया था।पाकिस्तान के विश्लेषकों का मानना है कि शहबाज की सरकार को अब अपनी कूटनीति को और सक्रिय करना होगा, खासकर उन देशों में जो पारंपरिक रूप से उसके सहयोगी रहे हैं। हालांकि, आर्थिक संकट और IMF पर निर्भरता के चलते पाकिस्तान की क्षमता सीमित है।

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  • सोशल मीडिया पर चर्चा:

X पर इस खबर ने खूब सुर्खियां बटोरीं। एक भारतीय यूजर ने लिखा, “मोदी जी ने फिर दिखा दिया कि भारत की ताकत केवल हथियारों में नहीं, कूटनीति में भी है। मालदीव में 423 करोड़ की मदद ने पाकिस्तान को बैकफुट पर ला दिया। #IndiaFirst”। एक अन्य यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, “शहबाज शरीफ को मिर्ची लगी होगी, क्योंकि मालदीव अब भारत की तारीफ में कसीदे पढ़ रहा है।”

भारत की 50 मिलियन डॉलर की सहायता ने मालदीव में उसकी स्थिति को और मजबूत किया है, साथ ही पाकिस्तान और उसके सहयोगी चीन के लिए एक कूटनीतिक चुनौती पेश की है। यह कदम दक्षिण एशिया में भारत की सॉफ्ट पावर और रणनीतिक प्रभाव को रेखांकित करता है। शहबाज शरीफ के लिए यह न केवल एक कूटनीतिक हार है, बल्कि उनकी सरकार की क्षेत्रीय विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान इस स्थिति का जवाब कैसे देता है।

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