फरीदाबाद में डिलीवरी एजेंट की हार्ट अटैक से मौत- कुर्सी पर बैठे-बैठे गिरा, सीसीटीवी में कैद हुई घटना, वीडियो वायरल। 

Viral News: हरियाणा के फरीदाबाद में 30 जुलाई 2025 को एक दुखद घटना सामने आई, जिसमें एक डिलीवरी एजेंट की हार्ट अटैक से अचानक मौत...

Aug 1, 2025 - 13:06
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फरीदाबाद में डिलीवरी एजेंट की हार्ट अटैक से मौत- कुर्सी पर बैठे-बैठे गिरा, सीसीटीवी में कैद हुई घटना, वीडियो वायरल। 
फरीदाबाद में डिलीवरी एजेंट की हार्ट अटैक से मौत- कुर्सी पर बैठे-बैठे गिरा, सीसीटीवी में कैद हुई घटना, वीडियो वायरल। 

हरियाणा के फरीदाबाद में 30 जुलाई 2025 को एक दुखद घटना सामने आई, जिसमें एक डिलीवरी एजेंट की हार्ट अटैक से अचानक मौत हो गई। मृतक की पहचान विकल सिंह (उम्र 30 वर्ष) के रूप में हुई, जो भतौला गांव में एक ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनी के गोदाम में डिलीवरी एजेंट के रूप में काम करता था। यह हादसा गोदाम के बाहर हुआ, जहां विकल कुर्सी पर बैठकर अपने साथियों से बात कर रहा था। पूरी घटना पास के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। घटना के बाद मृतक के परिजनों ने कंपनी से मुआवजे की मांग की, जिसके बाद कंपनी ने मुआवजा देने की घोषणा की। यह घटना युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों को लेकर चिंता बढ़ा रही है।

घटना भतौला गांव में एक ऐप-आधारित डिलीवरी कंपनी के गोदाम के बाहर सुबह करीब 9:30 बजे हुई। सीसीटीवी फुटेज में दिखता है कि विकल सिंह अपने सहकर्मियों के साथ गोदाम के बाहर कुर्सी पर बैठकर बात कर रहा था। अचानक वह अपनी कुर्सी से मुंह के बल जमीन पर गिर पड़ा। साथी कर्मचारियों ने उसे तुरंत उठाने की कोशिश की और नजदीकी अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मेडिकल जांच में पुष्टि हुई कि विकल की मौत हार्ट अटैक के कारण हुई। वीडियो में दिखता है कि विकल को गिरने से पहले कोई खास परेशानी नहीं दिखी, जिससे यह घटना और भी चौंकाने वाली हो गई।

विकल सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले का रहने वाला था और पिछले तीन साल से फरीदाबाद में रहकर काम कर रहा था। उसके परिवार में उसकी पत्नी, दो छोटे बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता हैं। विकल की मौत की खबर सुनते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों ने गोदाम पर पहुंचकर हंगामा किया और कंपनी से मुआवजे की मांग की। उनका कहना था कि विकल की ड्यूटी के दौरान यह हादसा हुआ, इसलिए कंपनी को उनके परिवार की आर्थिक मदद करनी चाहिए। प्रदर्शन के बाद कंपनी ने मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा और एक परिजन को नौकरी देने की घोषणा की।

फरीदाबाद पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की। भतौला पुलिस चौकी प्रभारी रमेश चंद्र ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक से मौत की पुष्टि हुई है। पुलिस ने मामले को प्राकृतिक मृत्यु मानते हुए मृतक के शव को परिजनों को सौंप दिया। कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया, क्योंकि यह हादसा मेडिकल आपातकाल के कारण हुआ। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को भी जांच के लिए सुरक्षित रखा है।

यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई यूजर्स ने इसे दुखद बताया और युवाओं में तनाव और अस्वस्थ जीवनशैली पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा, “30 साल की उम्र में हार्ट अटैक? यह चेतावनी है कि हमें अपनी सेहत पर ध्यान देना होगा।” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “कंपनियों को कर्मचारियों की सेहत की जांच करानी चाहिए, खासकर डिलीवरी जैसे तनावपूर्ण काम में।” इस घटना ने डिलीवरी एजेंटों के काम के दबाव और स्वास्थ्य जोखिमों पर भी चर्चा शुरू कर दी है।

फरीदाबाद में हाल के महीनों में हार्ट अटैक से मौत के कई मामले सामने आए हैं। उदाहरण के लिए, जुलाई 2025 में बल्लभगढ़ में 35 वर्षीय पंकज शर्मा की जिम में व्यायाम के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई थी, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था। इसी तरह, जनवरी 2023 में फरीदाबाद के एक मेडिकल स्टोर के सामने एक युवक की हार्ट अटैक से मौत हुई थी। ये घटनाएं युवाओं में हृदय रोगों की बढ़ती समस्या को दर्शाती हैं।

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में हार्ट अटैक के मामले तनाव, अस्वस्थ खानपान, और शारीरिक निष्क्रियता के कारण बढ़ रहे हैं। फरीदाबाद के सिविल अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अनिल शर्मा ने बताया, “30-40 साल की उम्र में हार्ट अटैक के मामले पहले दुर्लभ थे, लेकिन अब आम हो गए हैं। डिलीवरी जैसे काम में लंबे समय तक काम, समय पर भोजन न करना, और तनाव इसका कारण हो सकता है।” उन्होंने सुझाव दिया कि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, और तनाव प्रबंधन से इन हादसों को कम किया जा सकता है।

डिलीवरी एजेंटों के लिए काम का दबाव भी इस घटना का एक प्रमुख पहलू है। सामाजिक कार्यकर्ता रीता वर्मा ने कहा कि डिलीवरी कंपनियां अपने कर्मचारियों पर समय सीमा और डिलीवरी लक्ष्य का भारी दबाव डालती हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसी कंपनियों को कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा और नियमित मेडिकल चेकअप अनिवार्य करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को ऐसी घटनाओं के लिए मुआवजा नीति को और स्पष्ट करना चाहिए।

इस घटना ने कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923 के तहत मुआवजे के अधिकार को भी चर्चा में ला दिया। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि यदि कोई कर्मचारी कार्यस्थल जाते-आते या लौटते समय हादसे का शिकार होता है, तो उसका परिवार मुआवजे का हकदार है। इस मामले में, चूंकि विकल की मौत ड्यूटी के दौरान गोदाम के बाहर हुई, उनके परिवार को मुआवजा देने का फैसला उचित माना गया।

स्थानीय लोगों ने इस घटना को दुखद बताते हुए प्रशासन से मांग की है कि डिलीवरी कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए विशेष कदम उठाए जाएं। भतौला गांव के एक निवासी ने कहा, “ये डिलीवरी वाले दिन-रात दौड़ते हैं। इनके लिए कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं है। सरकार और कंपनियों को इनके लिए कुछ करना चाहिए।” कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि गोदामों और कार्यस्थलों पर आपातकालीन मेडिकल किट और प्रशिक्षित कर्मचारी होने चाहिए।

कंपनी ने एक बयान जारी कर विकल सिंह की मौत पर दुख जताया और कहा कि वे मृतक के परिवार के साथ हैं। कंपनी ने यह भी बताया कि वे अपने कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य जांच और बीमा योजनाओं पर काम कर रहे हैं। हालांकि, कुछ कर्मचारियों ने बताया कि कंपनी में नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधा नहीं है, और अधिकांश डिलीवरी एजेंट लंबे समय तक काम करते हैं।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो ने न केवल दुख व्यक्त किया, बल्कि युवाओं में हार्ट अटैक के कारणों पर भी बहस छेड़ दी। कई लोगों ने सरकार से मांग की है कि हृदय रोगों की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं। एक यूजर ने लिखा, “यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली की चेतावनी है। हमें अपनी सेहत को गंभीरता से लेना होगा।”

निष्कर्षतः, फरीदाबाद के भतौला गांव में डिलीवरी एजेंट विकल सिंह की हार्ट अटैक से हुई मौत ने एक बार फिर युवाओं में बढ़ते हृदय रोगों की समस्या को सामने लाया है। सीसीटीवी में कैद यह घटना और इसका वायरल वीडियो समाज के लिए एक चेतावनी है कि स्वास्थ्य और कार्यस्थल की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। कंपनी ने मुआवजा देने की घोषणा की है, लेकिन यह घटना डिलीवरी कर्मचारियों के काम के दबाव और स्वास्थ्य जोखिमों पर गंभीर सवाल उठाती है।

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