आगरा होटल में 18 दिन फ्री ठहरने वाला फर्जी विधायक: दिल्ली से आया विनोद 'सांसद' वाली स्कॉर्पियो पर रौब दिखाता रहा, पुलिस ने पकड़ा।
उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में एक फर्जी विधायक के चालाकी भरे खेल ने स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है। सदर कोतवाली क्षेत्र के होटल पवन में 29 अक्टूबर
उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में एक फर्जी विधायक के चालाकी भरे खेल ने स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है। सदर कोतवाली क्षेत्र के होटल पवन में 29 अक्टूबर को दिल्ली नंबर की एक स्कॉर्पियो कार से एक युवक पहुंचा। कार पर बड़े अक्षरों में 'सांसद' लिखा था और भाजपा का झंडा लहरा रहा था। उसने खुद को आगरा का विधायक विनोद कुमार बताते हुए कमरा मांगा और बिना किसी हिचकिचाहट के कब्जा जमा लिया। होटल संचालक पवन ने शुरू में उसकी बात मान ली, लेकिन जब 18 दिनों तक किराया न चुकाने पर शक हुआ तो पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने जांच की तो सच्चाई सामने आ गई। आरोपी विनोद कुमार असल में दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन का रहने वाला एक बेरोजगार युवक निकला, जो पहले आगरा में रह चुका था। उसके साथी मनोज को भी हिरासत में लिया गया। पुलिस ने स्कॉर्पियो कार जब्त कर ली, जो विनोद के नाम पर रजिस्टर्ड थी। यह घटना फर्जी पहचान से ठगी की उस प्रवृत्ति को उजागर करती है, जो समाज में विश्वास को कमजोर कर रही है।
घटना की शुरुआत 29 अक्टूबर को हुई। विनोद दिल्ली से स्कॉर्पियो लेकर आगरा पहुंचा। कार पर न सिर्फ 'राज्यसभा सांसद' लिखा था, बल्कि हूटर भी लगा हुआ था। होटल पवन में चेक-इन करते समय उसने स्टाफ को बताया कि वे आगरा के विधायक हैं और सरकारी काम से आए हैं। कमरा नंबर 204 लेने के बाद वह स्थायी रूप से बस गया। होटल संचालक पवन ने आजतक को बताया कि विनोद ने कहा था कि बिल बाद में उनके कार्यालय से आ जाएगा। लेकिन दिन बीतते गए और कोई भुगतान न हुआ। विनोद न केवल होटल में मुफ्त रह रहा था, बल्कि आसपास के रेस्टोरेंटों से भी खाना-पानी मंगवाता था। वह अपने परिचितों को बुलाकर पार्टी करता और बिल चुकाने से बचता। पवन ने कहा कि विनोद का रवैया इतना दबंग था कि स्टाफ डर जाता था। एक बार तो उसने होटल के बाहर खड़ी कार दिखाकर धमकी दी कि 'मैं विधायक हूं, सब संभाल लूंगा।'
विनोद की फर्जीवाड़ी यहीं नहीं रुकी। वह खुद को विधायक बताकर शहर के विभिन्न आयोजनों में घुसपैठ करने लगा। 15 नवंबर को एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक क्रिकेट मैच का आयोजन था। विनोद वहां पहुंचा और स्टाफ को धमकाते हुए कहा कि 'मैं आगरा का विधायक हूं, कल से यहां क्रिकेट खेलूंगा। मेरे लिए अलग व्यवस्था करो।' स्टेडियम प्रबंधन ने उसकी बात मान ली क्योंकि कार पर सांसद का स्टिकर और भाजपा झंडा देखकर शक न हुआ। इसी तरह, वह स्थानीय दुकानों पर जाकर सामान मुफ्त मंगवाता। एक दुकानदार ने बताया कि विनोद ने मोबाइल रिचार्ज और अन्य सामान लिया और बिल फाड़ दिया, कहते हुए कि 'विधायक साहब का बिल कौन मांगेगा।' सोशल मीडिया पर भी वह वीडियो बनाकर खुद को विधायक बताता। एक वीडियो में वह कार से उतरते हुए बोला, 'आगरा विधायक विनोद कुमार पहुंच गए।' यह वीडियो वायरल होने से स्थानीय लोग भ्रमित हो गए।
होटल संचालक पवन को शक तब हुआ जब 16 नवंबर को विनोद ने किराया मांगने पर गुस्सा दिखाया। उसने कहा कि 'एक दिसंबर तक सरकारी काम है, तब तक रुको।' पवन ने सहनशीलता खो दी और सौदागर लेन पुलिस चौकी पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस टीम मौके पर पहुंची, लेकिन कार पर सांसद स्टिकर देखकर हिचकिचा गई। फिर भी, उन्होंने विनोद से पूछताछ शुरू की। विनोद ने पहले तो रौब दिखाया, लेकिन जब पुलिस ने विधानसभा रिकॉर्ड चेक किया तो राज खुल गया। असल विनोद कुमार कोई विधायक नहीं था। वह दिल्ली में पार्षद चुनाव लड़ चुका था, लेकिन हार गया। आगरा में उसके पुराने संपर्क थे, इसलिए यहां ठगी का प्लान बनाया। उसके साथी मनोज ने कार की देखभाल की और ठगी में साथ दिया। पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। सदर कोतवाली में धारा 420 (धोखाधड़ी), 506 (धमकी) और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ।
पुलिस पूछताछ में विनोद ने कबूल किया कि वह आगरा में रह चुका था और यहां के लोगों को जानता था। दिल्ली शिफ्ट होने के बाद बेरोजगारी से तंग आकर इस फर्जीवाड़े का सहारा लिया। एसीपी सदर इमरान अहमद ने बताया कि विनोद के पास फर्जी आईडी कार्ड भी मिले, जिनमें विधायक का नाम लिखा था। कार जब्त करने पर पता चला कि यह 2018 मॉडल की है और विनोद के नाम पर रजिस्टर्ड। हूटर और स्टिकर बाद में लगाए गए थे। एडीसीपी सिटी आदित्य कुमार ने जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस अब अन्य ठगी के मामलों की पड़ताल कर रही है। क्या विनोद ने पहले भी ऐसा किया? यह जानने के लिए दिल्ली पुलिस से संपर्क किया जा रहा है। स्थानीय भाजपा नेताओं ने कहा कि वे विनोद को नहीं जानते और पार्टी से कोई लेना-देना नहीं।
यह घटना आगरा जैसे पर्यटन शहर में सुरक्षा और जागरूकता की कमी को दिखाती है। आगरा ताजमहल के लिए मशहूर है, जहां रोज हजारों पर्यटक आते हैं। होटल वाले अक्सर VIP गेस्ट को महत्व देते हैं, लेकिन फर्जी पहचान का फायदा उठाया जाता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में हर साल सैकड़ों फर्जी पहचान के मामले दर्ज होते हैं। ज्यादातर ठग सरकारी अधिकारी या नेता बनकर ठगी करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस को फर्जी स्टिकर और हूटर पर सख्ती करनी चाहिए। वाहन विभाग ने पहले ही चेतावनी दी है कि अनधिकृत स्टिकर लगाने पर जुर्माना लगेगा। होटल एसोसिएशन ने कहा कि वे अब चेक-इन पर आईडी वेरिफिकेशन सख्त करेंगे।
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