गांधी जयंती पर पीएम मोदी की आरएसएस शताब्दी को बधाई और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में नागपुर में की थी। यह संगठन हिंदू समाज को संगठित करने और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने के उद्देश्य से शुरू हुआ। आजादी की लड़ाई में आ
दो अक्टूबर 2025 को भारत गांधी जयंती मना रहा है। यह दिन न केवल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्म जयंती है, बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की भी। इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर स्वयंसेवकों को बधाई दी। आरएसएस की स्थापना 27 सितंबर 1925 को विजयादशमी के दिन हुई थी, लेकिन शताब्दी समारोह एक अक्टूबर को आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री ने दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने आरएसएस की राष्ट्र निर्माण में भूमिका की सराहना की और विशेष स्मारक डाक टिकट तथा सिक्का जारी किया। अगले दिन, दो अक्टूबर को उन्होंने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को फूलों की माला चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह दोनों घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हैं, क्योंकि आरएसएस की स्थापना भी दशहरा के दिन हुई और यह दिन गांधी जी के सिद्धांतों से प्रेरित है। आइए इन आयोजनों की पूरी पृष्ठभूमि, प्रधानमंत्री के विचारों और महत्व को विस्तार से समझें।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में नागपुर में की थी। यह संगठन हिंदू समाज को संगठित करने और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने के उद्देश्य से शुरू हुआ। आजादी की लड़ाई में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। गांधी जी की हत्या के बाद 1948 में इसे प्रतिबंधित किया गया, लेकिन 1949 में फिर से खोला गया। विभाजन के समय लाखों शरणार्थियों की मदद की। 1962 के चीन युद्ध और 1975 के आपातकाल में भी इसका योगदान रहा। आज आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है, जिसके लाखों शाखाएं हैं। इसकी सहयोगी संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास में काम करती हैं। शताब्दी वर्ष को विशेष बनाने के लिए पूरे देश में कार्यक्रम चल रहे हैं। एक अक्टूबर को दिल्ली में केंद्रीय समारोह हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री मुख्य अतिथि थे। आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी मौजूद रहे।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आरएसएस के 100 वर्षीय सफर को बलिदान, निस्वार्थ सेवा, राष्ट्र निर्माण और अनुशासन का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों का यह सफर सामान्य लोगों द्वारा असाधारण कार्य करने का उदाहरण है। शाखाओं को यज्ञ वेदी के समान बताया, जहां राष्ट्र सेवा की भावना जागृत होती है। उन्होंने आरएसएस पर हुए हमलों का जिक्र किया। कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी इसे कुचलने की कोशिशें हुईं, झूठे मुकदमे चले, प्रतिबंध लगाए गए। लेकिन संगठन ने कभी कड़वाहट नहीं पाली। हमेशा राष्ट्र पहले का सिद्धांत अपनाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ. हेडगेवार का विजन आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने आरएसएस को राष्ट्र की एकता और सामाजिक सद्भाव की रक्षा करने वाला बताया। चेतावनी दी कि घुसपैठिए सामाजिक सद्भाव को खतरा हैं, जो जनसांख्यिकीय परिवर्तन ला रहे हैं। विविधता में एकता भारत की आत्मा है, इसे तोड़ने से देश कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि आरएसएस की विभिन्न संस्थाएं समाज के हर वर्ग की सेवा कर रही हैं। यह संगठन एक भारत, श्रेष्ठ भारत का संदेश देता है।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने स्मारक डाक टिकट जारी किया, जिसमें 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में स्वयंसेवकों की परेड दिखाई गई है। साथ ही 100 रुपये का विशेष सिक्का जारी किया। यह पहली बार है जब स्वतंत्र भारत के सिक्के पर भारत माता की छवि उत्कीर्ण हुई है। सिक्के पर भारत माता सिंहासन पर सिंह के साथ वरद मुद्रा में विराजमान हैं, और स्वयंसेवक उनके आगे नमन कर रहे हैं। दूसरी ओर राष्ट्रीय प्रतीक है। सिक्के पर आरएसएस का मंत्र राष्ट्रीय स्वाहा, इदम राष्ट्राय, इदम न मम अंकित है, जिसका अर्थ है सब राष्ट्र को समर्पित, सब राष्ट्र का, कुछ भी मेरा नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सिक्का राष्ट्र सेवा की भावना को अमर करता है। उन्होंने स्वयंसेवकों को बधाई दी और कहा कि हमारी पीढ़ी भाग्यशाली है जो इस शताब्दी का साक्षी बनेगी। आरएसएस के स्वयंसेवक देश की प्रगति में योगदान देंगे। यह आयोजन संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित था। प्रधानमंत्री ने स्वयंसेवकों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया।
अगले दिन, दो अक्टूबर को गांधी जयंती पर प्रधानमंत्री ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने फूलों की माला चढ़ाई और मौन रखा। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के साथ थे। इससे पहले एक्स पर संदेश जारी किया। कहा कि गांधी जयंती प्रिय बापू के असाधारण जीवन को नमन करने का दिन है। उनके आदर्शों ने मानव इतिहास की दिशा बदल दी। उन्होंने साहस और सादगी से बड़े परिवर्तन की शक्ति दिखाई। सेवा और करुणा को सशक्तिकरण का माध्यम माना। हम विकसित भारत के निर्माण में उनके मार्ग पर चलेंगे। प्रधानमंत्री ने खादी और हस्तशिल्प उत्पाद खरीदने का आह्वान किया, जो गांधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि है। इस गांधी जयंती को विशेष बताया क्योंकि यह आजादी का अमृत महोत्सव वर्ष है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी राजघाट पर श्रद्धांजलि दी। कहा कि गांधी जी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं।
महात्मा गांधी का जन्म 1869 में पोरबंदार, गुजरात में हुआ। वे दक्षिण अफ्रीका जाकर वकील बने, लेकिन वहां नस्लीय भेदभाव से लड़े। भारत लौटकर असहयोग, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन चलाए। अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांत से उन्होंने दुनिया को प्रभावित किया। 1947 में आजादी दिलाई, लेकिन 1948 में नाथूराम गोडसे ने उनकी हत्या कर दी। गांधी जयंती पर देश भर में कार्यक्रम होते हैं। राजघाट पर सांस्कृतिक आयोजन, प्रार्थना सभा और स्वच्छता अभियान चलते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया। इस वर्ष 156वीं जयंती है। प्रधानमंत्री ने लाल बहादुर शास्त्री को भी याद किया, जिनका जन्म भी इसी दिन हुआ। शास्त्री जी के जय जवान जय किसान नारे को दोहराया।
ये दोनों घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हैं। आरएसएस की स्थापना दशहरा पर हुई, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। गांधी जी के अहिंसा सिद्धांत से प्रेरित होकर हेडगेवार ने संगठन बनाया। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों में एकता पर जोर दिया। कहा कि राष्ट्र सेवा ही सच्ची श्रद्धांजलि है। आरएसएस के स्वयंसेवक गांधी वादी सिद्धांतों पर चलते हैं। यह आयोजन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भाजपा और आरएसएस के बीच संबंध मजबूत दिखे। विपक्ष ने आलोचना की, लेकिन प्रधानमंत्री ने राष्ट्र एकता पर फोकस किया। मीडिया में इसे प्रमुखता से दिखाया गया। द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया और न्यूज18 ने कवरेज किया।
आरएसएस शताब्दी और गांधी जयंती से देश को नई प्रेरणा मिली। युवा पीढ़ी को सेवा, अनुशासन और अहिंसा सिखाती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सिद्धांतों से विकसित भारत बनेगा। आरएसएस की संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण में योगदान देंगी। गांधी जी के खादी अभियान से आत्मनिर्भरता आएगी। यह समय एकता का है। घुसपैठ और विभाजनकारी ताकतों से सावधान रहें। दशहरा पर रावण दहन के साथ बुराई का नाश करें। प्रधानमंत्री के संदेश प्रेरणादायक हैं। देश इन आदर्शों पर चलेगा। गांधी जी और शास्त्री जी अमर रहें। आरएसएस के स्वयंसेवक राष्ट्र सेवा में तत्पर रहें।
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