योग गुरु स्वामी रामदेव का दावा - भारत जल्द ही रूस और चीन के साथ मिलकर अमेरिका की राजनीतिक और आर्थिक गुंडागर्दी खत्म कर देगा। 

Haridwar: हरिद्वार में 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर योग गुरु स्वामी रामदेव ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि भारत ....

Aug 16, 2025 - 12:04
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योग गुरु स्वामी रामदेव का दावा - भारत जल्द ही रूस और चीन के साथ मिलकर अमेरिका की राजनीतिक और आर्थिक गुंडागर्दी खत्म कर देगा। 
योग गुरु स्वामी रामदेव का दावा - भारत जल्द ही रूस और चीन के साथ मिलकर अमेरिका की राजनीतिक और आर्थिक गुंडागर्दी खत्म कर देगा। 

15 अगस्त 2025 को हरिद्वार में 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर योग गुरु स्वामी रामदेव ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि भारत जल्द ही रूस और चीन के साथ मिलकर अमेरिका की राजनीतिक और आर्थिक दबदबे को समाप्त कर देगा। यह बयान उन्होंने पतंजलि विश्वविद्यालय और पतंजलि योग भवन में ध्वजारोहण समारोह के बाद दिया। स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत एक नई विश्व व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें रूस, चीन, मध्य एशिया के कुछ देश और कुछ यूरोपीय देशों के बीच एक नया गठजोड़ बन रहा है। इस गठजोड़ को उन्होंने विश्व के लिए एक सकारात्मक संदेश बताया और कहा कि भारत ने अमेरिका के सामने झुकने के बजाय खड़े होने का फैसला किया है।

स्वामी रामदेव ने अपने बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को मृत बताने वाले ट्रंप गलत हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत की अर्थव्यवस्था न केवल जीवंत है, बल्कि तेजी से प्रगति कर रही है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 300 साल पहले भारत की अर्थव्यवस्था 400 से 500 ट्रिलियन डॉलर की थी, जिसे पहले मुगलों और फिर अंग्रेजों ने लूटा। फिर भी, भारत आज गर्व के साथ खड़ा है। स्वामी रामदेव ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की बात पर जोर दिया। उन्होंने पतंजलि योगपीठ के कार्यकर्ताओं और साधु-संतों को आर्थिक, शैक्षिक और चिकित्सा क्षेत्र में वैचारिक और बौद्धिक स्वतंत्रता के लिए स्वदेशी अपनाने का संकल्प दिलवाया।

उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर भारत, रूस, चीन, मध्य एशिया के कुछ देश और यूरोप के कुछ देशों के बीच गठजोड़ बनता है, तो यह अमेरिका और ट्रंप की ताकत को चुनौती देगा। उन्होंने दावा किया कि इस गठजोड़ से अमेरिका का वैश्विक प्रभुत्व खत्म हो सकता है, और दुनिया में एक नई व्यवस्था स्थापित होगी। स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है, और यह गठजोड़ विश्व शांति और समृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा। स्वामी रामदेव ने पाकिस्तान पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की परमाणु धमकियां बेकार हैं, क्योंकि उसके पास जो परमाणु हथियार हैं, वे भी उसके अपने नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि ये हथियार दूसरे देशों के नियंत्रण में हैं और भारत पर दबाव बनाने के लिए छिपाए गए हैं। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने इस ऑपरेशन के जरिए पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया और उसकी धमकियों को बेअसर कर दिया। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक और आर्थिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। हाल के महीनों में भारत ने रूस और चीन के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। उदाहरण के लिए, भारत रूस से तेल आयात बढ़ा रहा है, और ब्रिक्स जैसे मंचों के जरिए रूस और चीन के साथ सहयोग को बढ़ावा दे रहा है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत, रूस और चीन का यह गठजोड़ इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और आर्थिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे अभी भी बने हुए हैं।

वैश्विक स्तर पर अमेरिका की नीतियों, खासकर ट्रंप प्रशासन के हालिया फैसलों, ने कई देशों को प्रभावित किया है। ट्रंप ने भारत, चीन और अन्य देशों पर नए टैरिफ लगाए हैं, जिसका उद्देश्य अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करना और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देना है। स्वामी रामदेव ने इन टैरिफ को अमेरिका की आर्थिक गुंडागर्दी का हिस्सा बताया और कहा कि भारत इनके सामने नहीं झुकेगा। उन्होंने स्वदेशी उत्पादों को अपनाने और विदेशी उत्पादों, खासकर चीन, अमेरिका और यूरोप के उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की। हालांकि, कुछ समाचार स्रोतों ने एक अलग दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच संबंध भी मजबूत हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती को वैश्विक शांति और सहयोग के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। उदाहरण के लिए, दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए संयुक्त प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह दर्शाता है कि भारत एक संतुलित नीति अपनाने की कोशिश कर रहा है, जहां वह रूस और चीन के साथ सहयोग बढ़ा रहा है, लेकिन अमेरिका के साथ भी अपने संबंधों को मजबूत रख रहा है।

स्वामी रामदेव का यह बयान सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना। कुछ लोगों ने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत का प्रतीक माना, जबकि कुछ ने इसे अतिशयोक्तिपूर्ण बताया। एक एक्स पोस्ट में कहा गया कि भारत, रूस और चीन का गठजोड़ एक नया शक्ति संतुलन बना सकता है, जो अमेरिका के टैरिफ युद्ध के जवाब में महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, यह भी सच है कि भारत और चीन के बीच तनाव, खासकर लद्दाख में सीमा विवाद, इस गठजोड़ की राह में चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की प्रक्रिया पहले से ही शुरू हो चुकी है। चीन की बढ़ती आर्थिक और सैन्य ताकत, रूस की रणनीतिक स्थिति, और भारत की उभरती हुई वैश्विक भूमिका एक नए विश्व व्यवस्था की नींव रख रहे हैं। हालांकि, यह गठजोड़ कितना प्रभावी होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि ये देश आपसी मतभेदों को कितनी अच्छी तरह सुलझा पाते हैं। भारत ने हमेशा से एक संतुलित और शांतिपूर्ण विदेश नीति का पालन किया है, और वह रूस, चीन, और अमेरिका जैसे देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।

स्वामी रामदेव ने अपने बयान में भारत की आर्थिक प्रगति पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाना होगा, और इसके लिए स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने पतंजलि के मंच से स्वदेशी अपनाने का संदेश दिया, जो उनके व्यापारिक हितों के साथ भी जुड़ा हुआ है। पतंजलि ने पिछले कुछ वर्षों में स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देकर भारतीय बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाई है। इसके अलावा, स्वामी रामदेव ने वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत एक विश्व गुरु के रूप में उभरेगा, जो न केवल आर्थिक और राजनीतिक ताकत के रूप में, बल्कि वैचारिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी दुनिया का नेतृत्व करेगा। यह दृष्टिकोण भारत सरकार की 'विश्व बंधु' नीति के साथ भी मेल खाता है, जिसमें भारत दुनिया के सभी देशों के साथ दोस्ती और सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है। हालांकि, स्वामी रामदेव का यह बयान कुछ लोगों के लिए विवादास्पद भी हो सकता है, क्योंकि इसमें अमेरिका और ट्रंप के खिलाफ तीखी भाषा का उपयोग किया गया है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान भारत की संतुलित विदेश नीति को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी, स्वामी रामदेव का यह बयान भारत के बढ़ते आत्मविश्वास और वैश्विक मंच पर उसकी महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है। यह कहना उचित होगा कि स्वामी रामदेव का यह बयान न केवल भारत की बदलती वैश्विक स्थिति को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार है।

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