यमन में Nimisha Priya की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट- केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपें, फैसला उसका होगा।
Supreme Court Nimisha Priya: सुप्रीम कोर्ट ने यमन की जेल में मौत की सजा का सामना कर रही केरल की नर्स Nimisha Priya के मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार...
सुप्रीम कोर्ट ने यमन की जेल में मौत की सजा का सामना कर रही केरल की नर्स Nimisha Priya के मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार को सलाह दी कि वह इस मामले में ज्ञापन स्वीकार करे और अपने विवेक से फैसला ले। यह टिप्पणी जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दी, जब निमिषा के समर्थन में बनी संस्था 'सेव Nimisha Priya इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल' की याचिका पर सुनवाई हो रही थी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यमन जैसे देश में, जहां भारत का राजनयिक प्रभाव सीमित है, वह कोई सीधा आदेश नहीं दे सकता। इस मामले में केंद्र सरकार ने कहा कि वह हर संभव कोशिश कर रही है, लेकिन 'ब्लड मनी' (दिया) के जरिए पीड़िता की जान बचाने का एकमात्र रास्ता अब पीड़ित परिवार की सहमति पर निर्भर है।
- Nimisha Priya का मामला
Nimisha Priya, 38 वर्षीय नर्स, केरल के पलक्कड़ जिले के कोल्लेंगोड की रहने वाली हैं। वह 2008 में बेहतर रोजगार के लिए यमन गई थीं। शुरू में उन्होंने सना की एक सरकारी अस्पताल में नर्स के रूप में काम किया। 2011 में वह केरल लौटीं और टॉमी थॉमस से शादी की। इसके बाद दंपति यमन चले गए, जहां उनकी एक बेटी हुई। 2014 में आर्थिक कारणों से उनके पति और बेटी भारत लौट आए, क्योंकि यमन में गृहयुद्ध शुरू हो चुका था। भारत सरकार ने यमन की यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके कारण निमिषा का परिवार उनके पास नहीं जा सका।
2014 में निमिषा ने यमन में अपनी क्लिनिक शुरू करने का फैसला किया। यमनी कानून के अनुसार, विदेशियों को व्यवसाय शुरू करने के लिए स्थानीय साझेदार की जरूरत होती है। निमिषा ने तलाल अब्दो महदी नाम के एक यमनी व्यवसायी को अपना साझेदार बनाया। शुरू में दोनों के बीच संबंध अच्छे थे, लेकिन बाद में निमिषा ने आरोप लगाया कि महदी ने उनकी क्लिनिक की आय पर कब्जा कर लिया, उनके पैसे चुराए, उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया, और उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
- 2017 की घटना और सजा
जुलाई 2017 में, निमिषा ने अपने पासपोर्ट को वापस लेने के लिए महदी को बेहोश करने की योजना बनाई। उन्होंने एक जेल वार्डन की सलाह पर महदी को सेडेटिव इंजेक्शन दिया, लेकिन गलत खुराक के कारण महदी की मृत्यु हो गई। निमिषा ने अपने एक सहयोगी की मदद से महदी के शव को टुकड़ों में काटकर एक पानी के टैंक में फेंक दिया। अगस्त 2017 में, सऊदी अरब की सीमा के पास निमिषा को गिरफ्तार कर लिया गया। 2018 में सना की एक स्थानीय अदालत में उनकी सुनवाई हुई, जहां उन्हें हत्या का दोषी ठहराया गया। 2020 में उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। निमिषा के परिवार ने 2023 में यमन की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल में अपील की, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। दिसंबर 2024 में, यमन के राष्ट्रपति राशद अल-अलीमी ने उनकी फांसी को मंजूरी दे दी।
14 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निमिषा की याचिका पर सुनवाई शुरू की, जिसमें केंद्र सरकार से राजनयिक हस्तक्षेप की मांग की गई थी। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने कोर्ट को बताया कि यमन में भारत का कोई राजनयिक मिशन नहीं है, और सना पर हूती विद्रोहियों का नियंत्रण होने से स्थिति जटिल है। उन्होंने कहा, "हमने हर संभव कोशिश की है, लेकिन अब केवल ब्लड मनी ही एकमात्र रास्ता है।" कोर्ट ने 15 जुलाई को निमिषा की फांसी को स्थगित करने की खबर का स्वागत किया, जो यमनी अधिकारियों ने 14 जुलाई को आदेश जारी कर किया था।
19 जुलाई को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह निमिषा के परिवार और समर्थकों का ज्ञापन स्वीकार करे और इस पर विचार करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह यमन जैसे विदेशी देश के कानून में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। जस्टिस मेहता ने टिप्पणी की, "हमारी सीमाएं हैं। हम केवल सरकार को सुझाव दे सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला उनका होगा।" कोर्ट ने अगली सुनवाई 22 जुलाई के लिए निर्धारित की।
यमन का इस्लामी कानून (शरिया) 'दिया' या ब्लड मनी की अनुमति देता है, जिसमें पीड़ित परिवार को मुआवजा देकर सजा को माफ किया जा सकता है। निमिषा के समर्थकों ने 'सेव Nimisha Priya इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल' के जरिए 58,000 डॉलर (लगभग 48 लाख रुपये) जुटाए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि 10 लाख डॉलर की पेशकश की गई थी, लेकिन महदी के परिवार ने इसे ठुकरा दिया। महदी के भाई, अब्देलफत्ताह महदी, ने बीबीसी को बताया, "हमारा रुख स्पष्ट है। हम केवल क़िसास (प्रतिशोध) चाहते हैं, और कुछ नहीं।" उन्होंने कहा कि परिवार ने कई मध्यस्थता प्रस्तावों को खारिज किया है और वह निमिषा को सजा देने पर अड़े हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह यमनी अधिकारियों, जेल प्रशासन, और अभियोजक कार्यालय के संपर्क में है। मंत्रालय ने निमिषा के परिवार को कानूनी और कांसुलर सहायता दी है, जिसमें वकील की नियुक्ति और नियमित जेल मुलाकात शामिल हैं। जनवरी 2025 में ईरान ने भी मदद की पेशकश की, क्योंकि हूती विद्रोहियों का ईरान से संबंध है। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की अपील की है।
निमिषा की मां, प्रेमकुमारी, अप्रैल 2024 से यमन में हैं और महदी के परिवार से माफी मांगने की कोशिश कर रही हैं। अप्रैल 2024 में वह 11 साल बाद अपनी बेटी से जेल में मिलीं। सना में रह रहे भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता सैमुअल जेरोम इस मामले में मध्यस्थता कर रहे हैं।
Nimisha Priya का मामला भारत और यमन के बीच जटिल राजनयिक और कानूनी चुनौतियों को दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ज्ञापन पर विचार करने को कहा है, लेकिन यमन में हूती नियंत्रण और पीड़ित परिवार की असहमति के कारण स्थिति जटिल है। ब्लड मनी के जरिए माफी की संभावना अभी बाकी है, लेकिन इसके लिए महदी के परिवार की सहमति जरूरी है। भारत सरकार, सामाजिक कार्यकर्ता, और निमिषा का परिवार हर संभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन समय तेजी से बीत रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जुलाई 2025 में यमन में सभी मौत की सजाओं को रद्द करने की मांग की। निमिषा के वकील, सुभाष चंद्रन, ने कहा कि उनकी सुनवाई अरबी में हुई, जिसे वह समझती नहीं थीं, और उन्हें वकील या दुभाषिया नहीं दिया गया। उन्होंने निष्पक्ष सुनवाई की मांग की है।
What's Your Reaction?