तेंदुए के खूनी जबड़े से अपनी बेटी को छुड़ाने के लिए मौत से भिड़ गई जांबाज मां सबुरुन, शोर सुनकर दुम दबाकर भागा खूंखार शिकारी

बेटी को मौत के मुंह में जाते देख मां सबुरुन के भीतर की ममता एक विकराल रूप में बदल गई। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना और एक पल भी गंवाए सीधे उस खूंखार तेंदुए पर धावा बोल दिया। सबुरुन खाली हाथ ही उस हिंसक जानवर से भिड़ गईं और उन्होंने तेंदुए के मुंह से अप

May 24, 2026 - 12:36
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तेंदुए के खूनी जबड़े से अपनी बेटी को छुड़ाने के लिए मौत से भिड़ गई जांबाज मां सबुरुन, शोर सुनकर दुम दबाकर भागा खूंखार शिकारी
तेंदुए के खूनी जबड़े से अपनी बेटी को छुड़ाने के लिए मौत से भिड़ गई जांबाज मां सबुरुन, शोर सुनकर दुम दबाकर भागा खूंखार शिकारी
  • बहराइच जिले से सामने आई ममता और अदम्य साहस की एक ऐसी दास्तां, जिसने हिंसक वन्यजीव के चंगुल से छीन ली मासूम की जिंदगी
  • कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के ककरा इलाके में आधी रात को घर में घुसा आदमखोर तेंदुआ, मच्छरदानी फाड़कर 7 साल की बच्ची को दबोचा

उत्तर प्रदेश के भारत-नेपाल सीमा से सटे बहराइच जिले में स्थित कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के जंगलों से घिरे ग्रामीण इलाकों में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इसी कड़ी में जिले के मुर्तिहा कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ककरा गांव से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला और बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां शनिवार-रविवार की दरमियानी रात को एक खूंखार तेंदुआ भोजन की तलाश में जंगल से निकलकर आबादी वाले रिहायशी इलाके में दाखिल हो गया। गांव के बाहरी हिस्से में स्थित एक घर में घुसकर इस हिंसक शिकारी ने चारपाई पर गहरी नींद में सो रही एक मासूम बच्ची को अपना शिकार बनाने की कोशिश की। इस अचानक हुए जानलेवा हमले से पूरे गांव में सनसनी फैल गई है और ग्रामीणों के भीतर दहशत का माहौल बन गया है।

यह पूरी खौफनाक वारदात ककरा गांव के रहने वाले एक ग्रामीण के घर के भीतर घटित हुई, जहां रात के समय पूरा परिवार गहरी नींद में सो रहा था। हिम्मती और जांबाज मां सबुरुन ने इस भयावह रात की आपबीती बताते हुए कहा कि उनकी 7 वर्षीय मासूम बेटी समा रात को खाना खाने के बाद उनके साथ ही घर के आंगन से सटे कमरे में एक चारपाई पर सोई हुई थी। गर्मियों के मौसम और मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए परिवार ने चारपाई के चारों तरफ अच्छी तरह से मच्छरदानी लगा रखी थी ताकि बच्चे सुरक्षित सो सकें। रात के सन्नाटे का फायदा उठाकर खूंखार तेंदुआ बेहद खामोशी से घर की कच्ची दीवार को लांघकर अंदर दाखिल हुआ। तेंदुए की नजर सीधे चारपाई पर सो रही मासूम समा पर पड़ी, जिसके बाद उसने अपनी हिंसक प्रवृत्ति के अनुसार हमला बोल दिया।

खूंखार तेंदुए ने बेहद आक्रामक तरीके से चारपाई पर झपट्टा मारा और पलक झपकते ही अपने नुकीले नाखूनों से मजबूत मच्छरदानी को बीच से पूरी तरह फाड़ डाला। मच्छरदानी को चीरने के बाद तेंदुए ने अपने मजबूत और खूनी जबड़े में 7 साल की मासूम समा को दबोच लिया और उसे चारपाई से नीचे खींचकर घर से बाहर जंगल की तरफ ले जाने का प्रयास करने लगा। अपने शरीर पर तेंदुए के दांत और नाखून गड़ने के कारण दर्द से तड़पती हुई मासूम बच्ची समा जोर-जोर से चीखने और रोने लगी। आधी रात के सन्नाटे में अपनी लाडली बेटी की चीख और कराहने की आवाज सुनकर पास ही सो रही मां सबुरुन की नींद अचानक खुल गई। सामने का नजारा देखकर किसी भी सामान्य व्यक्ति के होश उड़ जाते, क्योंकि एक विशालकाय तेंदुआ उनकी बेटी को मुंह में दबाए ले जा रहा था।

मातृ शक्ति का अदम्य उदाहरण

जब एक मां की ममता के सामने उसकी संतान के जीवन पर संकट आता है, तो वह दुनिया के सबसे बड़े डर और मौत से भी टकराने का हौसला जुटा लेती है। सबुरुन का यह अदम्य साहस इस बात का जीवंत उदाहरण है कि इंसानी जज्बा किसी भी खूंखार हिंसक जानवर की ताकत को परास्त कर सकता है।

बेटी को मौत के मुंह में जाते देख मां सबुरुन के भीतर की ममता एक विकराल रूप में बदल गई। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना और एक पल भी गंवाए सीधे उस खूंखार तेंदुए पर धावा बोल दिया। सबुरुन खाली हाथ ही उस हिंसक जानवर से भिड़ गईं और उन्होंने तेंदुए के मुंह से अपनी बेटी को छुड़ाने के लिए उसे दोनों हाथों से पकड़कर पीछे खींचना शुरू किया। मां ने पूरी ताकत से तेंदुए पर प्रहार किए और लगातार शोर मचाना शुरू कर दिया। एक साधारण महिला द्वारा किए गए इस अप्रत्याशित और जोरदार पलटवार से तेंदुआ भी कुछ समय के लिए सकपका गया। मां के लगातार चीखने-चिल्लाने और साहसिक प्रतिरोध के कारण आखिरकार तेंदुए की पकड़ ढीली पड़ गई और वह बच्ची को वहीं छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए वापस जंगल की तरफ भाग खड़ा हुआ।

शोरशराबा और चीख-पुकार की आवाज सुनकर आस-पास के घरों में सो रहे अन्य ग्रामीण भी लाठी-डंडे और टॉर्च लेकर तुरंत सबुरुन के घर की तरफ दौड़े। तब तक तेंदुआ वहां से रफूचक्कर हो चुका था, लेकिन घर के भीतर का दृश्य देखकर हर कोई दंग रह गया। चारपाई की मच्छरदानी पूरी तरह फटी हुई थी और फर्श पर चारों तरफ खून के धब्बे बिखरे हुए थे। तेंदुए के हमले के कारण मासूम बच्ची समा के गले, पीठ और हाथ पर गहरे जख्म हो गए थे और वह गंभीर रूप से घायल अवस्था में अचेत होने की कगार पर थी। ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए तुरंत इसकी सूचना स्थानीय एम्बुलेंस और वन विभाग के अधिकारियों को दी। ग्रामीण तुरंत घायल बच्ची को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर भागे।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत उसका इलाज शुरू किया और घावों पर टांके लगाए। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची के शरीर पर तेंदुए के दांतों और नाखूनों के गहरे निशान हैं, लेकिन समय रहते मां द्वारा उसे छुड़ा लिए जाने के कारण उसकी सांसें बच गईं और कोई बड़ी मुख्य नस कटने से रह गई। वर्तमान में बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है, हालांकि वह इस भयानक हादसे के कारण गहरे मानसिक सदमे में है। इस घटना की जानकारी मिलते ही कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग की क्षेत्रीय वन टीम और पुलिस बल भी सुबह ककरा गांव पहुंचे। वन अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया जहां उन्हें घर के कच्चे फर्श और आंगन में तेंदुए के पगमार्क यानी पैरों के निशान साफ तौर पर मिले हैं।

इस दिल दहला देने वाली वारदात के बाद से ककरा और उसके आस-पास के दर्जनों गांवों में रहने वाले लोगों के भीतर भारी आक्रोश और डर का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि कतर्नियाघाट जंगल से निकलकर हिंसक जानवर अक्सर उनके पालतू मवेशियों और बच्चों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन वन विभाग द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि गांव के आस-पास के क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है और तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरे लगाने के साथ-साथ उसे पकड़ने के लिए जल्द ही पिंजरा भी लगाया जाएगा। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात के समय घरों के बाहर अकेले न सोएं और बच्चों को हमेशा सुरक्षित कमरों के भीतर ही सुलाएं।

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