Viral News: सीबीआई की बड़ी कार्रवाई- आईआरएस अधिकारी अमित कुमार सिंघल के ठिकानों से 3.5 किलो सोना, 2 किलो चांदी और 1 करोड़ नकदी बरामद।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 31 मई, 2025 को एक सनसनीखेज कार्रवाई में भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के वरिष्ठ अधिकारी...
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 31 मई, 2025 को एक सनसनीखेज कार्रवाई में भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के वरिष्ठ अधिकारी अमित कुमार सिंघल और उनके सहयोगी हर्ष कोटक को 25 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। इस मामले में दिल्ली, मुंबई और पंजाब में सिंघल के ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिसमें 3.5 किलोग्राम सोना, 2 किलोग्राम चांदी, 1 करोड़ रुपये नकद, और कई अन्य संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए गए। यह कार्रवाई ला पिनो’ज पिज्जा के मालिक सनम कपूर की शिकायत के आधार पर की गई, जिन्होंने आरोप लगाया था कि सिंघल ने आयकर नोटिस को रद्द करने के लिए 45 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।
अमित कुमार सिंघल, 2007 बैच के आईआरएस अधिकारी, वर्तमान में नई दिल्ली में करदाता सेवा निदेशालय में अतिरिक्त महानिदेशक के पद पर तैनात थे। सीबीआई ने 31 मई, 2025 को उनके खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की, जिसमें उन पर ला पिनो’ज पिज्जा के मालिक सनम कपूर से 45 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया। कपूर ने दावा किया कि सिंघल ने आयकर विभाग से अनुकूल व्यवहार के बदले यह राशि मांगी और गैर-अनुपालन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई, भारी जुर्माना, और उत्पीड़न की धमकी दी। सनम कपूर और सिंघल का संबंध 2019 में शुरू हुआ, जब सिंघल मुंबई में सीमा शुल्क विभाग में संयुक्त आयुक्त के रूप में तैनात थे। इस दौरान, उन्होंने कपूर के साथ एक व्यावसायिक समझौता किया, जिसमें पार्कर इम्पेक्स नामक एक फर्म के माध्यम से मुंबई में ला पिनो’ज पिज्जा की मास्टर फ्रैंचाइज़ी स्थापित की गई। यह फर्म सिंघल की मां रंजना और अमित रतन के नाम पर पंजीकृत थी। बाद में, हर्ष कोटक और उनकी मां गोदावरीबेन अमूलखभाई कोटक की फर्म फ्लेवाको, और कोटक की पत्नी किरण की मालिकाना हक वाली मोहिनी हॉस्पिटैलिटी के साथ अन्य फ्रैंचाइज़ी समझौते किए गए।
2024 में कपूर ने इन समझौतों को समाप्त कर दिया, क्योंकि कोटक ने सस्ते स्रोतों से कच्चा माल खरीदकर समझौते का उल्लंघन किया था। कपूर ने तीन आउटलेट्स को 1.6 करोड़ रुपये में वापस खरीदा, जो मूल मूल्य 25 लाख रुपये से छह गुना अधिक था। इसके बाद, सिंघल ने कथित तौर पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कपूर के खिलाफ आयकर नोटिस जारी करवाया। अप्रैल 2025 में दिल्ली में हुई एक बैठक में, सिंघल ने इस नोटिस को रद्द करने के लिए 45 लाख रुपये की मांग की।
सनम कपूर की शिकायत के आधार पर, सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की। 30 मई, 2025 को, कपूर, सिंघल, कोटक, और एक वकील के बीच चार घंटे की बातचीत को गुप्त रूप से रिकॉर्ड किया गया, जिसमें रिश्वत की मांग का संकेत मिला। इसके बाद, सीबीआई ने 31 मई को एक जाल बिछाया, जिसमें हर्ष कोटक को मोहाली में सिंघल के आवास पर 25 लाख रुपये की पहली किश्त स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। उसी दिन देर रात, सिंघल को दिल्ली के वसंत कुंज स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। 1 जून, 2025 को, दोनों आरोपियों को चंडीगढ़ में विशेष मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जिन्होंने उन्हें 13 जून तक 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सीबीआई ने कोर्ट में तर्क दिया कि साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने का जोखिम है, जिसके कारण हिरासत आवश्यक थी। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
- छापेमारी और बरामदगी
सिंघल और कोटक की गिरफ्तारी के बाद, सीबीआई ने दिल्ली, मुंबई, और पंजाब (लुधियाना, बठिंडा, मोहाली, जीरकपुर, और न्यू चंडीगढ़) में उनके ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान जो बरामदगी की गई, उसमें
3.5 किलोग्राम सोना: लगभग 3.5 करोड़ रुपये मूल्य का, जिसमें सोने की चूड़ियाँ, सिक्के, और अन्य आभूषण शामिल थे।
2 किलोग्राम चांदी: अनुमानित मूल्य के साथ।
1 करोड़ रुपये नकद: विभिन्न स्थानों से बरामद।
25 बैंक खातों और एक लॉकर के दस्तावेज: इन खातों में जमा राशि और लॉकर की सामग्री का मूल्य अभी तक निर्धारित नहीं किया गया है।
दिल्ली, मुंबई, और पंजाब में अचल संपत्तियों के दस्तावेज: इनमें लुधियाना, बठिंडा, मोहाली, जीरकपुर, और न्यू चंडीगढ़ में संपत्तियां शामिल हैं।
विदेशी संपत्तियों के दस्तावेज: कोटक के मोबाइल डेटा से विदेशों में निवेश से संबंधित जानकारी मिली।
डिजिटल उपकरण: मोबाइल फोन और लैपटॉप, जिनमें आपत्तिजनक सामग्री और सबूत शामिल हैं।
सीबीआई ने बताया कि सभी चल और अचल संपत्तियों का कुल मूल्य अभी तक निर्धारित नहीं किया गया है, और जांच जारी है। यह बरामदगी एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के पास अवैध संपत्ति के संग्रह को दर्शाती है, जो उनके आधिकारिक आय के अनुपात में असंगत प्रतीत होती है। यह मामला भारत में भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। एक वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी का रिश्वतखोरी में शामिल होना न केवल प्रशासनिक अखंडता पर सवाल उठाता है, बल्कि आम जनता के बीच सरकारी संस्थानों पर विश्वास को भी कम करता है। सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की व्यापक चर्चा हुई, जिसमें कई यूजर्स ने इसे “गजब लूट” करार दिया। एक्स पर पोस्ट्स में उपयोगकर्ताओं ने आश्चर्य व्यक्त किया कि एक सरकारी अधिकारी इतनी बड़ी मात्रा में सोना, चांदी, और नकदी कैसे जमा कर सकता है। कानूनी दृष्टिकोण से, यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई का उदाहरण है। सीबीआई की त्वरित कार्रवाई और जाल बिछाने की रणनीति से यह स्पष्ट है कि एजेंसी भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाए हुए है। हालांकि, यह भी सवाल उठता है कि क्या इस तरह की कार्रवाइयां भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुंच पाती हैं, या यह केवल सतही उपाय हैं।
- भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सुझाव
इस मामले के आधार पर, भ्रष्टाचार को रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं:
पारदर्शी निगरानी तंत्र: सरकारी अधिकारियों की संपत्तियों और आय के स्रोतों की नियमित जांच होनी चाहिए।
डिजिटल ट्रैकिंग: सभी वित्तीय लेनदेन को डिजिटल रूप से ट्रैक करने की व्यवस्था को और मजबूत करना चाहिए।
कठोर दंड: भ्रष्टाचार के दोषी पाए गए अधिकारियों के लिए कठोर सजा और संपत्ति जब्ती की नीति लागू की जानी चाहिए।
जागरूकता अभियान: जनता को भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
संस्थागत सुधार: आयकर और सीमा शुल्क जैसे विभागों में आंतरिक ऑडिट और जवाबदेही को बढ़ावा देना चाहिए।
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