लापरवाही की इन्तेहा : फरीदाबाद स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर 1486 कैमरों में से एक भी नहीं मिला पूरी तरह चालू, करोड़ों का निवेश हुआ बेकार
हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद को 'स्मार्ट' बनाने के दावों के बीच एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। भारत के
- 'जीरो' निकला फरीदाबाद का आधुनिक जासूसी नेटवर्क: 168 जंक्शनों पर लगे सीसीटीवी कैमरों का नियंत्रण कक्ष से टूटा संपर्क
- सुरक्षित शहर का सपना हुआ धूमिल: कैग ऑडिट में फरीदाबाद स्मार्ट सिटी की सुरक्षा प्रणाली फेल, खराब केबलों और बिजली गुल होने का मिला बहाना
हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद को 'स्मार्ट' बनाने के दावों के बीच एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि फरीदाबाद स्मार्ट सिटी के तहत स्थापित किया गया अत्याधुनिक सर्विलांस नेटवर्क लगभग पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, शहर की सुरक्षा और यातायात निगरानी के लिए लगाए गए 1486 सीसीटीवी कैमरों में से एक भी कैमरा ऑडिट के दौरान संतोषजनक स्थिति में नहीं पाया गया। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए इस 'आईसीसीसी' (इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर) प्रोजेक्ट का उद्देश्य रियल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करना था, लेकिन धरातल पर यह व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हुई है।
इस परियोजना की शुरुआत फरवरी 2020 में बड़े जोर-शोर से की गई थी। इसके तहत फरीदाबाद के 168 प्रमुख जंक्शनों पर 1486 उच्च क्षमता वाले कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों का मुख्य कार्य यातायात प्रबंधन, अपराध नियंत्रण, और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना था। कैग की टीम ने जब 25 महत्वपूर्ण जंक्शनों पर लगे कैमरों की यादृच्छिक (Random) जांच की, तो पाया कि एक भी जंक्शन पर कैमरे पूरी तरह से कार्यशील नहीं थे। यह स्थिति उस शहर के लिए अत्यंत चिंताजनक है जो स्मार्ट सिटी मिशन के तहत खुद को सुरक्षित और आधुनिक बनाने का दावा करता रहा है।
कैग रिपोर्ट के अनुसार, 25 में से 12 जंक्शनों पर कैमरे पूरी तरह से बंद मिले, जबकि शेष 13 जंक्शनों पर वे केवल आंशिक रूप से चल रहे थे। कैमरों के बंद होने के पीछे प्रशासन द्वारा बेहद साधारण और बचकाने कारण गिनाए गए हैं। कहीं केबल के क्षतिग्रस्त होने की बात कही गई है, तो कहीं बिजली की आपूर्ति न होने और कंट्रोल स्विच के जल जाने का बहाना बनाया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कमांड सेंटर की रिपोर्ट में इन कैमरों को चालू दिखाया गया था, लेकिन भौतिक सत्यापन के दौरान सच्चाई इसके बिल्कुल उलट निकली। यह न केवल वित्तीय अनियमितता की ओर संकेत करता है, बल्कि शहर की सुरक्षा के साथ किए जा रहे खिलवाड़ को भी दर्शाता है।
सुरक्षा ऑडिट में बड़े जोखिम
हाल ही में फरीदाबाद पुलिस द्वारा किए गए एक अन्य सुरक्षा ऑडिट में भी यह बात सामने आई है कि शहर के अधिकांश कैमरों का डेटा प्रबंधन असुरक्षित है। जासूसी नेटवर्क और डेटा लीक होने की आशंका के बीच, कैग की यह रिपोर्ट प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका है। जब 1486 कैमरे काम ही नहीं कर रहे हैं, तो संदिग्ध गतिविधियों और अपराधियों पर नजर रखना नामुमकिन हो गया है, जिससे पूरे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की उपयोगिता ही सवालों के घेरे में आ गई है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड (FSCL) को इन परियोजनाओं के प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कैग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि निगरानी तंत्र में भारी कमी रही है। निगरानी समिति की बैठकें, जो नियमित अंतराल पर होनी चाहिए थीं, उनमें भारी कमी पाई गई। निर्धारित 133 बैठकों के मुकाबले केवल 10 बैठकें आयोजित की गईं, जिससे यह पता चलता है कि अधिकारियों ने इस संवेदनशील प्रोजेक्ट की देखरेख में कितनी घोर लापरवाही बरती है। इसके अतिरिक्त, किसी भी थर्ड-पार्टी एजेंसी से इन परियोजनाओं का प्रभाव मूल्यांकन (Impact Assessment) नहीं कराया गया, जिससे खामियां समय रहते पकड़ी नहीं जा सकीं।
फरीदाबाद में बढ़ते अपराध ग्राफ के बीच सीसीटीवी कैमरों का इस तरह निष्क्रिय होना पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है। अधिकांश आपराधिक वारदातों के समय पुलिस जब फुटेज खंगालने पहुंचती है, तो उन्हें अक्सर 'टेक्निकल फॉल्ट' के कारण रिकॉर्डिंग नहीं मिलती। कैग की इस रिपोर्ट ने अब उन दावों की भी पोल खोल दी है, जिनमें कहा गया था कि शहर के चप्पे-चप्पे पर डिजिटल नजर रखी जा रही है। जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये उन उपकरणों पर खर्च कर दिए गए जो अब केवल खंभों पर शो-पीस बनकर रह गए हैं। शहर के व्यस्ततम चौराहों पर भी रात के समय अंधेरा और कैमरों का बंद होना अपराधियों के हौसले बढ़ा रहा है। प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि स्मार्ट सिटी मिशन का कार्यकाल मार्च 2025 तक बढ़ाया गया था, लेकिन इसके बावजूद 60 प्रतिशत से अधिक परियोजनाएं अब भी अधूरी या देरी से चल रही हैं। कैग ने हरियाणा सरकार को इस मामले में कड़ी फटकार लगाते हुए दोषियों की जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया है। फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड को अब उन ठेकेदारों और एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी जिन्होंने रखरखाव और संचालन में लापरवाही बरती है। शहर को 'स्मार्ट' कहने से पहले उसकी बुनियादी सुरक्षा प्रणालियों को 'स्मार्ट' बनाना अनिवार्य है, वरना यह केवल कागजी विकास बनकर रह जाएगा।
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