इंडिगो संकट में सख्ती- जरूरत पड़ी तो सीईओ को भी बर्खास्त करेंगे, बोले नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू।
दिसंबर 2025 में देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने एक अभूतपूर्व संकट का सामना किया, जब नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों के अमल
दिसंबर 2025 में देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने एक अभूतपूर्व संकट का सामना किया, जब नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों के अमल के बाद उसके क्रू रोस्टरिंग और ऑपरेशनल प्लानिंग में गंभीर खामियां सामने आईं। 2 दिसंबर से शुरू हुए इस संकट ने पूरे हवाई यातायात को प्रभावित किया, जिसमें हजारों उड़ानें रद्द हुईं और लाखों यात्री हवाई अड्डों पर फंस गए। नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने एक इंटरव्यू में इसकी पूरी जिम्मेदारी एयरलाइन पर डालते हुए कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स सहित शीर्ष प्रबंधन को बर्खास्त किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संकट एयरलाइन की आंतरिक अव्यवस्था का परिणाम है, और सरकार ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। मंत्रालय ने पहले ही एयरलाइन को उसके कुल उड़ानों में 10 प्रतिशत की कटौती का आदेश दिया है, ताकि ऑपरेशन स्थिर हो सकें और रद्दीकरण कम हों। संकट की शुरुआत नवंबर 2025 में लागू हुए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों से जुड़ी, जो पायलटों और क्रू की थकान को कम करने के लिए डिजाइन किए गए थे। इन नियमों के तहत उड़ान के घंटों, रेस्ट पीरियड और ड्यूटी शिफ्ट्स पर सख्त सीमाएं लगाई गईं, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। मंत्रालय ने सभी एयरलाइनों के साथ कई दौर की चर्चाएं की थीं, और 1 नवंबर से इनका अमल शुरू होने से पहले सभी को पर्याप्त समय दिया गया था। हालांकि, इंडिगो ने दावा किया कि इन नियमों ने उसके क्रू की उपलब्धता को प्रभावित किया, जिससे रोस्टरिंग में समस्या हुई। लेकिन मंत्री नायडू ने इंटरव्यू में कहा कि अन्य एयरलाइनों ने इन नियमों का पालन बिना किसी बड़े व्यवधान के किया, जबकि इंडिगो की समस्या पूरी तरह आंतरिक थी। उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने एयरलाइन के साथ कई बैठकें कीं, जिसमें स्पष्टीकरण दिए गए, फिर भी कंपनी ने पर्याप्त क्रू भर्ती या रोस्टर प्लानिंग नहीं की।
2 दिसंबर को पहली बड़ी रद्दीकरण की लहर आई, जब इंडिगो ने सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दीं। अगले दिनों में यह संख्या बढ़ती गई, और 5 दिसंबर तक दैनिक उड़ानें 700 से भी नीचे चली गईं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्री घंटों इंतजार करते रहे, बैगेज फंस गए और वैकल्पिक उड़ानों की कमी से किराए आसमान छूने लगे। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2 से 9 दिसंबर तक करीब 5,000 उड़ानें रद्द हुईं, जिससे लाखों यात्री प्रभावित हुए। कंपनी ने शुरुआत में इसे नियमों की वजह बताया, लेकिन मंत्री ने इंटरव्यू में संकेत दिया कि यह जानबूझकर की गई लापरवाही हो सकती है। उन्होंने कहा कि जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि ऑपरेशनल क्षमता होने के बावजूद उड़ानें क्यों रद्द की गईं, और क्या इसमें कोई पूर्व नियोजित रणनीति थी। इस संकट के दौरान मंत्रालय ने तत्काल कदम उठाए। 6 दिसंबर को डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर को शो-कॉज नोटिस जारी किया, जिसमें 24 घंटे में मिसमैनेजमेंट की सफाई मांगी गई। नोटिस में कहा गया कि सीईओ के रूप में एयरलाइन के प्रभावी प्रबंधन की जिम्मेदारी उनकी है, लेकिन उन्होंने विश्वसनीय ऑपरेशंस सुनिश्चित करने में विफलता दिखाई। उसी दिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी हस्तक्षेप किया और सीईओ से सीधी बात की, जिसमें 10 दिनों में स्थिति सामान्य करने का निर्देश दिया गया। मंत्रालय ने एयरफेयर पर कैप लगाया, जिसमें दिल्ली-मुंबई जैसे रूट्स पर 7,500 से 18,000 रुपये तक की सीमा तय की गई। साथ ही, सभी रद्द उड़ानों के लिए रिफंड प्रक्रिया को तेज करने का आदेश दिया गया, और 6 दिसंबर तक प्रभावित यात्रियों को 100 प्रतिशत रिफंड पूरा करने को कहा गया।
9 दिसंबर को मंत्रालय ने इंडिगो के शीर्ष प्रबंधन, जिसमें सीईओ पीटर एल्बर्स शामिल थे, को बुलाया। बैठक में मंत्री नायडू और मंत्रालय के सचिव समीर सिन्हा ने ऑपरेशनल स्थिति, रिफंड, बैगेज डिलीवरी और यात्री सुविधाओं पर विस्तृत चर्चा की। एल्बर्स ने बताया कि 6 दिसंबर तक के सभी रिफंड पूरे हो चुके हैं, और शेष को जल्द निपटाया जा रहा है। उन्होंने बैगेज डिलीवरी में भी प्रगति का जिक्र किया, जिसमें 3,000 से अधिक बैग यात्रियों तक पहुंचाए गए। बैठक के बाद मंत्रालय ने एयरलाइन को कुल रूट्स में 10 प्रतिशत कटौती का आदेश जारी किया, जो डीजीसीए के 5 प्रतिशत के निर्देश से दोगुना है। मंत्री ने कहा कि यह कदम एयरलाइन को स्थिर करने में मदद करेगा, और सभी गंतव्यों को कवर करते हुए ऑपरेशन जारी रहेंगे। एल्बर्स ने बैठक के बाद एक वीडियो संदेश में कहा कि ऑपरेशन पूरी तरह स्थिर हो चुके हैं, और 9 दिसंबर को 1,800 से अधिक उड़ानें संचालित हुईं। मंत्री नायडू ने इंटरव्यू में जोर दिया कि यह संकट केवल इंडिगो की आंतरिक अव्यवस्था का मामला है, जिसमें क्रू प्रबंधन, रोस्टरिंग सिस्टम और संचार की कमी प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने पिछले सात दिनों में लगातार समीक्षा बैठकें कीं, और यात्री सुविधाओं पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। संसद में भी उन्होंने स्थिति की जानकारी दी, जहां लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं हुआ। फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों को अस्थायी रूप से 10 फरवरी तक स्थगित किया गया है, लेकिन उसके बाद इन्हें पूरी सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य एयरलाइनों ने इन नियमों का पालन बिना किसी समस्या के किया, इसलिए इंडिगो को कोई विशेष छूट नहीं मिलेगी।
जांच का दायरा व्यापक है। मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है, जो न केवल एयरलाइन के ऑपरेशंस की पड़ताल करेगी, बल्कि डीजीसीए के भूमिका की भी समीक्षा करेगी। इंटरव्यू में मंत्री ने कहा कि डीजीसीए के हैंडलिंग पर भी सवाल उठे हैं, और विशेषज्ञों तथा एनजीओ के दावों के अनुसार एयरलाइन का नियामक पर प्रभाव की जांच होगी। उन्होंने यात्री परेशानी के लिए माफी मांगी और कहा कि प्रभावित लोगों को मुआवजा सुनिश्चित किया जाएगा। रिफंड के अलावा, वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था और अतिरिक्त सुविधाओं पर जोर दिया गया। मंत्रालय ने ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स के साथ समन्वय बढ़ाया, ताकि रीयल-टाइम डेटा से किराए पर नजर रखी जा सके। इस संकट ने भारतीय विमानन क्षेत्र की कमजोरियों को उजागर किया। इंडिगो का बाजार हिस्सा करीब 65 प्रतिशत है, जिससे इसकी किसी भी समस्या का असर पूरे सेक्टर पर पड़ता है। मंत्री ने इंटरव्यू में कहा कि सरकार अब नई एयरलाइनों को प्रोत्साहित करने पर विचार कर रही है, ताकि डुओपॉली की स्थिति कम हो। उन्होंने लंबे समय के उपायों पर जोर दिया, जिसमें क्रू भर्ती, ट्रेनिंग और तकनीकी अपग्रेड शामिल हैं। एयरलाइन ने भी आंतरिक समीक्षा शुरू की है, जिसमें संकट के कारणों का विश्लेषण और सुधारात्मक कदम शामिल हैं। 9 दिसंबर तक स्थिति में सुधार दिखा, लेकिन मंत्रालय ने चेतावनी दी कि पूर्ण सामान्यीकरण तक निगरानी बरकरार रहेगी।
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