UP: सडक पर पानी में एंबुलेंस बीच में बंद, राहगीरों ने धक्का मारकर एंबुलेंस को साइड किया, जलभराव में फंसी एंबुलेंस। 

ग्रेटर नोएडा के तिलपता-दादरी मुख्य मार्ग पर भारी बारिश के कारण हुए जलभराव ने एक गंभीर स्थिति पैदा कर दी, जब एक मरीज को ले जा रही एंबुलेंस सड़क पर भरे...

Jul 2, 2025 - 11:16
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UP: सडक पर पानी में एंबुलेंस बीच में बंद, राहगीरों ने धक्का मारकर एंबुलेंस को साइड किया, जलभराव में फंसी एंबुलेंस। 

ग्रेटर नोएडा के तिलपता-दादरी मुख्य मार्ग पर भारी बारिश के कारण हुए जलभराव ने एक गंभीर स्थिति पैदा कर दी, जब एक मरीज को ले जा रही एंबुलेंस सड़क पर भरे पानी में फंस गई और खराब हो गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें राहगीरों को एंबुलेंस को धक्का देकर सड़क के किनारे ले जाते देखा गया। यह घटना न केवल ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की जल निकासी व्यवस्था की नाकामी को उजागर करती है, बल्कि स्थानीय लोगों की मानवता और एकजुटता को भी सामने लाती है। 1 जुलाई 2025 की सुबह, ग्रेटर नोएडा के तिलपता-दादरी मुख्य मार्ग पर भारी बारिश के बाद सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया। ABP न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस जलभराव में एक एंबुलेंस, जिसमें एक मरीज सवार था, फंस गई और खराब हो गई। वायरल वीडियो में दिखाया गया कि स्थानीय लोग और राहगीर तुरंत एंबुलेंस की मदद के लिए आगे आए और उसे धक्का देकर सड़क के किनारे ले गए, ताकि मरीज को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके। यह घटना तिलपता गांव के पास हुई, जो ग्रेटर नोएडा के उन क्षेत्रों में से एक है, जहां जल निकासी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।

एक्स पर कई यूजर्स, जैसे @GreaterNoidaW और @raftartoday, ने इस घटना की निंदा करते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही पर सवाल उठाए। @Narendraprime50 ने लिखा, “ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की खुली पोल, पानी भरने के बाद पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं।” इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की तैयारियों की कमी को उजागर किया, खासकर मॉनसून के दौरान, जब जलभराव की समस्या बार-बार सामने आती है। ग्रेटर नोएडा में जलभराव की समस्या कोई नई बात नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, शहर के कई हिस्सों, जैसे सेक्टर 94, 96, 127, राजनिगंधा चौक, और एक्सपो मार्ट अंडरपास, में बारिश के बाद जलभराव आम है। इसकी वजह नालियों का अवरुद्ध होना, अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था, और अनियोजित शहरीकरण है। तिलपता-दादरी मार्ग पर भी नालियों की सफाई समय पर नहीं की गई, जिसके कारण बारिश का पानी सड़कों पर जमा हो गया। हिंदुस्तान टाइम्स की एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया कि खोड़ा कॉलोनी जैसे पड़ोसी क्षेत्रों से आने वाला पानी भी ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 62 जैसे इलाकों में जलभराव का कारण बनता है। नोएडा प्राधिकरण ने मॉनसून से पहले नालियों की सफाई के लिए ठेकेदार नियुक्त करने की निविदाएं जारी की थीं, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। इसके अलावा, हिंदन और यमुना नदियों के जलस्तर में वृद्धि भी नोएडा और ग्रेटर नोएडा के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा करती है। वायरल वीडियो में दिखाया गया कि एंबुलेंस में सवार मरीज की स्थिति गंभीर थी, और जलभराव के कारण वाहन के खराब होने से उसकी जान जोखिम में पड़ गई। हालांकि, राहगीरों की त्वरित कार्रवाई ने स्थिति को और बिगड़ने से रोका। एक्स पोस्ट में @praveen_singh5 ने लिखा, “पानी में फंसने के चलते एंबुलेंस खराब हुई, लेकिन लोगों ने धक्का मारकर इसे निकाला।” यह घटना स्थानीय लोगों की संवेदनशीलता और सामुदायिक भावना को दर्शाती है, जिन्होंने बिना देरी किए मरीज की मदद की। हालांकि, इस घटना ने यह सवाल भी उठाया कि अगर जलभराव के कारण ऐसी स्थिति बार-बार होती है, तो आपातकालीन सेवाओं, जैसे एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड, के लिए क्या इंतजाम हैं। न्यूज18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जलभराव के कारण आपातकालीन सेवाएं अक्सर प्रभावित होती हैं, जिससे मरीजों और अन्य जरूरतमंद लोगों को समय पर सहायता नहीं मिल पाती।

ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) पर इस घटना के बाद तीखी आलोचना हुई। एक्स पर @Pankajk78010533 ने लिखा, “पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने से लोग परेशान हुए।” टाइम्स ऑफ इंडिया की एक पुरानी रिपोर्ट में बताया गया कि नोएडा प्राधिकरण ने 2023 में जलभराव की शिकायतों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर (0120-2423795) शुरू किया था, जो मॉनसून के दौरान 24 घंटे काम करता है। हालांकि, इस हेल्पलाइन की प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहे हैं, क्योंकि नालियों की सफाई और बुनियादी ढांचे में सुधार का काम समय पर नहीं होता। GNIDA के अतिरिक्त सीईओ अमनदीप दुली ने 2023 में स्वीकार किया था कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में सड़क बुनियादी ढांचे को बेहतर करने और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं। लेकिन 2025 तक स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिखा, जैसा कि तिलपता-दादरी मार्ग की इस घटना से स्पष्ट है।

इस घटना ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी। @ABPNews ने अपने पोस्ट में लिखा, “ग्रेटर नोएडा में बारिश के कारण सड़कों पर पानी भर गया और एंबुलेंस बीच में बंद हो गई।” यह घटना न केवल प्रशासन की नाकामी को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि मॉनसून के दौरान ग्रेटर नोएडा जैसे नियोजित शहरों में भी बुनियादी ढांचे की कमी एक बड़ी चुनौती है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा पुलिस ने 2024 में 19 जलभराव hotspots की पहचान की थी, जिनमें से कई ग्रेटर नोएडा में हैं। इनमें से कुछ क्षेत्रों में अस्थायी उपाय किए गए, जैसे पंपों की तैनाती, लेकिन दीर्घकालिक समाधान, जैसे नालियों का पुनर्निर्माण और अंडरपास में संरचनात्मक बदलाव, अभी भी अधूरे हैं। इस घटना ने ग्रेटर नोएडा में जल निकासी व्यवस्था को बेहतर करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया। द इकॉनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया कि GNIDA ने 2023 में स्टॉर्मवॉटर नेटवर्क को बेहतर करने के लिए एक शहरी योजनाकार को नियुक्त करने की योजना बनाई थी। इसके अलावा, नालियों की सफाई और सड़कों की मरम्मत के लिए ठेकेदारों की नियुक्ति भी प्रस्तावित थी, लेकिन इन योजनाओं का प्रभाव अभी तक धरातल पर नहीं दिखा। ग्रेटर नोएडा के तिलपता-दादरी मार्ग पर एंबुलेंस के फंसने की यह घटना एक गंभीर चेतावनी है। यह न केवल प्राधिकरण की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि मॉनसून के दौरान आपातकालीन सेवाओं की सुरक्षा के लिए बेहतर योजना की जरूरत को भी सामने लाती है। राहगीरों की त्वरित कार्रवाई ने मरीज की जान बचाने में मदद की, लेकिन यह घटना यह सवाल उठाती है कि अगर ऐसी स्थिति बार-बार होती है, तो क्या होगा।

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