भदोही में दहेज की भेंट चढ़ी दो मासूम जिंदगियां: 10 लाख की मांग पूरी न होने पर पति ने गर्भवती पत्नी के पेट पर मारी लात, दोनों जुड़वा बच्चों की मौत।

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। जिले के गोपीगंज थाना क्षेत्र में दहेज की लालच में एक व्यक्ति ने अपनी ही गर्भवती पत्नी के साथ क्रूरता की सारी हदें

Apr 12, 2026 - 14:48
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भदोही में दहेज की भेंट चढ़ी दो मासूम जिंदगियां: 10 लाख की मांग पूरी न होने पर पति ने गर्भवती पत्नी के पेट पर मारी लात, दोनों जुड़वा बच्चों की मौत।
भदोही में दहेज की भेंट चढ़ी दो मासूम जिंदगियां: 10 लाख की मांग पूरी न होने पर पति ने गर्भवती पत्नी के पेट पर मारी लात, दोनों जुड़वा बच्चों की मौत।

  • दहेज लोभियों की हैवानियत ने शर्मसार की मानवता: उत्तर प्रदेश के भदोही में गर्भवती महिला पर जानलेवा हमला, पति, सास और जेठ समेत 7 पर केस दर्ज।
  • जनसुनवाई में पहुंची पीड़ित महिला की करुण पुकार: भदोही पुलिस ने शुरू की कड़ी कार्रवाई, दो गर्भस्थ शिशुओं की हत्या के आरोपी ससुराल पक्ष की तलाश तेज।

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। जिले के गोपीगंज थाना क्षेत्र में दहेज की लालच में एक व्यक्ति ने अपनी ही गर्भवती पत्नी के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। आरोप है कि 10 लाख रुपये की अतिरिक्त दहेज की मांग पूरी न होने से नाराज पति ने अपनी 29 वर्षीय पत्नी आराधना शुक्ला के पेट पर बेरहमी से दो बार लात मार दी। इस हिंसक हमले का परिणाम इतना भयावह रहा कि महिला के गर्भ में पल रहे दो जुड़वा शिशुओं की कोख में ही मृत्यु हो गई। यह घटना केवल एक महिला पर शारीरिक हमला नहीं है, बल्कि उन दो अजन्मे बच्चों की हत्या है जिन्होंने अभी दुनिया में कदम भी नहीं रखा था। इस मामले के सामने आने के बाद पूरे जनपद में आक्रोश व्याप्त है और लोग दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

पीड़ित महिला आराधना शुक्ला ने न्याय की गुहार लगाते हुए शनिवार को आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी आपबीती सुनाई। आराधना ने बताया कि उसकी शादी अभिनेष शुक्ला के साथ हुई थी, लेकिन विवाह के कुछ समय बाद से ही उसे और अधिक दहेज लाने के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। ससुराल पक्ष द्वारा लगातार 10 लाख रुपये नकद की मांग की जा रही थी। जब आराधना के मायके पक्ष ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो ससुराल वालों का व्यवहार और भी हिंसक हो गया। आराधना उस समय गर्भवती थी और उसे विशेष देखभाल की जरूरत थी, लेकिन उसके अपनों ने ही उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इस प्रताड़ना का चरम तब देखने को मिला जब उसके पति ने आवेश में आकर उसके पेट को निशाना बनाया, जिससे उसे असहनीय दर्द हुआ और बाद में चिकित्सीय परीक्षण में बच्चों की मौत की पुष्टि हुई।

भदोही पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आराधना की लिखित शिकायत के आधार पर गोपीगंज पुलिस ने शनिवार को ही मामला पंजीकृत कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में महिला के पति अभिनेष शुक्ला, उसकी सास गीता देवी और जेठ प्रदीप शुक्ला सहित कुल सात लोगों को नामजद किया है। इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर दी गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के दायरे में रहकर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

क्रूरता का विवरण: पीड़ित महिला ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि हमला इतना जबरदस्त था कि वह मौके पर ही बेहोश हो गई थी। जब उसे अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड के बाद बताया कि पेट पर भारी चोट लगने के कारण गर्भस्थ शिशुओं की धड़कन रुक गई है। यह रिपोर्ट पुलिस जांच में एक महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में शामिल की गई है।

दहेज प्रथा के इस भयानक रूप ने समाज के उस कुरूप चेहरे को एक बार फिर सामने ला दिया है, जहाँ आज भी महिलाओं को केवल धन उगाही का जरिया समझा जाता है। भदोही जैसी जगहों पर जहाँ विकास के दावे किए जाते हैं, वहां इस तरह की मध्ययुगीन बर्बरता यह सोचने पर मजबूर करती है कि शिक्षा और जागरूकता का प्रसार अभी भी कितना अधूरा है। आराधना शुक्ला के साथ हुई यह घटना अन्य महिलाओं के लिए भी एक सबक है कि वे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाएं। पुलिस का जनसुनवाई कार्यक्रम यहाँ एक प्रभावी माध्यम साबित हुआ, जहाँ पीड़ित महिला सीधे उच्चाधिकारियों तक अपनी बात पहुंचा सकी। अब प्रशासन की चुनौती यह है कि वे इस मामले में त्वरित न्याय दिलाकर समाज में एक कड़ा संदेश भेजें।

अस्पताल में भर्ती आराधना की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन वह गहरे मानसिक सदमे में है। चिकित्सीय दल उसकी सेहत पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि दो बच्चों के गर्भ में ही खत्म हो जाने के बाद महिला के शरीर में संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। इस बीच, मायके पक्ष के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी सामर्थ्य के अनुसार शादी में काफी खर्च किया था, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि अभिनेष और उसका परिवार इतना लालची और हिंसक निकलेगा। मायके वालों ने आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाने की मांग की है, क्योंकि यह केवल मारपीट का मामला नहीं बल्कि दो मासूमों की जान लेने का कृत्य है।

पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि आराधना को पहले भी कई बार घर से बाहर निकालने की धमकी दी गई थी। सास और जेठ पर आरोप है कि वे न केवल दहेज की मांग का समर्थन करते थे, बल्कि अभिनेष को आराधना पर हाथ उठाने के लिए उकसाते भी थे। पुलिस अब परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस साजिश में और कौन-कौन शामिल था। आसपास के पड़ोसियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना के समय की परिस्थितियों का स्पष्ट विवरण मिल सके। पुलिस अधीक्षक ने भरोसा दिलाया है कि वे इस केस को फास्ट ट्रैक मोड में ले जाएंगे ताकि पीड़ित महिला को जल्द से जल्द इंसाफ मिल सके।

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