ग्रेटर नोएडा में मृत महिला के खाते में आये 113 करोड़ रुपये, सनसनी के बीच, आयकर विभाग ने शुरू की जांच।
Greater Noida: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के दनकौर थाना क्षेत्र के ऊंची दनकौर मोहल्ले में उस समय सनसनी फैल गई, जब दो महीने पहले मृत एक महिला...
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के दनकौर थाना क्षेत्र के ऊंची दनकौर मोहल्ले में उस समय सनसनी फैल गई, जब दो महीने पहले मृत एक महिला, गायत्री देवी, के बैंक खाते में अचानक 113 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा होने की जानकारी सामने आई। इस खाते का उपयोग मृतका का बेटा, दीपक कुमार, यूपीआई के माध्यम से कर रहा था। सोमवार, 4 अगस्त 2025 की शाम को दीपक को अपने फोन पर भारी राशि जमा होने का मैसेज मिला। जब उसने खाते का बैलेंस चेक किया, तो वह हैरान रह गया। उसने तुरंत कोटक महिंद्रा बैंक की स्थानीय शाखा में संपर्क किया, जहां अधिकारियों ने बताया कि खाता फ्रीज कर दिया गया है और मामले की जांच आयकर विभाग को सौंप दी गई है। इस रहस्यमयी घटना ने न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि अधिकारियों को भी चौंका दिया।
गायत्री देवी, जो ऊंची दनकौर मोहल्ले की निवासी थीं, का निधन मई 2025 में हो गया था। उनके बेटे, दीपक कुमार, ने अपनी मां के कोटक महिंद्रा बैंक खाते को यूपीआई लेनदेन के लिए उपयोग करना जारी रखा। 4 अगस्त 2025 की शाम को दीपक को अपने फोन पर एक मैसेज मिला, जिसमें खाते में 113.5 करोड़ रुपये जमा होने की सूचना थी। हैरान होकर उसने खाते का बैलेंस चेक किया और पाया कि खाते में वाकई इतनी बड़ी राशि जमा हो चुकी है।
दीपक ने तुरंत कोटक महिंद्रा बैंक की दनकौर शाखा में संपर्क किया। बैंक अधिकारियों ने उसे बताया कि इतनी बड़ी राशि के जमा होने के कारण खाता फ्रीज कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने इस राशि के स्रोत या लेनदेन के बारे में कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद, बैंक ने इस मामले को आयकर विभाग को सौंप दिया, और अब आयकर विभाग इस रहस्यमयी लेनदेन की जांच कर रहा है।
- आयकर विभाग की जांच
आयकर विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह राशि किसी बड़े वित्तीय घोटाले या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी हो सकती है। आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “इतनी बड़ी राशि का एक मृत व्यक्ति के खाते में जमा होना असामान्य और संदिग्ध है। हम इस लेनदेन के स्रोत, इसमें शामिल पक्षों और संभावित अवैध गतिविधियों की जांच कर रहे हैं।”
विभाग यह भी जांच कर रहा है कि क्या यह राशि गलती से जमा हुई या यह किसी सुनियोजित अपराध का हिस्सा है। दीपक कुमार से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उसे इस लेनदेन के बारे में कोई जानकारी थी या उसने यूपीआई के माध्यम से कोई संदिग्ध गतिविधि की थी।
- संदिग्ध लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका
इस तरह की घटनाएं अक्सर मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी, या फर्जी कंपनियों के जरिए अवैध धन को वैध बनाने से जुड़ी होती हैं। ग्रेटर नोएडा और नोएडा क्षेत्र में पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं। उदाहरण के लिए, दिसंबर 2023 में गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने एक बड़े जीएसटी घोटाले का पर्दाफाश किया था, जिसमें 29 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस घोटाले में फर्जी कंपनियों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और जीएसटी रिफंड का दुरुपयोग किया गया था। पुलिस ने 54 सिम कार्ड, 41 जाली स्टांप, 18 जाली आधार कार्ड और 20 बैंक चेकबुक जब्त किए थे।
हालांकि, गायत्री देवी के मामले में अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह राशि कहां से आई और इसका उद्देश्य क्या था। विशेषज्ञों का कहना है कि मृत व्यक्तियों के खातों का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा सकता है, क्योंकि ऐसे खाते कम निगरानी में रहते हैं। आयकर विभाग अब यह जांच कर रहा है कि क्या यह खाता किसी बड़े वित्तीय घोटाले का हिस्सा था या गलती से गलत खाते में राशि ट्रांसफर हुई।
- दीपक कुमार का बयान
दीपक कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मेरी मां का निधन दो महीने पहले हुआ था। मैं उनके खाते को छोटे-मोटे लेनदेन के लिए यूपीआई के जरिए इस्तेमाल करता था। सोमवार को अचानक इतनी बड़ी राशि का मैसेज आया, जिसे देखकर मैं हैरान रह गया। मैंने तुरंत बैंक में संपर्क किया, लेकिन मुझे कोई जानकारी नहीं दी गई। मैं चाहता हूं कि इस मामले की पूरी जांच हो और सच सामने आए।”
दीपक ने यह भी बताया कि उनकी मां एक साधारण गृहिणी थीं और उनके पास इतनी बड़ी राशि का कोई स्रोत नहीं था। उन्होंने पुलिस और आयकर विभाग से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोरी। कई लोगों ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बताया, जबकि कुछ ने इसे बैंकिंग सिस्टम में तकनीकी खामी माना। एक X यूजर ने लिखा, “113 करोड़ रुपये मृत व्यक्ति के खाते में? यह कोई साधारण गलती नहीं हो सकती। यह मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा मामला है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “बैंकों को ऐसे खातों पर नजर रखनी चाहिए। यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है।”
हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि यह राशि गलती से गलत खाते में ट्रांसफर हुई हो सकती है, जैसा कि पहले कुछ मामलों में देखा गया है। उदाहरण के लिए, 2023 में एक एनआरआई के खाते में गलत टीडीएस जमा होने के कारण दिल्ली हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा था।
कोटक महिंद्रा बैंक ने इस मामले में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया। बैंक के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम इस मामले में आयकर विभाग के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। खाते में संदिग्ध लेनदेन की सूचना मिलते ही हमने इसे फ्रीज कर दिया और संबंधित अधिकारियों को सूचित किया।”
बैंकों के लिए ऐसी बड़ी राशि के लेनदेन की निगरानी करना अनिवार्य होता है, खासकर जब यह राशि किसी मृत व्यक्ति के खाते में जमा हो। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंकों को संदिग्ध लेनदेन की जानकारी फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) को देनी होती है। इस मामले में कोटक महिंद्रा बैंक ने दावा किया कि उसने सभी नियमों का पालन किया है।
ग्रेटर नोएडा और नोएडा क्षेत्र में पहले भी कई वित्तीय घोटाले सामने आए हैं। 2017 में, नोएडा की एक कंपनी, एब्लेज इंफो सॉल्यूशंस लिमिटेड, पर 3,700 करोड़ रुपये के इंटरनेट घोटाले का आरोप लगा था। इस घोटाले में कंपनी ने सोशल मीडिया के जरिए निवेशकों को लुभाया और उनके पैसे को फर्जी योजनाओं में घुमाया। आयकर विभाग ने इस मामले में 6 करोड़ रुपये की नकदी जमा होने की जांच शुरू की थी।
इसी तरह, 2023 में गौतम बुद्ध नगर में जीएसटी घोटाले में 29 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो फर्जी कंपनियों के जरिए टैक्स चोरी कर रहे थे। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्र अवैध वित्तीय गतिविधियों का केंद्र बन सकते हैं, जिसके लिए सख्त निगरानी की जरूरत है।
यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी जैसे गंभीर अपराधों की ओर इशारा करता है। आयकर अधिनियम की धारा 132 के तहत, आयकर विभाग के पास संदिग्ध लेनदेन की जांच करने और संपत्ति जब्त करने का अधिकार है। इस मामले में, अगर यह साबित हो जाता है कि यह राशि अवैध स्रोतों से आई है, तो इसमें शामिल लोगों पर मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई हो सकती है।
सामाजिक दृष्टिकोण से, यह घटना आम लोगों के बीच बैंकों और वित्तीय प्रणालियों पर भरोसे को प्रभावित कर सकती है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि अगर एक मृत व्यक्ति के खाते में इतनी बड़ी राशि जमा हो सकती है, तो बैंकों की निगरानी प्रणाली कितनी प्रभावी है।
ग्रेटर नोएडा के ऊंची दनकौर में गायत्री देवी के खाते में 113 करोड़ रुपये जमा होने की घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। आयकर विभाग की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि यह राशि कहां से आई और इसका उद्देश्य क्या था। यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी, या तकनीकी गलती का परिणाम हो सकता है। पुलिस और आयकर विभाग की त्वरित कार्रवाई ने इस मामले को गंभीरता से लिया है, लेकिन यह घटना बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए एक चेतावनी है कि उन्हें अपनी निगरानी प्रणाली को और मजबूत करना होगा। यह मामला समाज को यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी महत्वपूर्ण है।
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