अलीगढ़ में कुत्ते के काटने के कुछ घंटों बाद युवक में रेबीज जैसे लक्षण मिले, लोगों को काटने दौड़ा, चारपाई से बांधकर अस्पताल ले गए लोग।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक युवक को आवारा कुत्ते ने काट लिया और कुछ ही घंटों बाद उसकी
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक युवक को आवारा कुत्ते ने काट लिया और कुछ ही घंटों बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। यह घटना खैर तहसील के उत्वारा गांव की है, जहां 23 वर्षीय युवक रामू या राजकुमार को 20 दिसंबर 2025 को कुत्ते ने काटा था। काटने के बाद युवक ने घाव को धोया और सामान्य रहा, लेकिन रात में या अगले दिन उसकी हालत अचानक खराब हो गई। युवक में रेबीज जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे, जिससे गांव में दहशत फैल गई।
युवक को कुत्ते ने पैर या शरीर के किसी हिस्से में काटा था। काटने के करीब 5 से 18 घंटे बाद उसका व्यवहार बदल गया। वह बेचैनी महसूस करने लगा, शरीर में खुजली होने लगी और कुत्तों जैसी आवाजें निकालने लगा। युवक जीभ बाहर निकालकर हांफने लगा, खुद के कपड़े नोचने लगा और लोगों को सूंघने व काटने के लिए दौड़ने लगा। उसकी हरकतें इतनी असामान्य हो गईं कि आसपास के लोग डरकर भागने लगे। कोई उसके पास जाने की हिम्मत नहीं कर रहा था। युवक हिंसक हो गया और परिवार के सदस्यों सहित अन्य लोगों पर हमला करने की कोशिश करने लगा। हालत बिगड़ते देख परिवार और ग्रामीणों ने बड़ी मुश्किल से उसे काबू में किया। उन्होंने युवक को जानवरों की तरह पकड़ा और जबरन चारपाई से बांध दिया। इसी हालत में परिजनों ने उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया और युवक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे पहले अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज और फिर महर्षि वाल्मीकि संक्रामक रोग अस्पताल या दिल्ली के उच्च केंद्र जैसे एम्स में रेफर कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि युवक में रेबीज के गंभीर लक्षण दिख रहे हैं और उसकी हालत नाजुक है।
यह मामला इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि सामान्यतः रेबीज के लक्षण कुत्ते के काटने के एक से तीन महीने बाद दिखते हैं, जिसे इन्क्यूबेशन पीरियड कहा जाता है। लेकिन इस मामले में लक्षण मात्र कुछ घंटों या 14-18 घंटों में ही उभर आए। डॉक्टरों का कहना है कि यदि काटने वाला कुत्ता पहले से ही गंभीर रूप से संक्रमित या पागल अवस्था में हो तो लक्षण जल्दी दिख सकते हैं। यह स्थिति बेहद दुर्लभ है और रेबीज की गंभीरता को दर्शाती है। युवक मजदूरी का काम करता था और परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। काटने के बाद एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने की तैयारी चल रही थी, लेकिन उससे पहले ही हालत बिगड़ गई। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। रात में युवक की हरकतें देखकर परिवार ने पहले कुछ घरेलू उपाय या झाड़-फूंक की कोशिश की, लेकिन सुबह तक हालत और खराब हो गई। ग्रामीणों ने मिलकर उसे बांधा ताकि वह खुद को या दूसरों को नुकसान न पहुंचाए। चारपाई से बंधी हालत में ही उसे अस्पताल ले जाया गया। इस घटना से गांव में आवारा कुत्तों के प्रति डर बढ़ गया है। काटने वाला कुत्ता अभी भी गांव में घूम रहा है।
रेबीज एक जानलेवा वायरस जनित बीमारी है जो संक्रमित जानवर के काटने या लार के संपर्क से फैलती है। इसमें मरीज को पानी से डर, बेचैनी, मांसपेशियों में ऐंठन और हिंसक व्यवहार जैसे लक्षण दिखते हैं। यदि समय पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन नहीं लगवाया जाए तो यह घातक साबित हो सकती है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि किसी भी जानवर के काटने पर तुरंत घाव धोएं और निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में जाकर इंजेक्शन लगवाएं। इस मामले ने एक बार फिर रेबीज की रोकथाम और आवारा कुत्तों की समस्या पर ध्यान आकर्षित किया है। युवक की हालत को देखते हुए उसे विशेष उपचार के लिए उच्च केंद्र में भर्ती किया गया है। परिवार को उम्मीद है कि समय पर इलाज से वह ठीक हो जाएगा, लेकिन डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर बताया है। यह घटना 21-22 दिसंबर 2025 के आसपास की है और जल्दी ही पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई। आवारा कुत्तों के काटने के मामले उत्तर प्रदेश में आम हैं, लेकिन इतनी जल्दी लक्षण दिखना असामान्य है।
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