प्रस्ताव पसंद आए तो तुरंत हस्ताक्षर करें, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पीयूष गोयल ने कहा- समयसीमा का दबाव बिल्कुल नहीं। 

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने

Dec 12, 2025 - 12:24
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प्रस्ताव पसंद आए तो तुरंत हस्ताक्षर करें, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पीयूष गोयल ने कहा- समयसीमा का दबाव बिल्कुल नहीं। 
प्रस्ताव पसंद आए तो तुरंत हस्ताक्षर करें, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पीयूष गोयल ने कहा- समयसीमा का दबाव बिल्कुल नहीं। 

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका को भारत का प्रस्ताव पसंद आता है, तो उसे तुरंत ही समझौते पर हस्ताक्षर कर देना चाहिए। यह बयान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) के एक वरिष्ठ अधिकारी के हालिया टिप्पणी के संदर्भ में आया है, जिसमें भारत के प्रस्ताव को अब तक का सबसे अच्छा बताया गया था। गोयल ने स्पष्ट किया कि समझौता तभी होगा जब दोनों पक्षों को इससे लाभ हो, और किसी भी समयसीमा के दबाव में जल्दबाजी नहीं की जाएगी। वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की वार्ताएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जो दोनों देशों के नेताओं के निर्देशों के बाद फरवरी 2025 से शुरू हुई थीं। इन वार्ताओं का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है, जो वर्तमान 191 अरब डॉलर से काफी अधिक है।

वार्ताओं की प्रगति पर गोयल ने कहा कि अब तक पांच दौर की गहन चर्चाएं हो चुकी हैं। इनमें बाजार पहुंच, नियामक मुद्दों, निवेश नियमों और टैरिफ से जुड़े विषयों पर विस्तृत आदान-प्रदान हुआ है। हाल ही में अमेरिकी उप-व्यापार प्रतिनिधि रिक स्विट्जर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा, जो उनके पदभार संभालने के तीन महीने बाद भारत का पहला दौरा था। यह यात्रा औपचारिक वार्ता दौर नहीं थी, बल्कि दोनों पक्षों के बीच परिचय और समझ बढ़ाने का अवसर थी। गोयल ने स्विट्जर के साथ हुई चर्चाओं को गहन और सकारात्मक बताया, जिसमें भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा दोनों देशों के बीच चल रही सकारात्मक संलग्नताओं को जारी रखने पर सहमत हुआ, जिसमें आपसी हितों को ध्यान में रखा गया। गोयल ने दोहराया कि भारत कभी भी समयसीमा के आधार पर समझौते नहीं करता। उन्होंने कहा कि सभी समझौतों में कई विविध आयाम होते हैं, जिन्हें जोड़ना पड़ता है। यदि दबाव में फैसला लिया जाए, तो गलतियां हो सकती हैं। यह दृष्टिकोण भारत की व्यापार नीति का मूल सिद्धांत है, जहां राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहते हैं। अमेरिका ने हाल ही में भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए हैं, जो व्यापार घाटे को कम करने के उद्देश्य से हैं। 2024-25 में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार 131.84 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 86.5 अरब डॉलर था। ये टैरिफ भारतीय निर्यातकों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, खासकर स्टील, फार्मास्यूटिकल्स और वस्त्र जैसे क्षेत्रों में। समझौता होने पर ये टैरिफ मुद्दे हल हो सकते हैं, और भारतीय निर्यात अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

वार्ताओं के समानांतर, भारत अमेरिका के साथ फ्रेमवर्क व्यापार समझौते पर भी काम कर रहा है, जो टैरिफ से जुड़े मुद्दों को संबोधित करेगा। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने हाल ही में कहा था कि भारत इस वर्ष के अंत तक फ्रेमवर्क समझौते को अंतिम रूप देने को आशावादी है। यह समझौता व्यापक बीटीए का पहला चरण होगा, जो शरद ऋतु 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखता है। हालांकि, गोयल ने किसी विशिष्ट समयसीमा का उल्लेख करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि समझौता तभी सफल होगा जब यह निष्पक्ष, संतुलित और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी हो। अमेरिकी पक्ष ने भारत के प्रस्तावों की सराहना की है, लेकिन कुछ क्षेत्रों जैसे कृषि उत्पादों और जैव ईंधनों में बाजार खोलने पर जोर दिया है। भारत इन मुद्दों पर सतर्क रुख अपनाए हुए है, ताकि घरेलू किसानों और छोटे उद्योगों के हित सुरक्षित रहें। गोयल के बयान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ टेलीफोनिक बातचीत की, जिसमें व्यापार, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। यह बातचीत वार्ताओं को राजनीतिक समर्थन प्रदान करती है। यूएसटीआर जेमिसन ग्रीर ने हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि भारत के प्रस्ताव अब तक के सर्वश्रेष्ठ हैं। गोयल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूएसटीआर की खुशी स्वागतयोग्य है, और यदि वे संतुष्ट हैं, तो डॉटेड लाइन्स पर हस्ताक्षर कर देना चाहिए। यह टिप्पणी व्यापार तनावों के बीच आई है, जहां अमेरिका ने व्यापार घाटे के कारण भारत पर दबाव बढ़ाया है। 2024-25 में अमेरिका के साथ भारत का व्यापार घाटा 46 अरब डॉलर रहा।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जो भारतीय निर्यात का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। समझौता होने पर द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि से भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, और रुपया जो हाल ही में 90 डॉलर प्रति की रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा है, पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। भारतीय उद्योगपति और निर्यातक इस समझौते का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि उच्च टैरिफ उनके अमेरिकी शिपमेंट्स को प्रभावित कर रहे हैं। गोयल ने कहा कि वार्ताएं विभिन्न स्तरों पर निरंतर चल रही हैं, और दोनों पक्ष सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अगले दौर की चर्चाओं में बाजार पहुंच और निवेश नियमों पर अधिक फोकस होगा। समझौते की रूपरेखा में दो समानांतर ट्रैक हैं: एक टैरिफ केंद्रित फ्रेमवर्क डील, और दूसरा व्यापक बीटीए। वाणिज्य मंत्रालय के स्रोतों के अनुसार, दोनों पक्षों ने हालिया चर्चाओं में बाजार पहुंच, नियामक बाधाओं और निवेश नियमों पर विचार-विमर्श किया। स्विट्जर की यात्रा ने इन मुद्दों पर साझा समझ विकसित की। गोयल ने जोर दिया कि भारत कभी भी राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। यह नीति किसानों, छोटे उद्योगों और मछुआरों के हितों की रक्षा करती है। अमेरिका कृषि उत्पादों जैसे मकई, सोयाबीन, गेहूं और कपास के लिए भारतीय बाजार खोलने पर जोर दे रहा है, जबकि भारत वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रहा है।

गोयल ने अन्य व्यापारिक मोर्चों पर भी अपडेट दिया। उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ एफटीए की रूपरेखा लगभग तैयार है, और जल्द ही इसका अंतिम रूप दिया जाएगा। यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त मारोस शेफकोविच के हालिया भारत दौरे में 23 अध्यायों पर चर्चा हुई, जिसमें 11 अध्याय बंद हो चुके हैं। बाजार पहुंच, मूल नियम, सेवाएं, तकनीकी बाधाएं और सतत विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं। गोयल ने कहा कि दोनों पक्ष जल्दी निष्कर्ष के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसी तरह, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ एफटीए वार्ताएं अंतिम चरण में हैं। न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले 12 दिसंबर 2025 को दिल्ली आ रहे हैं। चिली के साथ भी समझौता जल्द पूरा होने की उम्मीद है। इन वार्ताओं से भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति मजबूत हो रही है। गोयल ने कहा कि भारत 11 व्यापार समझौतों पर काम कर रहा है, जिसमें आसियान-भारत व्यापार वस्तु समझौते की समीक्षा और जापान के साथ भी शामिल है। इजरायल के साथ एफटीए 2010 से चल रही है, जिसमें 10 दौर पूरे हो चुके हैं और 280 टैरिफ लाइनों पर कवरेज है। मालदीव के साथ एफटीए की शर्तें जुलाई 2025 में हस्ताक्षरित हुईं। ये सभी पहल भारत को वैश्विक व्यापार में मजबूत स्थिति प्रदान करेंगी। अमेरिका के साथ समझौता इनमें से सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह न केवल टैरिफ कम करेगा, बल्कि प्रौद्योगिकी और निवेश में सहयोग बढ़ाएगा।

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